
नागपुर – जानलेवा नायलॉन मांजे की बिक्री और इस्तेमाल पर प्रभावी रोक लगाने में प्रशासन की कथित नाकामी को लेकर बंबई हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने राज्य सरकार के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। नायलॉन मांजे के नियंत्रण और प्रतिबंध को लेकर सरकार की ओर से पेश की गई अस्पष्ट जानकारी पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट और ठोस जानकारी पेश करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने सरकार को आगामी सोमवार तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
नायलॉन मांजे के बढ़ते इस्तेमाल से नागरिकों के साथ-साथ पक्षियों और अन्य जीव-जंतुओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रतिबंध के बावजूद बाजार में इसकी उपलब्धता और पतंगबाजी में इसके इस्तेमाल की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर न्यायालय ने मामले में गंभीरता दिखाई है।
इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अनिल किलोर और न्यायमूर्ति रजनीश व्यास की खंडपीठ के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र एड. निश्चय जाधव ने अदालत का ध्यान नायलॉन मांजे से होने वाली दुर्घटनाओं की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष विदर्भ क्षेत्र में नायलॉन मांजे के कारण बड़ी संख्या में नागरिकों के घायल होने की घटनाएं सामने आई थीं। मांजे की चपेट में आने से दोपहिया वाहन चालक, राहगीर और अन्य नागरिक गंभीर रूप से जख्मी होने का खतरा बना रहता है।
प्रतिबंध के बावजूद खुलेआम बिक्री का मुद्दा
नायलॉन मांजे के उत्पादन, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए राज्य के पर्यावरण विभाग ने 1 मार्च 2023 को अधिसूचना जारी की थी। इसके बावजूद प्रतिबंधित मांजा बाजार में पहुंचने और इसकी बिक्री होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई स्थानों पर चोरी-छिपे इसकी बिक्री किए जाने के आरोप भी लगते रहे हैं।
अदालत के समक्ष यह सवाल भी उठा कि प्रतिबंध लागू होने के बावजूद नायलॉन मांजा आखिर बाजार तक कैसे पहुंच रहा है और उसके खिलाफ जिम्मेदार विभागों द्वारा किस स्तर पर कार्रवाई की जा रही है। न्यायालय द्वारा पूर्व में भी प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं दिखाई देने पर अदालत ने सरकार से जवाब मांगा है।
सिर्फ कागजों पर प्रतिबंध, जमीन पर इस्तेमाल?
न्यायालय की कार्यवाही के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया कि नायलॉन मांजे पर प्रतिबंध की अधिसूचना जारी होने के बावजूद उसके प्रभावी अमल को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। प्रतिबंध के उल्लंघन पर कितनी कार्रवाई हुई, कितने प्रकरण दर्ज किए गए, कितनी मात्रा में मांजा जब्त किया गया और इसकी बिक्री रोकने के लिए प्रशासन ने क्या ठोस कदम उठाए—इन सभी बिंदुओं पर सरकार से जानकारी अपेक्षित है।
नायलॉन मांजा सामान्य धागे की तुलना में अधिक मजबूत होने के कारण दुर्घटनाओं में गंभीर चोट का कारण बन सकता है। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए सड़क पर फैला मांजा जानलेवा साबित होने की आशंका रहती है। इसके अलावा पेड़ों और बिजली के तारों में फंसने के कारण पक्षियों के घायल होने की घटनाएं भी सामने आती हैं।
अगली सुनवाई पर सरकार को देना होगा स्पष्ट जवाब
हाईकोर्ट ने सरकार को अब सामान्य अथवा अस्पष्ट जानकारी के बजाय ठोस और तथ्यात्मक जानकारी के साथ अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। आगामी सोमवार को होने वाली सुनवाई में सरकार को नायलॉन मांजे की बिक्री और इस्तेमाल रोकने के लिए उठाए गए कदमों तथा अब तक की कार्रवाई का ब्यौरा अदालत के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
अदालत के इस सख्त रुख के बाद प्रशासनिक महकमे की कार्रवाई पर भी नजरें टिक गई हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अगली सुनवाई में राज्य सरकार नायलॉन मांजे की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक को लेकर क्या जानकारी अदालत के समक्ष रखती है और प्रतिबंध को जमीन पर प्रभावी बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




