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    Published On : Mon, Jun 8th, 2020

    प्रॉपर्टी की फर्जी मांग वाली खबर से बिल्डर्स, ग्राहक हो रहे गुमराह

    नागपुर: नागपुर में जारी लॉकडाउन से पूर्व मंदी के चलते पहले ही सारे व्यापार, खासतौर पर रियल एस्टेट बाजार बुरी तरह प्रभावित थे, और अब ताजा स्थिति ने रियल एस्टेट की स्थिति बद से बदतर कर दी है। जहां प्रॉपर्टी मार्केट ग्राहकों को आकर्षित करने में नाकाम साबित हो रहा है, वहीं एक स्थानीय खबर में नागपुर के प्रॉपर्टी मार्केट की फर्जी तस्वीर पेश करके ग्राहकों के साथ-साथ बिल्डरों को भी गुमराह करने का प्रयास किया गया है। जहां इस समय सारे ग्राहक और निवेशक अपनी सीमित आर्थिक क्षमता के साथ संघर्ष कर रहे हैं, वहीं कुछ बिल्डर्स भी पत्रकारों के ऐसे सब्जबाग का शिकार हो रहे हैं। वास्तविकता तो यह है कि ऐसे पत्रकार, बिल्डरों का भला करने के बजाय खुद अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने में जुटे हुए हैं।

    कृत्रिम मांग का खेल

    हाल ही में एक स्थानीय अखबार में प्रकाशित खबर में नागपुर के प्रॉपर्टी बाजार की एक खुशहाल तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई है, जिसमें निकट भविष्य में घरों की मांग बढ़ने का आधारहीन दावा किया गया है। जैसे ही यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई नागपुर के प्रॉपर्टी बाजार से जुड़े बहुत से प्लॉट विक्रेता, रियल एस्टेट कंपनियां और ब्रोकर इस न्यूज़ क्लिप को लेकर सक्रिय हो गए हैं। इस व्यवसाय से जुड़े कई लोगों ने अपने विज्ञापनों के साथ यह झूठी खबर सोशल मीडिया पर पोस्ट भी कर दी। हालांकि जब नागपुर टुडे ने गहराई से मामले की पड़ताल की तो इस खबर की प्रामाणिकता खुद-ब-खुद उजागर हो गई। सच्चाई तो यह है कि यह खबर पूरी तरह तथ्यहीन है और यह महज एक अतिउत्साही पत्रकार की कल्पना की उड़ान साबित हुई।
     

    खोखले दावों से बचें ग्राहक और बिल्डर

    जहां कोरोनावायरस के संक्रमण के बीच अब नागपुर शहर के बाजार धीरे-धीरे खुल रहे हैं, वहीं होम लोन के रिएसेसमेंट, वेतन में कटौती और नौकरी गंवाने के चलते अधिकांश ग्राहक प्रॉपर्टी के बाजार में निवेश करने से कतरा रहे हैं। बिल्डर्स भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आखिर प्रॉपर्टी के प्रति ग्राहकों का विश्वास दोबारा कैसे जगाया जाए। बिल्डरों की इसी कश्मकश का नाजायज़ फायदा उठाते हुए कुछ पत्रकार अपनी मार्केटिंग टीम के सहारे समस्त बिल्डर समुदाय की इस दुविधा को अपने व्यापार में तब्दील करने में जुटे हुए हैं। ऐसे तत्व बिल्डरों को एक सुनहरे कल का सपना दिखाकर विज्ञापनों की चांदी काटने और खुद अपनी जेबें भरने में जुटे हुए हैं। इसके चलते बिल्डर्स भी ऐसे दावे करने पर मजबूर हैं।

