संस्थान ने डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर कोर्ट का आदेश भी किया दरकिनार
नागपुर- Covid-19 की इस महामारी के दौरान और लॉकडाउन ने शैक्षणिक गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम लगा दी है. जिसके कारण छात्रों को ऑनलाइन क्लासेस से घर से ही जुड़ना पड़ रहा है. ऑनलाइन क्लासेस के कारण इन विद्यार्थियों को अनेकों परेशानियों से भी जूझना पड़ रहा है. निजी ट्यूशन ( Private Tuition ) क्लासेस की इस महामारी में भी फ़ीस वसूली के कारण विद्यार्थियों के अभिभावकों का जीना मुश्किल हो गया है. ऐसा ही एक मामला शहर के रामदासपेठ स्थित जेईई ( Jee-Mains ) कोचिंग इंस्टिट्यूट आईआईटी होम ( IIT-Home ) में सामने आया है. जहांपर विद्यार्थी के पिता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत की थी और पैसे भी जमा कराएं थे, इसके बावजूद भी आईआईटी होम ( IIT-Home ) की तरफ से छात्रा की क्लासेस नहीं शुरू की गई है.
छात्रा के पिता मिथिलेश चौधरी ने पत्र परिषद् में जानकारी देते हुए बताया कि उनकी बेटी ने आईआईटी होम ( IIT-Home ) में दो साल के कोर्स में प्रवेश के लिए एडमिशन किया था, लेकिन वो समय पर दूसरी इंस्टॉलमेंट नहीं भर पाए, जिसके कारण उनकी बेटी को रेगुलर ऑनलाइन क्लासेस से हटा दिया गया. जिसके बाद छात्रा के पिता ने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ( District Consumer Disputes Redressal Commission) में शिकायत दर्ज कराई थी. जिसके बाद आयोग ने छात्रा के पिता को आयोग में शुल्क राशि जमा करने के निर्देश दिए थे और आईआईटी होम ( IIT-Home ) को आदेश दिए थे की छात्रा की क्लासेस शुरू की जाए. बावजूद इसके आईआईटी होम ( IIT-Home ) के डायरेक्टर्स ( Directors ) ने नियमों की अवेलहना की.
आईआईटी होम ( IIT-Home ) कोचिंग ने छात्रा के पिता द्वारा आयोग के पास राशि जमा करने के बाद भी छात्रा को क्लासेस शुरू करने के उपभोक्ता आयोग के आदेश की अवेलहना की. इसके बाद पीड़ित लड़की के पिता ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 71 के तहत आयोग के सामने एक आवेदन दाखिल किया. हालांकि आईआईटी होम डायरेक्टर्स ने जमानत मांगी है और कहा है कि वे इस अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील करेंगे. इस स्थिति से छात्रा के भविष्य को नुक्सान हो रहा था, जबकि अभिभावक न्याय के लिए दौड़ भाग कर रहे है.
पीड़ित छात्रा के पिता मिथिलेश चौधरी ने इस मामले में एक प्रेस कांफ्रेंस भी बुलाई. ‘ नागपुर टुडे ‘ ( Nagpur Today) से बात करते हुए चौधरी ने बताया कि उनके जैसे कई अभिभावक है, जिन्हें फीस न चुकाने के कारण आईआईटी होम ( IIT-Home ) का खामियाजा भुगतना पड़ा. अपनी बेटी की ओर से दायर जिला उपभोक्ता निवारण आयोग को दी गई शिकायत में चौधरी ने आईआईटी होम ( IIT-Home ) में प्रबंध निदेशक ( Managing Director ) निशा कोठारी ( Nisha Kothari ) और निदेशक ( Director ) ललिता कोठारी पर आरोप लगाए हैं.
चौधरी ने बताया कि उनकी बेटी ने मई 2019 में जेईई – मेन / एडवांस ( Jee -Mains / Advance ) के दो साल के कोर्स के पहले वर्ष में एडमिशन लिया था. एडमिशन के समय 1.35 लाख रुपये के पहले वर्ष का फ़ीस का भुगतान उनकी ओर से किया गया था. प्रथम वर्ष का सिलेबस मई 2020 तक पूरा होने वाला था. लेकिन Covid-19, और लॉकडाउन के कारण, फिसिकल क्लासेस को मार्च 2020 से बंद कर दिया गया था. चौधरी ने बताया कि किसी तरह सिलेबस को जून 2020 में रिकॉर्ड किए गए ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पूरा किया जाना था, जब संस्थान ने उनकी बेटी को दूसरे वर्ष में एडमिशन के लिए 1.70 लाख रुपये का भुगतान करने को कहा.
चौधरी ने कहा कि उनकी कमाई लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुई थी और साथ ही बच्ची की कोई क्लासेस भी नहीं थी, तो उन्होंने आईआईटी-होम ( IIT-Home ) के प्रबंधन ( Management ) से फ़ीस की राशि का 50% माफ करने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया. उन्होंने अपनी बेटी के लिए ऑनलाइन कक्षाएं भी बंद कर दीं. उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान ने अपने शिक्षण कर्मचारियों को भी लगभग आधा कर दिया और उनके वेतन में भी कटौती कर दी, जिसके कारण कुछ अच्छे शिक्षण कर्मचारियों ने भी संस्थान छोड़ दिया. इस साल 31 जुलाई को, चौधरी ने आयोग के पास एक शिकायत दर्ज की, जिसमें उन्हें कमीशन में 1.70 लाख रुपये जमा करने का निर्देश दिया और संस्थान को राशि जमा होने के बाद कक्षाएं शुरू करने का आदेश दिया. हालांकि, राशि जमा करने के बावजूद संस्थान ने छात्रा के साथ कोई भी बात नहीं की. जब चौधरी ने फिर से आयोग में आवेदन दायर किया, तो उसने आईआईटी होम ( IIT-Home ) के दो निदेशकों ( Directors ) के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से पेश होने और जमानत लेने के लिए समन जारी किया.
24 अगस्त, 2020 को आईआईटी होम ( IIT-Home ) के निदेशकों ( Directors ) ने जमानत ली और आयोग को सूचित किया कि वे अंतरिम आदेश के खिलाफ अपील करेंगे. चौधरी ने आरोप लगाया है कि यह सभी अभिभावकों के लिए चिंता का विषय था कि, कैसे ये कोचिंग संस्थान मासूम अभिभावको का पैसा लूट रहे हैं. बाद में उन्होंने अपनी बेटी को किसी अन्य ऑनलाइन संस्थान में दाखिला दिलाया, जिसने उन्हें उनके शुल्क पर 75% की छूट दी.
इस बीच, चौधरी ने बताया कि उन्होंने कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की साइट के माध्यम से आईआईटी होम इंस्टीट्यूट ( IIT-Home ) की बैलेंस शीट और पीएंडएल स्टेटमेंट की एक प्रति खरीदी थी. दस्तावेजों से पता चलता है कि हर साल उनका कुल राजस्व लगभग 19 करोड़ रुपये है.
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