Published On : Fri, Nov 12th, 2021

जिले में पुनः अवैध रेती उत्खनन उफान पर

– जिलाधिकारी- जिला खनन विभाग प्रमुख द्वारा तहसीलदारों के पत्रों को नहीं मिल रही तरजीह


नागपुर – अवैध रेती उत्खनन के लिए नागपुर जिला सम्पूर्ण देश में कुख्यात हैं,क्यूंकि इससे हो रही पर्यावरण नुकसान और राज्य का राजस्व नुकसान सर चढ़ के बोल रहा.फिर चाहे जिलाधिकारी कितने भी बदल दिए जाए लेकिन अवैध रेती उत्खनन सतत शुरू ही हैं.पिछले दिनों जिलाधिकारी- जिला खनन विभाग के निर्देश पर अवैध रेती उत्खनन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘डीलर परमिट’ दी गई,इसके आड़ में ‘परमिट’ के प्राप्तकर्ता नदी में मशीन उतारकर अवैध रेती उत्खनन को सफल अंजाम दे रहे.इस पर रोक लगाने के लिए सम्बंधित तहसीलदारों ने जिलाधिकारी- जिला खनन विभाग प्रमुख से सिफारिश कर ठोस सुझाव सह कार्रवाई के अधिकार की मांग की लेकिन उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगना समझ से परे हैं.

तहसीलदार द्वारा जिलाधिकारी- जिला खनन विभाग प्रमुख को लिखे गए पत्र के अनुसार रेत घाट संचालकों को घाट सह रेत स्टॉक पर CCTV कैमेरा लगाने हेतु अनिवार्य किया गया था,इसके साथ ही प्रत्येक 15 दिनों का फुटेज तहसीलदारों को पहुँचाने का भी कड़क निर्देश के बावजूद आजतक किसी भी रेत घाट संचालक ने CCTV न लगाया और नहीं लगाने के कारण फुटेज भी नहीं पहुँचाया।अर्थात CCTV न लगाने की वजह साफ़ साफ़ यह इंगित कर रही हैं कि घाटों पर रेती का अवैध उत्खनन और बिक्री आदि हो रहा हैं.जिसे जिलाधिकारी- जिला खनन विभाग प्रमुख नज़र अंदाज कर बढ़ावा दे रहे.तहसीलदारों ने उक्त निर्देशों का न पूर्ति करने वालों पर कड़क कार्रवाई की मांग तक की हैं.

उक्त मामले को लेकर जल्द ही ‘एमओडीआई फाउंडेशन’ जल्द ही न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर करने वाली हैं.


CM ने राजस्व विभाग से जवाब-तलब किया
मुख्यमंत्री को पत्र द्वारा जानकारी दी गई कि नागपुर जिले के अनेक रेत घाटों पर 16/9/21 को छापा मारा गया,इस सन्दर्भ में की गई कार्रवाई की जानकारी न देने पर 18/11/21 को आंदोलन करने की चेतावनी दी गई थी,जिसके जवाब में मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि उन्होंने उक्त मामले से सम्बंधित जानकारी राजस्व विभाग से जानकारी मांगी हैं.

याद रहे कि उक्त छापामार कार्रवाई में अवैध रेत उत्खनन और अवैध रेत के स्टॉक मिले थे साथ में घाटों पर रेत उत्खनन वाली मशीनें भी मिली थी,जिसका वीडियो रिकॉर्डिंग कर सील किया गया था,जिसके बाद जिला खनन विभाग द्वारा की गई कार्रवाई का लेखा-जोखा की मांग एक नहीं बल्कि 3-3 बार पत्र द्वारा की गई.इतना ही नहीं घाटों पर जमा अवैध रेत स्टॉक के लिए नई रॉयल्टी जारी कर जिला खनन विभाग ने अवैध रेत उत्खनन को बढ़ावा दे रही.

उक्त छापामार कार्रवाई बाद घाट संचालकों पर नियमानुसार की गई कार्रवाई और पत्रों का लिखित जवाब न देने पर अनशन की चेतावनी दी गई हैं.