नागपुर: देश में पेट्रोल के साथ एथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की नीति के बीच बिहार में Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL) की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी HPCL Biofuels Limited (HBL) के दो पुराने एथेनॉल प्लांटों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। नागपुर के RTI एक्टिविस्ट संजय अग्रवाल द्वारा मांगी गई जानकारी के जवाब में HPCL Biofuels ने बिहार के सुगौली और लौरिया स्थित प्लांटों की क्षमता, फीडस्टॉक और commissioning से जुड़ी जानकारी दी है।
दोनों प्लांट दिसंबर 2011 में commissioned हुए थे और प्रत्येक में 60 KLPD की distillery capacity, 3,500 TCD sugarcane crushing capacity और 20 MW cogeneration capacity है। इस तरह दोनों प्लांटों की कुल स्थापित एथेनॉल क्षमता 120 KLPD है।
बंद पड़ी चीनी मिलों से शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
HPCL ने बिहार सरकार की बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया के तहत सुगौली और लौरिया की मिलों का अधिग्रहण किया था। कंपनी के अनुसार HPCL Biofuels Limited को अक्टूबर 2009 में स्थापित किया गया था ताकि दोनों स्थानों पर integrated Sugar-Ethanol-Co-generation plants विकसित किए जा सकें।
HPCL के मुताबिक पुराने और जर्जर उपकरणों को हटाकर दोनों जगह आधुनिक संयंत्र स्थापित किए गए और दिसंबर 2011 में दोनों प्लांट चालू हुए। कंपनी इन्हें देश के Ethanol Blending Programme में अपनी backward-integration strategy का हिस्सा बताती है।
727.88 करोड़ रुपये के शुरुआती प्रोजेक्ट की जानकारी
HPCL Biofuels की शुरुआती Annual Report के अनुसार दोनों integrated projects की कुल project cost ₹727.88 करोड़ बताई गई थी। FY2011-12 में दोनों प्लांटों ने commercial operations शुरू किए और उस शुरुआती crushing season में कंपनी ने करीब 4,700 KL एथेनॉल का उत्पादन दर्ज किया था।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह पता चलता है कि कंपनी का ethanol production business इन प्लांटों के commissioning के समय से ही उसके integrated sugar operations का हिस्सा था।
सुगौली और लौरिया में क्या है क्षमता?
HPCL Biofuels के अनुसार दोनों प्लांट लगभग समान configuration पर आधारित हैं।
सुगौली:
- Sugarcane crushing: 3,500 TCD
- Distillery: 60 KLPD
- Cogeneration: 20 MW
लौरिया:
- Sugarcane crushing: 3,500 TCD
- Distillery: 60 KLPD
- Cogeneration: 20 MW
दोनों मिलाकर installed distillery capacity 120 KLPD है।
मोलासेस ही नहीं, गन्ने के रस का भी इस्तेमाल संभव
RTI के जवाब में HPCL Biofuels ने दोनों प्लांटों में ethanol production के लिए molasses को feedstock बताया है।
हालांकि कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार दोनों distilleries को molasses के साथ sugarcane juice को भी raw material के रूप में इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया है। कंपनी का ethanol plant fuel-grade ethanol तैयार करता है, जिसे petrol blending के लिए Oil Marketing Companies को बेचा जाता है।
कंपनी के अनुसार उत्पादन के दौरान spent wash को कम करने, biogas generation और bio-composting जैसी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल भी किया जाता है तथा कंपनी zero-effluent-discharge मॉडल का दावा करती है।
RTI में वर्षवार उत्पादन क्यों महत्वपूर्ण है?
संजय अग्रवाल की RTI में दोनों प्लांटों के commissioning के बाद से year-wise ethanol production की जानकारी मांगी गई थी। लेकिन HPCL Biofuels ने RTI जवाब में सीधे पूरा वर्षवार आंकड़ा देने के बजाय संबंधित Annual Reports देखने को कहा।
कंपनी की Annual Reports से हालांकि कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आते हैं।
FY2024-25 में दोनों प्लांटों ने मिलकर 11,153 KL ethanol का उत्पादन किया। इसमें सुगौली से 6,114 KL और लौरिया से 5,039 KL उत्पादन शामिल था। उसी वर्ष दोनों प्लांटों ने क्रमशः 114 और 111 दिनों के आसपास operation किया।
FY2023-24 में दोनों प्लांटों का कुल ethanol production 16,471 KL था—सुगौली से 6,114 KL और लौरिया से 5,039 KL। Annual Report में इसी अवधि के लिए दोनों प्लांटों के cane crushing और sugar production के आंकड़े भी दर्ज हैं।
यहीं से इस पूरी RTI कहानी का महत्वपूर्ण सवाल सामने आता है: 120 KLPD की combined installed capacity के मुकाबले वास्तविक annual production कितना है और capacity utilisation में साल-दर-साल कितना बदलाव आया?
