Published On : Fri, May 18th, 2018

कर्मचारी निलंबन मामले पर जिला परिषद सीओ पर भड़की अध्यक्षा

Nagpur Zila Parishad, Nagpur ZP

नागपुर: जिला परिषद के 22 कर्मचारियों के बैंकॉक घूमने का मामला अब तक शांत नहीं हुआ है। आंतरिक जाँच कमिटी की रिपोर्ट में सर्विस रुल को तोड़ने के आरोप सिद्ध होने के बाद 10 कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिरी है। लेकिन जिला परिषद अध्यक्षा निशा सावरकर ने प्रशासन द्वारा की गई इस कार्रवाई पर नाराजगी व्यक्त की है।

शुक्रवार को जिला परिषद की आम सभा में कर्मचारियों के निलंबन के मामले में जिला परिषद अध्यक्षा मुख्य कार्यकारी अधिकारी कादंबनी बलकवडे पर भड़क गई। कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए अध्यक्षा ने कहाँ की जब 22 लोग गए थे तो 10 पर ही कार्रवाई क्यूँ की गई जबकि इजाज़त किसी ने भी नहीं ली थी। इस सवाल का ज़वाब देते हुए सीओ ने बताया की कार्रवाई जाँच रिपोर्ट के आधार पर की गई है बावजूद इसके आप ने संदेह व्यक्त किया है तो अन्य 12 कर्मचारियों की भी जाँच की जाएगी। जाँच के बाद अगर वो भी दोषी पाए जाते है तो निश्चित कार्रवाई की जाएगी।

अध्यक्षा का कहना था की विदेश के लौटने के बाद जब कर्मचारियों को इस बात का संदेह हुआ की मामले की जाँच हो सकती है तब उनके द्वारा छुट्टी का आवेदन दिया गया। आवेदन की बैकडेट कॉपी को फ़ाइल में लगाया गया। और कार्रवाई भी सिर्फ एक विभाग के ही कर्मचारियों पर की गई ये सभी निर्माण विभाग के है।

निलंबन मंजूर किए गए कर्मचारियों की निर्माणकार्य विभाग से जिप अध्यक्ष को मिली सूची में मुख्य आरेखक विलास बारापात्रे,कनिष्ठ प्रशासकीय अधिकारी मधुकर पाटील, परिचारक शैलेश ढोकणे, खालिक दूधगोरे, वरिष्ठ यांत्रिकी अनिल आकरे, जोडारी संजय मलके,कनिष्ठ अभियंता यांत्रिकी विलास लाड़े, पंचायत समिति सावनेर में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता डी. डी. बिहारे, पंचायत समिति मौदा में कार्यरत कनिष्ठ अभियंता प्रकाश अंतुरकरवरा मटेक उपविभाग में कनिष्ठ अभियंता एन. के. कुंभलवार का समावेश है।

पानी की समस्या पर पक्ष-विपक्ष ने मिलकर प्रशासन को घेरा
जिला परिषद की आम सभा में जलापूर्ति और जलसंकट का मुद्दा भी खूब उछला। मुद्दे पर पक्ष-विपक्ष दोनों साथ आ गया और जिले में मौजूद इस समस्या के लिए प्रशासन के ढुलमुल रवैय्ये को जिम्मेदार ठहराया गया। सदस्यों का कहना था की 7 जून तक जलापूर्ति से जुड़े कामों को निपटना है समय कम है बावजूद काम में कोई तेजी नहीं। अब तक महज योजना का 50 फ़ीसदी ही काम हो सका है ऐसे में सवाल उठता है की बचा काम इतने काम समय में कैसे पूरा हो पायेगा। काम नहीं होने के चलते जिले में जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।