Published On : Mon, Sep 10th, 2018

बलात्कार पीड़ित नाबालिक को गर्भपात की इजाज़त

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Mumbai-High-Court

नागपुर – मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए बलात्कार पीड़ित नाबालिक लड़की को भ्रूण को गिराने की इजाज़त दे दी। न्यायाधीश भूषण धर्माधिकारी और मुरलीधर गिरटकर की दोहरी पीठ ने यह अहम फैसला सुनाया। पीड़िता के पेट में पल रहे भ्रूण को लेकर आयी डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला लिया। जिसमे कहाँ गया है की गर्भपात के लिए की शस्त्रक्रिया किये जाने से पीड़िता को किसी तरह की हानि नहीं होगी जबकि बच्चे के जन्म लेने के बाद उसकी मानसिक स्थित पर विपरीत असर पड़ेगा। अपने आदेश में अदालत ने दिनों के भीतर भ्रूण को गिराने का आदेश दिया है।

अदालत के आदेश पर मेडिकल कॉलेज नागपुर द्वारा डॉक्टरों का एक दल बनाया गया था। इस दल के द्वारा शनिवार को पीड़ित नाबालिक बच्ची की जाँच की गई। मुताबिक मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों का दल का प्रतिनिधित्व कर रहे प्रसूतिशास्त्र और स्त्रीरोगशास्त्र विभाग प्रमुख डॉ जे आय फिदवी ने अदलात में रिपोर्ट दी थी। इस रिपोर्ट में बताया गया है की 20 हफ्ते का भ्रूण पीड़िता के पेट में है। और पीड़िता केवल 16 वर्ष 10 महीने की है। इसलिए उसे गर्भपात की इजाजत मिलनी अपील डॉक्टरों के दल ने अदालत से की थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने यह फ़ैसला सुनाया

. मुलीच्या पोटात २० आठवडे पूर्ण झालेला गर्भ आहे. मुलगी केवळ १६ वर्षे १० महिने वयाची असून ती बोरी पोलीस ठाण्याच्या हद्दीत राहते. तिने गर्भपाताची परवानगी मिळविण्यासाठी आईमार्फत उच्च न्यायालयात याचिका दाखल केली होती. तिची याचिका मंजूर करण्यात आली. मुलीतर्फे अ‍ॅड. चिन्मय धर्माधिकारी, राज्य सरकारतर्फे अ‍ॅड. केतकी जोशी तर, केंद्र सरकारतर्फे अ‍ॅड. मुग्धा चांदुरकर यांनी बाजू मांडली.

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