
नागपुर: शहर की करोड़ों रुपये की सीमेंट कंक्रीट (CC) सड़कों की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों के बीच नागपुर महानगरपालिका (NMC) ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ को आश्वासन दिया था कि इन सड़कों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट IIT Bombay से कराया जाएगा। लेकिन तीन सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी ऑडिट प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर देरी की वजह क्या है?
हाईकोर्ट में क्या कहा था?
सुनवाई के दौरान मनपा ने अदालत को बताया था कि शहर की सीसी सड़कों का निष्पक्ष और तकनीकी मूल्यांकन IIT Bombay जैसी प्रतिष्ठित संस्था से कराया जाएगा। इस आश्वासन के बाद माना जा रहा था कि जल्द ही ऑडिट की प्रक्रिया शुरू होगी।
लेकिन अब तक न तो ऑडिट टीम के आने की कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है और न ही किसी निरीक्षण की शुरुआत हुई है।
आखिर अटका कहां मामला?
मनपा की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि:
क्या IIT Bombay ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है?
क्या दोनों पक्षों के बीच औपचारिक सहमति बनी है?
ऑडिट की शर्तें (Terms of Reference) तय हुई हैं या नहीं?
ऑडिट की समय-सीमा क्या होगी?
इन सवालों पर अब तक सार्वजनिक रूप से कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
करोड़ों की परियोजना, जवाबदेही भी जरूरी
नागपुर में पिछले कुछ वर्षों में सीसी सड़कों पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। कई स्थानों पर सड़क निर्माण की गुणवत्ता, समय से पहले दरारें, जलभराव और डिजाइन संबंधी कमियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं।
ऐसे में स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह तय करेगा कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ या नहीं और यदि कहीं खामियां हैं तो उनकी जिम्मेदारी किसकी होगी।
देरी से बढ़ रहे सवाल
ऑडिट शुरू नहीं होने से अब यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या यह केवल प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी है या फिर किसी अन्य कारण से मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
हालांकि, अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक दस्तावेज या प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह कहा जा सके कि देरी किसी दबाव या जानबूझकर की गई है।
अब सबकी नजर अगली सुनवाई पर
अब निगाहें हाईकोर्ट की अगली सुनवाई और मनपा की प्रगति रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि ऑडिट प्रक्रिया जल्द शुरू नहीं होती, तो अदालत मनपा से देरी के कारणों पर जवाब मांग सकती है।
नागपुर टुडे के सवाल
IIT Bombay को प्रस्ताव कब भेजा गया?
क्या संस्थान ने इसे औपचारिक रूप से स्वीकार किया है?
ऑडिट शुरू होने की संभावित तारीख क्या है?
यदि IIT Bombay उपलब्ध नहीं है, तो क्या कोई वैकल्पिक तकनीकी संस्था तय की गई है?
जनता को ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी या नहीं?
शहरवासियों की अपेक्षा केवल अच्छी सड़कें नहीं, बल्कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्ता भी है। ऐसे में IIT Bombay रोड ऑडिट जितनी जल्दी शुरू होगा, उतनी ही जल्दी इन सवालों के जवाब भी सामने आएंगे।
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