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Published On : Tue, Mar 13th, 2018

नागपुर के सदर स्थित सिज़िंग रेस्टोरेंट में कभी भी हो सकता है मुंबई की तरह अग्निकांड

Shijims
नागपुर: नागपुर में ऐसे कई रेस्टोरेंट है जो नियमो को ताक पर रखकर शुरू है। ऐसे रेस्टोरेंट में मुंबई के कमला मील कम्पांउड की तरह कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है बावजूद इसके प्रशासन आंख मूंदे बैठा है। आरटीआई से मिले दस्तावेज के आधार पर सदर के मांउट रोड स्थित सिज़िंग रेस्टोरेंट में नियमो की उड़ रही धज्जियो का खुलासा होने पर भी अब तक किसी भी तरह की कार्रवाई होती नहीं दिख रही है। आरटीआई कार्यकर्त्ता टी एच नायडू द्वारा आरटीआई के माध्यम से निकाले गए दस्तावेज़ में जानकारी सामने आयी की रितेश सावलानी नामक व्यक्ति के इस होटल के पास मनपा के अग्निशमन विभाग की एनओसी ही नहीं है। इस जानकारी के आधार पर नायडू ने 16 नवंबर 2017 को मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर इस बाबत जानकारी दी और किसी बड़े हादसे से पहले रेस्टोरेंट पर कार्रवाई की माँग की। नायडू द्वारा लिखे गए पत्र को मनपा आयुक्त के कार्यालय ने स्वीकार भी किया। लेकिन मामला धरा का धरा ही रह गया।

गौरतलब हो की 9 नवंबर 2012 के मनपा विभाग के अंतर्गत आने वाले नगर रचना विभाग के सर्कुलर में स्पस्ट है की बिना मनपा के अग्निशमन विभाग की एनओसी के बार या रेस्टोरेंट शुरू ही नहीं उसका निर्माण कार्य भी नहीं किया जा सकता। भारी दबाव के चलते मनपा के अग्निशमन विभाग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 17 फ़रवरी 2018 को महाराष्ट्र अग्नि प्रतिबंधक एवं जीव संरक्षण अधिनियम के तहत सिज़िंग रेस्टोरेंट को आग लगने की स्थिति में अप्रिय घटना होने का संदेह जताते हुए रेटोरेन्ट की जगह खाली करने के निर्देश दिए थे। साथ ही मनपा के मंगलवारी जोन के सहायक आयुक्त को पत्र लिखकर रेस्टोरेंट का पानी-बिजली कनेक्शन कटाने को कहा था।

अब इसे लापरवाही कहे या जानबूझकर की जा रही गलती अब तक इस आदेश पर अमल नहीं हो पाया है। खुद सूचना प्राप्त होने के बावजूद मनपा आयुक्त ने इस पर कोई एक्शन नहीं लिया है। इसी बीच शहर में बिजली वितरण करने वाली कंपनी एसएनडीएल ने एक बार खुद से लापरवाही का मामला उजागर होने के बाद बिजली कनेक्शन कांटने का प्रयास किया। जिसे लेकर रेस्टोरेंट मालिक के साथ कंपनी के कर्मचारियों का विरोध हुआ। कंपनी अपनी कार्रवाई अब भी करना चाहती है लेकिन उसने पुलिस प्रोटेक्शन की माँग की है।

वही इस मामले को सामने आने वाले आरटीआई कार्यकर्त्ता टी एच नायडू इस मामले में सीधे भ्रस्टाचार का आरोप लगते हुए जाँच की माँग कर रहे है।

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