Published On : Mon, Sep 5th, 2016

“खाकी व खादी” आड़े आ रही आवारा पशु पकड़ने के अभियान में

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Cattle


नागपुर:
सड़क पर खुले विचरण कर रहे रोड किंग याने आवारा पशु को लेकर मनपा की दोहरी नीति सामने आने से मनपा प्रशासन पर से दिनों-दिन विश्वास कम होता जा रहा है। कहते है आवारा पशु को पकड़ कर उनके मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे और पशु छोड़ने के लिए प्रस्तावित दंड दोगुना करेंगे लेकिन ऐसा कुछ न कर शहरवासियों को खुद-ब-खुद खुले में घूम रहे पशुओं से निपटने के लिए छोड़ दिया है।

मनपा स्वयंभू कोई सकारात्मक कार्य शायद ही करती है। जब कोई अनहोनी घट जाती है तब इतनी फुर्ती से सक्रियता दिखाती है, मानो इन्हें जरा सा भी आभास होता तो अनहोनी होने से रोक लेते।

वर्षा ऋतू की शुरुआत होते ही हर वर्ष सड़कों, खुले मैदानों, खुले आवासीय परिसरों आदि में अनगिनत गाय, बैल, सुअर, भैंस आदि ऐसे विचरण करने लगते है जैसे चारागाह में हो। जब इस मसले के तह में गए तो पता चला कि उक्त पशुओं के मालिक जानबूझकर पशुओं को खुला छोड़ देते है ताकि वह पशु चर कर खुद का पेट भर ले और देर सबेर अपने खूंटे पर आ जाये। इससे उन मालिकों को पशुओं के लिए चारा खरीदने का खर्च बच जाता है।

अब ये पशु सड़कों, खुले मैदानों, खुले आवासीय परिसरों में ऐसे डेरा डाल देते है कि सड़क पर आवाजाही प्रभावित, सड़क दुर्घटना में इजाफा हो रहा है। तो खुले आवासीय परिसर व मैदान में आवाजाही व खेलने के लिए जाने वाले बच्चो में डर समा गया है। साथ ही यह पशु मल आदि से परिसरों को गंदाकर स्वास्थ्य संबंधी दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर रहे है।

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वर्तमान में सम्पूर्ण शहर के सड़कों, खुले मैदानों, खुले आवासीय परिसरों में हजारों की संख्या में गाय, बैल, सुअर, भैंस आदि रोजाना कभी भी विचरण करते देखा जा सकता है। क्या क्या “स्मार्ट सिटी” के नियोजन का अभिन्न हिस्सा है। अगर हाँ तो फिर निश्चित ही नागपुर शहर को स्मार्ट बनाने के लिए मनपा प्रशासन सह सत्तापक्ष की पीठ केंद्र सरकार थपथपाएंगी?

उल्लेखनीय यह है कि शहर में पशुओं के सहारे अपने व अपने परिजन की आर्थिक स्थिति सुधारने वालों की तगड़ी एकता तब देखने को मिलती है, जब उक्त आवारा पशुओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की पहल करता है, फिर मनपा में कर्मी या नगरसेवक क्यों न हो। इस समय पक्षपात न कर एकता साथ विरोध करने वाला व्यक्ति विशेष या मनपा प्रशासन का नुमाइंदा के साथ ऐसा बर्ताव करते है जैसे उसने कोई अपराध किया हो।

लेकिन इसके बावजूद मनपा प्रशासन कभी शहर को आवारा जानवरों से मुक्ति नहीं दिलवा पाई। वही जब भी जो भी सत्ताधारी रहा वह बोले कुछ और करते कुछ दिखे। वही जनता-जर्नादन हर वक़्त “खाकी व खादी” के झांसे में आकर हर वर्ष नागरिक नुकसान सहते रहे। फिर चाहे सड़क दुर्घटना हो या फिर इन आवारा पशुओं की वजह से फैली गंदगी से बीमारी से सामना करना पड़े।

इस वर्ष भी बड़े जोर-शोर से स्थाई समिति अध्यक्ष बंडू राऊत ने मनपा के सम्बंधित वेटिनरी विभाग को चंद दिनों में सिर्फ शहर के सभी सड़क आवारा पशुओं से मुक्त करने का निर्देश सह उनके मालिकों के खिलाफ पुलिसिया कार्रवाई करने का निर्देश दिया। लेकिन सत्तापक्ष के नगरसेवक सह अन्य पक्षो के नगरसेवक सह मनपा कर्मी आदि ने बंडू राऊत के निर्देशों को दरकिनार कर सिर्फ पकड़े गए पशुओं को बिना जुर्माना लिए छोड़ने का आजतक निर्देश देते रहे है। पकडे गए जानवरों को छुड़ाने व उनके मालिकों पर कार्रवाई का सख्त नियम-कानून नहीं होने पर कार्रवाई में दम नहीं रहने से समस्या जस-के-तस बनी हुई है। वही मनपा के सम्बंधित विभाग के कर्मियों को अधिकार सिमित और आवारा पशु पकड़ते वक़्त “खाकी व खादी” अक्सर आने से वे भी निशब्द है। तो दूसरी ओर मनपा का राजस्व खाली गाड़ी दौड़ाने में बेफजूल खर्च हो रहा है।

उक्त समस्या से पूर्णतः निजात पाने के लिए नियम सख्त व जुर्माना १० गुना करने से मिलेगी शहरवासियों को आवारा पशुओं से होने वाली दिक्कत से निजात। इसके साथ ही आवारा पशुओं से होने वाली दिक्कतें, बीमारियों से निजात दिलवाने में आड़े आने वाले कर्मी को निलंबित व नगरसेवकों की सदस्यता समाप्त करने जैसा नियम बनाना समय की मांग है, तभी पशु पालन व्यवसायियों के गैर कृत पर अंकुश लगेगा। अभियान में इसके लिए मनपा प्रशासन को राज्य सरकार की मदद से जनहित में कठोर बनाने की पहल करना अंतिम पर्याय नजर आ रहा है।

– राजीव रंजन कुशवाहा

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