Published On : Sat, Apr 6th, 2019

Gudi Padwa 2019: गुड़ी पड़वा की तिथि, शुभ मुहूर्त, महत्‍व और मान्‍यताएं

नई दिल्ली: गुड़ी पड़वा (Gudi Padwa) मराठी और कोंकणी हिन्‍दुओं का नव वर्ष है (Hindu New Year). यह त्‍योहार नए वर्ष (Marathi New Year) के आगमन का सूचक है. हर साल चैत्र महीने के पहले दिन गुड़ी पड़वा मनाया जाता है. यानी कि चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के पहले दिन नए साल के रूप में गुड़ी पड़वा मनाया जाता है. इस दिन लोग अपने घरों को फूलों से सजाते हैं. साथ ही घर के आंगन और द्वार में खूबसूरत रंगोली बनाई जाती है. वहीं, उत्तर भारत में भी हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार इसी दिन से नए साल (New Year) की शुरुआत होती है, जिसे नव संवत्‍सर (Nav Samvatsar) कहा जाता है. उधर, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में इस पर्व को उगादि (Ugadi) के रूप में मनाया जाता है.
गुड़ी पड़वा कब है?

हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार गुड़ी पड़वा हर साल चैत्र (Chaitra) महीने के पहले दिन मनाया जाता है. चैत्र महीने की शुरुआत होते ही नौ दिनों तक चैत्र नवरात्रि की धूम रहती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक यह त्‍योहार हर साल मार्च या अप्रैल महीने में आता है. इस बार गुड़ी पड़वा 6 अप्रैल को है.

गुड़ी पड़वा की तिथि और शुभ मुहूर्त
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 05 अप्रैल 2019 को दोपहर 02 बजकर 20 मिनट से
प्रतिपदा तिथि समाप्‍त: 06 अप्रैल 2019 को दोपहर 03 बजकर 23 मिनट तक


गुड़ी पड़वा का महत्‍व
मराठी और कोंकणी हिन्‍दुओं के लिए गुड़ी पड़वा का विशेष महत्‍व (Importance of Gudi Padwa) है. इस दिन को वे नए साल का पहला दिन मानते हैं. गुड़ी का अर्थ होता है ‘विजय पताका’ और पड़वो यानी कि ‘पर्व’. इस पर्व को ‘संवत्‍सर पड़वो’ के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन से मराठी संवत्‍सर (Marathi New Year) की शुरुआत होती है.

आपको बता दें कि वर्ष यानी कि साल को संवत्‍सर कहा जाता है और कुल 60 संवत्‍सर होते हैं. जैसे हर महीने के नाम होते हैं उसी तरह हर साल के नाम अलग अलग होते हैं. जैसे 12 महीने होते हैं उसी तरह 60 संवत्सर होते हैं. उत्तर भारत के लोग गुड़ी पाड़वा नहीं मनाते हैं लेकिन इसी दिन से वे लगातार नौ दिनों तक चैत्र नवरात्रि का व्रत (Chaitra Navratri Vrat) रखते हैं. उत्तर भारत में भी चैत्र नवरात्रि की शुरुआत के साथ ही हिन्‍दू नव वर्ष (Hindu Nav Varsh) का जश्‍न मनाया जाता है.

कैसे मनाया जाता है गुड़ी पड़वा
गुड़ी पड़वा के मौके पर दिन की शुरुआत पारंपरिक तेल स्‍नान से की जाती है. इसके बाद घर के मंदिर में पूजा की जाती है और फिर नीम के पत्तों का सेवन किया जाता है. नीम के पत्तों को खाना विशेष रूप से लाभकारी और पुण्‍यकारी माना जाता है. महाराष्‍ट्र में इस दिन हिन्‍दू अपने घरों पर तोरण द्वार बनाते हैं. साथ ही घर के आगे एक गुड़ी यानी कि झंडा रखा जाता है.

एक बर्तन पर स्वास्तिक बनाकर उस पर रेशम का कपड़ा लपेट कर रखा जाता है. घरों को फूलों से सजाया जाता है और सुंदर रंगोली बनाई जाती है. इस दिन मराठी महिलाएं नौ गज लंबी नौवारी साड़ी (Nauvari Saree) पहनकर पूजा-अर्चना करती हैं. गुड़ी पड़वा पर घर-घर में श्रीखंड, पूरन पोली और खीर जैसे कई मीठे पकवान बनाए जाने की परंपरा है.

गुड़ी पड़वा से जुड़ी मान्‍यताएं
गुड़ी पड़वा को लेकर कई मान्‍यताएं प्रचलित हैं. एक प्राचीन कथा के मुताबिक शालिवाहन ने मिट्टी की सेना बनाकर उनमें प्राण फूंक दिए और दुश्मनों को पराजित किया. वहीं, एक दूसरी मान्‍यता के मुताबिक गुड़ी पड़वा के दिन ही यानी चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ब्रह्माजी ने सृष्टि की रचना का कार्य शुरू किया था. यही कारण है कि इसे सृष्टि का प्रथम दिन भी कहते हैं. इस दिन नवरात्र घटस्थापन, ध्वजारोहण, संवत्सर का पूजन किया जाता है.