Published On : Tue, Jan 27th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

सुरक्षा के नाम पर सरकार की ब्लैकमेलिंग? पूनम टॉवर मामले पर एन. कुमार का बड़ा बयान

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नागपुर: नागपुर के सबसे प्राइम और महंगे इलाकों में स्थित, लेकिन पिछले लगभग तीन दशकों से अधूरा पड़ा पूनम टॉवर अब गिराए जाने की कगार पर बताया जा रहा है। 1991 में शुरू हुए इस मल्टीस्टोरी प्रोजेक्ट को विधानसभा भवन की सुरक्षा का हवाला देकर उसी दौर में रोक दिया गया था।

लेकिन सवाल यह है कि जब आसपास इससे भी ऊंची इमारतें मौजूद हैं, तो सिर्फ पूनम टॉवर ही सुरक्षा के लिए खतरा कैसे बन गया?

इस बीच पूनम टॉवर के मालिक एन. कुमार ने ‘नागपुर टुडे’ से बातचीत में टॉवर तोड़े जाने की खबरों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा,
“इस इमारत से विधानसभा की सुरक्षा को कोई खतरा नहीं है। सरकार ने मुझ पर दबाव बनाने के लिए मेरे खिलाफ याचिका दायर की है। हैरानी की बात यह है कि इसी सरकार ने पहले यहां टॉवर बनाने की अनुमति दी थी।”

एन. कुमार ने आरोप लगाया कि उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा है और आर्थिक लाभ के लिए यह पूरा मामला खड़ा किया गया है।

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सुरक्षा का बहाना… या कोई और वजह?
पूनम टॉवर प्रोजेक्ट को शुरुआत में सभी जरूरी मंजूरियां मिली थीं। कुछ मंजिलें खड़ी होने के बाद अचानक सुरक्षा का मुद्दा उठाकर निर्माण पर रोक लगा दी गई। विधानसभा परिसर को संवेदनशील बताया गया, लेकिन बाद के वर्षों में इसी इलाके में कई ऊंची इमारतें बनीं — जिन पर कोई आपत्ति नहीं ली गई। ऐसे में नागपुरवासी पूछ रहे हैं: “आखिर सिर्फ पूनम टॉवर ही क्यों?”

तीन दशक का विवाद, डेवलपर को भारी नुकसान
करीब 30 सालों से यह प्रोजेक्ट अदालतों, सरकारी फाइलों और प्रशासनिक फैसलों में उलझा हुआ है। इससे डेवलपर को भारी आर्थिक नुकसान हुआ, वहीं शहर के बीचोंबीच की कीमती जमीन बेकार पड़ी रही। आज यह अधूरी इमारत सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि शहरी नियोजन की विफलता की भी मिसाल बन चुकी है।

अगर गिराया गया, तो आगे क्या?
अगर पूनम टॉवर को सच में ध्वस्त किया जाता है, तो उस जमीन का भविष्य भी बड़ा सवाल है:
क्या वहां सरकारी इमारत बनेगी?
या निजी विकास के लिए जगह खोली जाएगी?
और क्या सुरक्षा का मुद्दा वाकई सुलझ जाएगा, या सिर्फ इमारत हटाई जा रही है?

पर्दे के पीछे की भूमिका पर सवाल
प्रशासनिक अधिकारियों, टाउन प्लानिंग विशेषज्ञों और सुरक्षा विश्लेषकों से हुई चर्चाओं में कई विरोधाभास सामने आए हैं। समय के साथ सुरक्षा मानक बदले हैं, लेकिन फैसले अब भी पुरानी सोच में अटके दिखाई देते हैं।

पूनम टॉवर का अध्याय भले ही खत्म होने की ओर हो, लेकिन उस जमीन के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बरकरार है। अब देखना होगा कि नागपुर में यह भूखंड एक बार फिर सत्ता, सुरक्षा और शहरी विकास के टकराव का केंद्र बनता है — या किसी ठोस समाधान तक पहुंचता है।

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