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    Published On : Sun, Apr 21st, 2019

    ‘ मै इसलिए आया हू की तुम्हें जीवन मिले ‘ प्रभु का संदेश- आर्कबिशप एलिअस गोंसाल्वेस

    नागपुर: ईस्टर त्यौहार के अवसर पर नागपुर के आर्कबिशप एलिअस गोंसाल्वेस ने प्रभु का एक सन्देश दिया है. उन्होंने कहा कि वेटिकन महासभा द्वितीय ने कलीसिया को यात्री कलीसिया परिभाषित किया है. ईस्टर का महा मुख्य पर्व भी एक यात्रा है- अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, और गुलामी से स्वतंत्रता की ओर.

    उपर्युक्त तथ्य यहूदियों के पास्का पर्व में समाहित है- जो अज्ञात देश से प्रज्ञात देश की ओर की यात्रा का पर्व है. ” पास्का ” इब्रानी शब्द ‘ पेशाक ‘ से निकला है. जिसका अर्थ है ‘ पार करना ‘ प्रभु येशु की मृत्य और पुनरुत्थान से इसके अर्थ को गहरी छाप दी गई है. अब यह एक ऐसा पास्का है जो पापमय जीवन को पार कर हमें नव जीवन की ओर अग्रसर होने तथा निराशावादी न होते हुए आशावादी होने के लिए प्रेरित करता है.

    उन्होंने कहा कि कि इस चालीसा काल के दौरान हम भी यहूदियों की तरह मरुभूमि में थे.परन्तु अंतरात्मा की मरुभूमि में. बाईबल में मरुभूमि या निर्जन प्रदेश न केवल एक जगह है वरण एक स्थिति है. जहां हम ईश्वर से बातचीत करते है और ईश्वर तथा पडोसी प्रेम में मजबूत होते है. प्रभु ने भी अपने सेवा कार्य पूर्व यही किया. संस्कृत में बड़ी ही सरलता से योग भाषा में उल्लेख है ‘ लोक समस्त सुखिनो भवन्तु ‘ अर्थात सभी को पूर्णता हासिल हो.

    सारे लोग सुखी हो. सबके मंगल की शुरुवात नई पीढ़ी से होनी चाहिए. इसलिए पोप स्वामी ने अपने नवनीतम संलेख ‘ क्रिस्तुस विवैत ‘ क्राइस्ट इस अलाइव ‘ में युवाओ से आग्रह किया है. ‘ मेरे नवजवान साथियों मेरी आशा है कि आप अपनी दौड़ दौड़िए . पवित्र आत्मा इस दौड़ में आपकी सहायक हो. कलीसिया को आपकी, आपकी गति, प्रज्ञा तथा विश्वास की जरुरत है.

    बिशप ने आगे बताया कि जब जब हम निराशा से आशा की ओर अग्रसर होते है. हम पुनरुत्थान के गहरे अर्थ को समझते है. आईये इस ईस्टर अपनी कलीसिया -विशेषकर लघु कलीसिया हमारे परिवारों में आशा का बीज बोए और संत योहन के सुसमाचार में कथित प्रभु के कथन को सार्थक करे कि ‘ मै इसलिए आया हू की तुम्हें जीवन मिले .

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