    बिक्री पर छाए काले बादल

    आज नागपुर शहर में प्रॉपर्टी बाजार के हालात किसी से भी छुपे नहीं है। बिल्डर्स और ग्राहक दोनों ही समान रूप से इस बात को मानेंगे कि लॉकडाउन से पहले ही प्रॉपर्टी बाजार बेहद तंग दौर से गुजर रहा था। पिछले कुछ बिक्री सीजनों में भी घर खरीदने वालों और निवेशकों ने भी इसमें कुछ खास रुचि नहीं दिखाई। गत वर्ष दिवाली और इस साल गुड़ी पाडवा समेत अन्य दूसरे त्योहार भी फीके रहे। ऐसे में कुछ फर्जी तत्व इस नाजुक स्थिति का फायदा उठा रहे हैं जो भ्रामक खबर फैलाकर निजी हित साधने में जुटे हुए हैं।

    मांग का वर्गीकरण जरूरी है

    नागपुर के प्रतिष्ठित संदीप ड्वेलर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर गौरव अगरवाला हालांकि प्रॉपर्टी की मांग को एक अलग नजरिए से देखते हैं। शहर में कुछ बड़े रेसिडेंशियल एवं कमर्शियल प्रोजेक्ट्स चला रहे अगरवाला ने नागपुर टुडे को बताया, “नागपुर के रियल स्टेट बाजार को तीन भागों में बांटकर इसका सही विश्लेषण किया जाना जरूरी है। यह तीन हिस्से हैं – अफोर्डेबल, मध्यम रेंज और लग्जरी। यदि आप लग्जरी अपार्टमेंट्स की बात करेंगे, तो हां इसकी मांग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है लेकिन अफोर्डेबल सेगमेंट में ग्राहकों की मांग तेजी से बढ़ी है, जो अपने बजट में एक अच्छी क्वालिटी का अपार्टमेंट ढूंढ रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान भी हमें इस श्रेणी के अपार्टमेंट्स की बहुत-सी इंक्वायरी प्राप्त हुई हैं। दूसरी ओर, मेरे खुद के कुछ लग्जरी प्रोजेक्ट्स पर मंदी के बादल मंडरा रहे हैं लेकिन हमें अफोर्डेबल और मिडसेगमेंट प्रोजेक्ट में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। इस श्रेणी में 2.33 लाख से 2.67 लाख रुपए तक की सरकारी सब्सिडी भी बिक्री बढ़ाने में मदद कर रही है। ऐसे में असली खरीददारों की ओर से मांग बढ़ी है लेकिन लग्जरी सेगमेंट के ग्राहक, जिनमें अधिकांश अपने घर अपग्रेड करने की सोच रहे हैं, निश्चित तौर पर घटे हैं। लग्जरी सेगमेंट में ऊंची कीमतें मार्केट में रोड़ा बनी हुई हैं जबकि कम कीमत वाले घरों की मांग बरकरार है।”

    नागपुर टुडे का मंथन

    ऐसे कठिन वक्त में जहां नागपुर के विकास के लिए रियल स्टेट बाजार का आगे बढ़ना बहुत जरूरी है, वहीं बिल्डर्स को भी ऐसे तत्वों के गुमराह करने वाले सब्जबाग से बचकर रहना चाहिए, और वास्तविकता की जमीन पर रहकर अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए। तभी शायद ग्राहकों का विश्वास इसमें दोबारा लौट पाए। अखबारों में बड़े-बड़े विज्ञापनों से ही अगर बाजार फल फूल जाता तो आज ऐसे पत्रकारों को खुद को बेचने के लिए बाजार में नहीं बैठना पड़ता। प्रमोशन जरूरी है लेकिन ऐसे तथ्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए जो ग्राहकों को दिग्भ्रमित ना करें। बिल्डर समुदाय को चाहिए कि अखबार में महंगे विज्ञापन प्रकाशित करवाने से बेहतर है कि टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल करते हुए उचित दिशा में सही ग्राहकों तक पहुंच बनाई जाए। आज यह तथ्य भी किसी से नहीं छिपा है कि अखबार में महंगे-महंगे विज्ञापनों की चर्चा पूरे एक दिन भी नहीं हो पाती, और इसका नुकसान बिल्डर को उठाना पड़ता है।

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