Published On : Thu, Jun 17th, 2021

HOARDING – KIOSK की समयावधि समाप्ति बाद नया TENDER नहीं

– आय वाली विज्ञापन विभाग पर किसी का ध्यान नहीं,स्थाई कर्मी लगा रहे चुना

नागपुर – नागपुर मनपा की संपत्ति पर लगे HOARDING-KIOSK की तय समयावधि समाप्त हुए जमाना हो गया लेकिन विभाग के प्रमुख कोरोना की आड़ लेकर तब से नया टेंडर बुलाने के नाम पर आनाकानी कर रहे.जिससे मनपा खजाने को करोड़ों में राजस्व हानि हो रही.विडंबना यह हैं कि एक तरफ आयुक्त निधि आभाव का रोना रहे,इस चक्कर में बकाया भुगतान रुका हुआ और साथ ही साथ विकासकार्य भी बड़े पैमाने पर लंबित हैं.

याद रहे कि मनपा संपत्ति पर खड़े होर्डिंग-कीओस्क का नियमित रूप से टेंडर निकाला जाता रहा,इससे मनपा को करोड़ों में आय होती रही.इसका अंदाजा पिछले टेंडर का मुआयना करने के बाद उसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता हैं.

टेंडर में देरी या रोकने के कारण पर विभाग का समय समय पर वक्तव्य बदलता रहा.कभी कोरोना का बहाना,तो कभी जिम्मेदार अधिकारी और सत्ताधारी पदाधिकारी के कारण टेंडर न होने का जिक्र किया गया.

उल्लेखनीय यह हैं कि वर्त्तमान में मनपा संपत्ति पर जितने भी होर्डिंग-कीओस्क के ठेकेदार/ठेकेदार कंपनी हैं,अमूमन सभी पर करोड़ों में बकाया हैं,इस सम्बन्ध में विभाग का कहना हैं कि ठेकेदार कंपनियों पर कार्रवाई न करने के लिए आला जिम्मेदार अधिकारी और मनपा के दिग्गज नगरसेवक/पदाधिकारी दबाव बनांते हैं.

इतना ही नहीं विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने काछिपुरा और खामला बस्ती में लगी मनपा की होर्डिंग को निजी हाथों में थमा दिया।जब विभाग इन दोनों जैसे अन्य होर्डिंग-कीओस्क की फाइल में ADVERTISEMENT TAX AND GROUND RENT संबंधी कागजाततों का मुआयना करने पर दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता हैं.

शहर में ऐसे कई होर्डिंग-कीओस्क खड़े हैं,जिनका मनपा में कोई हिसाब किताब नहीं या फिर मौखिक सलाह-मशविरा पर चल रही.

बैनर स्टैंड ठेकेदार पर 2.5 करोड़ का बकाया,वसूली के नाम पर कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे

मनपा विज्ञापन विभाग ने शहर भर में 550 बैनर स्टैंड का ठेका 1.25 करोड़ में एक विवादास्पद कंपनी को दिया।समाचार लिखे जाने तक इस ठेकेदार कंपनी ने 1 भी रूपया मनपा को नहीं दिया।

विभाग से इस सम्बन्ध में पूछने पर उन्होंने RTI के तहत जानकारी दी कि उन्हें जप्ती की नोटिस दी गई साथ में TERMINATE भी किया गया लेकिन विडंबना यह हैं कि यह ठेकेदार कंपनी आज ही उन बैनर स्टैंडों को किराये पर चला रही,अर्थात मनपा विज्ञापन विभाग के शह पर उक्त कंपनी हित में लीपापोती कर मामला दबाया जा रहा,वह भी वर्षों से.

जब विभाग से जानकारी मांगी गई कि उक्त ठेकेदार कंपनी ‘यश’ ने कितने बैनर स्टैंड खड़े किये तो इसका जवाब विभाग के पास नहीं था.इन सभी के ADVERTISEMENT TAX AND GROUND RENT की जानकारी के नाम पर जवाब देने के बजाय RTI के तहत दिए गए कागजातों की खाक छानने का निर्देश दिया गया.

उक्त DEFAULTER ठेकेदार कंपनी पर ढाई करोड़ का बकाया होने के बाद विभाग ने कागजों पर जप्ती और टर्मिनेट की कार्रवाई दिखा रहे.दूसरी ओर उक्त ठेकेदार कंपनी ‘यश’ की मंशा यह दिख रही कि उसे मनपा को फूटी-कौड़ी देने की इच्छा नहीं,इसलिए औने-पौने दाम पर बैनर स्टैंड आज भी बेच इस क्षेत्र में सक्रिय हैं.इस कंपनी को भी किसी सफेदपोश और खाकीधारी का आशीर्वाद प्राप्त होने से मनपा प्रशासन कार्रवाई करने के नाम पर बौना साबित हो रही.

विभाग प्रभारी पर OVERLOAD काम का BURDEN
मनपा प्रशासन के नाक के नीचे एकमात्र सक्षम अधिकारी जिसे मनपा के सम्पूर्ण राजस्व विभाग का मुखिया/प्रभारी की जिम्मेदारी काफी वर्षों से दे रखी हैं.क्या इनकी तुलना में मनपा के अन्य अधिकारी सक्षम नहीं या फिर मनपा में जिसकी सत्ता या जोर उसके करीबी अधिकारी को ही सम्पूर्ण कार्यभार सौंपने की परंपरा हैं.ऐसे मामलों में आयुक्त/अतिरिक्त आयुक्तों की चुप्पी उनकी सूझबूझ पर उंगलियां उठ रही हैं.

एक अधिकारी वह मूलतः वार्ड अधिकारी होने के बावजूद उसे मनपा का सम्पूर्ण राजस्व विभाग का कामकाज सौंपने से सम्बंधित सभी विभागों के साथ न्याय नहीं हो रहा ,अर्थात राजस्व वसूली के मामले में आयुक्त हो या फिर स्थाई समिति दोनों के बजटों की हवा निकल जाती हैं,ऐसा पिछले कुछ वर्षो से हो रहा.इसके साथ ही एक ही अधिकारी पर चौतरफा काम का बोझ होने से कभी कभी चिड़चिड़ाते भी देखा जा सकता हैं.