हालांकि सीधे daily capacity को annual production से तुलना करना उचित नहीं होगा, क्योंकि ये sugarcane-based integrated plants हैं और crushing season तथा operating days उत्पादन को प्रभावित करते हैं।
FY2025-26 में भी ethanol business जारी
HPCL की हालिया subsidiary disclosure के अनुसार FY2025-26 में HPCL Biofuels ने 6,257 KL B-heavy ethanol की बिक्री दर्ज की। इसी अवधि में कंपनी ने 38,191 MWh co-generated power भी export की। HPCL ने यह भी बताया है कि grain-based feedstock को support करने के लिए distillery expansion का काम चल रहा है।
इससे संकेत मिलता है कि करीब डेढ़ दशक पुराने इन प्लांटों में कंपनी अब feedstock diversification और distillery expansion के जरिए ethanol business को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
सिर्फ एथेनॉल नहीं, चीनी और बिजली भी कारोबार का हिस्सा
HPCL Biofuels के दोनों प्लांट integrated facilities हैं। यानी इनका business model केवल ethanol production पर निर्भर नहीं है।
Sugarcane से चीनी उत्पादन, ethanol manufacturing और cogeneration के जरिए बिजली उत्पादन—तीनों activities एक ही integrated setup का हिस्सा हैं।
FY2024-25 में दोनों प्लांटों ने मिलाकर 7.35 लाख टन से अधिक गन्ने की crushing, करीब 65,470 टन चीनी उत्पादन और 56,483 MWh power generation दर्ज किया। इसमें से 27,158 MWh power export की गई।
यह पहलू महत्वपूर्ण है क्योंकि ethanol production को केवल distillery capacity के आधार पर देखना इन plants के पूरे business model की तस्वीर नहीं देता।
शुरुआती मॉडल से अब grain-based expansion तक
जब HPCL ने इन दोनों प्लांटों की शुरुआत की थी, तब उद्देश्य ethanol production को sugar operations के साथ integrate करना और HPCL की petrol-blending requirements के लिए backward integration तैयार करना था। कंपनी की वर्तमान जानकारी बताती है कि अब वह grain-based feedstock के लिए distillery expansion पर भी काम कर रही है।
यानी 2009 में शुरू हुई योजना, 2011 में commissioned plants और अब grain-based expansion—HPCL Biofuels का ethanol business पिछले डेढ़ दशक में एक नए चरण में पहुंच चुका है।
देश की ethanol policy से क्यों जुड़ा है यह मामला?
भारत सरकार ने ethanol blending programme के तहत domestic ethanol production बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें alternate feedstocks को अनुमति देना, ethanol pricing mechanism में बदलाव और production capacity बढ़ाने के लिए financial assistance जैसी पहल शामिल हैं। सरकार ने लंबे समय से petrol में ethanol blending को बढ़ाने का लक्ष्य रखा है।
ऐसे में पुराने integrated plants की installed capacity और actual production के बीच का अंतर केवल किसी एक कंपनी का operational issue नहीं है। यह इस बड़े सवाल से भी जुड़ा है कि देश में बनाई गई ethanol capacity का कितना हिस्सा वास्तव में इस्तेमाल हो रहा है।
अब अगली RTI से क्या सामने आ सकता है?
HPCL Biofuels के मौजूदा जवाब और Annual Reports को साथ देखने पर तीन स्तरों पर आगे जांच की गुंजाइश बनती है—
पहला, 2011-12 से 2025-26 तक सुगौली और लौरिया का year-wise ethanol production।
दूसरा, प्रत्येक वर्ष के operating days के मुकाबले production और estimated capacity utilisation।
तीसरा, दोनों plants पर अब तक किया गया कुल capital expenditure और proposed distillery expansion की लागत।
RTI के मौजूदा जवाब में कंपनी ने इन विस्तृत आंकड़ों के लिए Annual Reports का हवाला दिया है।
इसलिए फिलहाल उपलब्ध दस्तावेजों से इतना स्पष्ट है कि HPCL Biofuels के बिहार में दो integrated ethanol plants करीब 15 वर्षों से संचालन में हैं, उनकी संयुक्त installed distillery capacity 120 KLPD है और कंपनी अब grain-based feedstock की दिशा में भी capacity expansion कर रही है। लेकिन इस पूरी अवधि में year-wise capacity utilisation की तस्वीर Annual Reports के आंकड़ों के विस्तृत analysis के बाद ही सामने आएगी।




