Published On : Thu, Dec 13th, 2018

ट्राफिक की अव्यवस्था पर न्यायालय ने की पुलिस आयुक्त की खिंचाई

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पहले ट्रैफिक पुलिस को सुधारो – न्यायाधीश का आदेश

File Pic

नागपुर: नागपुर नागपुर शहर के सिंग्नलों पर ट्रैफिक पुलिस दिखते नहीं. जो रहते है वे चौराहे के आसपास सड़क किनारे मोबाइल में मस्त रहते या फिर तय टारगेट पर घात लगाए बैठे रहते हैं. पहले इन्हें व्यवस्थित करने के कड़े निर्देश उच्च न्यायालय के नागपुर खंडपीठ ने शहर पुलिस आयुक्त भूषण कुमार उपाध्याय को दिए.

न्यायालय ने पुलिस प्रशासन से सवाल किया था कि ट्रैफिक नियमों का न पालन करने वालों की संख्या दिनोदिन बढ़ते जा रही है. इस पर ट्रैफिक विभाग ने क्या कार्रवाई की? शहर के पार्किंग,ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन,सड़कों पर खुले में घूम रहे आवारा पशुओं, फुटपाथों पर अतिक्रमण आदि विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए विभागीय आयुक्त संजीव कुमार की अध्यक्षता में एक समिति की स्थापना की गई थी. इस समिति द्वारा लिए गए निर्णयों की रिपोर्ट न्यायालय में पेश की गई. इस रिपोर्ट पर न्यायाधीश द्वय रवि देशपांडे व विनय जोशी की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई.

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सुनवाई के दौरान ट्रैफिक विभाग के रोजमर्रा के कामकाजों पर न्यायालय ने तीव्र नाराजगी व्यक्त की. न्यायालय ने इसके पूर्व २२ नवंबर को आदेश दिया था कि शहर के सभी सिग्नलों पर ट्रैफिक पुलिस के तैनात होने की अनिवार्यता का आदेश दिया था, लेकिन न्यायालय के आदेश को पुलिस आयुक्तालय ने नज़रअंदाज किया.

ट्रैफिक पुलिस मुख्य चौराहे के बजाय सड़क किनारे मोबाइल में गेम खेलते या फिर किसी से टाइमपास करते दिख जाएंगे या फिर सिर्फ और सिर्फ बिना हेलमेट के वाहन चालकों को पकड़ उगाही में लगे दिखाई देते हैं. इस चक्कर में यातायात नियमों का पालन करने वालों ( बिना लाइसेंस,नियम के विरोध कम उम्र वाले वाहन चालक,अवैध यात्री-सामान परिवहन करने वालों आदि पर ) पर कड़क कार्रवाई नहीं की जाती. इसलिए पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि पहले ट्रैफिक पुलिस प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त करें अन्यथा गंभीर दखल ली जाएगी. न्यायालय के आदेश की प्रति अतिशीघ्र पुलिस आयुक्त को भेजने का निर्देश भी दिया गया.

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सुनवाई के दौरान विभागीय आयुक्त समिति की रिपोर्ट पेश की गई, उसके अनुसार आरटीओ विभाग ने अप्रैल २०१७ से अक्टूबर २०१८ तक १५३३ ड्राइविंग लाइसेंस रद्द किए. यातायात विभाग ने यातायात नियम तोड़ने वाले २,८६,३३८ वाहन चालकों में से १०३९४१ से चालान वसूल किया.

न्यायालय ने विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता वाली समिति से पूछा कि यातायात सिग्नल व यातायात पुलिस के वेतन का खर्च यातायात नियम का उल्लंघन करने वाले से अतिरिक्त दंड वसूली से भरपाई की जा सकती हैं क्या ? इस मामले में समिति ने जानकारी दी कि बैठक में निर्णय लेकर राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है.

उल्लेखनीय यह है कि पुलिस प्रशासन चाहे तो नागपुर जैसे शहर में अपराध व भय मुक्त वातावरण तैयार कर सकती है. लेकिन विडंबना यह है कि प्रशासन के नुमाइंदे चेहरा देख बर्ताव और टारगेट पूरा कर रहे हैं.

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