Published On : Thu, Aug 20th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

केतन ठाकरे की आपत्ति पर नागपुर मनपा में मराठी-हिंदी विवाद, आधे घंटे तक हंगामा

हिंदी में जवाब देने पर केतन ठाकरे ने उठाया सवाल, भाजपा-विपक्ष आमने-सामने; महापौर ने सभा 10 मिनट के लिए की स्थगित
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केतन ठाकरे की आपत्ति पर नागपुर मनपा में मराठी-हिंदी विवाद, आधे घंटे तक हंगामानागपुर: नागपुर महानगरपालिका की सामान्य सभा में गुरुवार को भाषा को लेकर जमकर हंगामा हुआ। विवाद की शुरुआत तब हुई जब कांग्रेस के स्वीकृत सदस्य केतन ठाकरे ने शिक्षा समिति की सभापति द्वारा हिंदी में दिए गए जवाब पर सवाल उठाते हुए कहा कि महाराष्ट्र की उपराजधानी की मनपा सभा का कामकाज मराठी में होना चाहिए।

इसके बाद मराठी और हिंदी में सदन की कार्यवाही चलाने को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। करीब आधे घंटे तक चले हंगामे के बीच महापौर नीता ठाकरे ने कई बार सदस्यों को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन स्थिति नहीं संभली। आखिरकार उन्होंने सभा को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया और अपने कक्ष में चली गईं।

शिक्षा विभाग के कार्यक्रम पर पूछा था सवाल

नगरसेवक एडवोकेट शैलेंद्र डोरले ने 18 जुलाई 2026 को मनपा के शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित ‘आनंददायी शनिवार’ कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों की वारकरी दिंडी को लेकर सवाल पूछा था। उन्होंने जानना चाहा कि यह आयोजन किस नियम या आदेश के तहत किया गया।

प्रशासन की ओर से जवाब दिए जाने के दौरान शिक्षा समिति की सभापति संतोषी नड्डा ने ‘राइट टू इंफॉर्मेशन’ का हवाला देते हुए करीब 10 से 15 मिनट तक हिंदी में विस्तृत जवाब दिया।

केतन ठाकरे ने पूछा—सदन की भाषा क्या है?

नड्डा के हिंदी में जवाब देने पर केतन ठाकरे ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा समिति की सभापति को इस विषय का स्पष्टीकरण मराठी में देना चाहिए था।

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केतन ठाकरे ने यह भी सवाल उठाया कि मनपा सदन की कार्यवाही किस भाषा में चलाने का नियम है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की उपराजधानी नागपुर की मनपा सभा का कामकाज मराठी में चलना चाहिए।

हालांकि, महापौर ने केतन ठाकरे की आपत्ति पर चर्चा आगे बढ़ाने के बजाय अगला सवाल पुकार दिया।

विपक्ष ने भी उठाया भाषा का मुद्दा

विपक्ष के नेता संजय महाकालकर ने इस मुद्दे को आगे बढ़ाते हुए प्रशासन से भाषा संबंधी नियम स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि जिन सदस्यों को मराठी नहीं आती, क्या उन्हें दूसरी भाषा में बोलने की अनुमति है और सभा की नियमावली इस संबंध में क्या कहती है।

भाजपा नगरसेविका एवं समिति सभापति अश्विनी जिचकार ने हिंदी को लेकर अपनी बात रखी। वहीं भाजपा के वरिष्ठ नेता बंटी कुकड़े ने कहा कि हिंदी राष्ट्रभाषा है और मराठी मातृभाषा। उन्होंने दोनों भाषाओं पर गर्व करने की बात कही, लेकिन सदन में अंग्रेजी के इस्तेमाल का विरोध किया।

आयुक्त ने नियम 1(ई) का दिया हवाला

महापौर के निर्देश पर मनपा आयुक्त डॉ. विपीन इटनकर ने नियम 1(ई) का हवाला देते हुए बताया कि सदन का कामकाज मराठी में होना चाहिए।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पीठासीन अधिकारी को उचित लगे तो किसी सदस्य को हिंदी या अंग्रेजी में बोलने की अनुमति दी जा सकती है।

वसीम खान ने मांगी हिंदी में बोलने की अनुमति

इसके बाद कांग्रेस नगरसेवक वसीम खान ने केंद्र सरकार प्रायोजित राष्ट्रीय वनश्री योजना से संबंधित सवाल उठाया। उन्होंने अपना विषय हिंदी में रखने की अनुमति महापौर से मांगी।

इसके बाद सत्ता पक्ष के नगरसेवकों ने इसका विरोध किया और सदन में एक बार फिर मराठी-हिंदी भाषा को लेकर जोरदार बहस शुरू हो गई।

करीब आधे घंटे तक दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और नारेबाजी चलती रही। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि सदस्य अपनी सीटों पर बैठने को तैयार नहीं थे और लगातार बढ़ते शोर में किसी की बात स्पष्ट रूप से सुनाई नहीं दे रही थी।

महापौर की अपील भी बेअसर

महापौर नीता ठाकरे ने कई बार सदन को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन विपक्ष के साथ सत्ता पक्ष के पदाधिकारी और नगरसेवक भी उनकी अपील को नजरअंदाज करते रहे।

आखिरकार महापौर अपनी सीट से उठीं और सभा को 10 मिनट के लिए स्थगित करने की घोषणा करते हुए अपने कक्ष में चली गईं।

बाद में सत्ता पक्ष के वरिष्ठ नेताओं ने अपने नगरसेवकों, विशेषकर नगरसेविकाओं को शांत कराया और विपक्षी सदस्यों से हाथ मिलाकर तनाव कम करने का प्रयास किया।

केतन ठाकरे की भाषा को लेकर उठाई गई आपत्ति से शुरू हुआ विवाद आखिरकार पूरे मनपा सदन में मराठी-हिंदी बहस में बदल गया और करीब आधे घंटे तक चले हंगामे ने सभा का माहौल पूरी तरह गरमा दिया।

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