Published On : Tue, Jul 25th, 2017

जीएसटी की आड़ में मुनाफ़ा कमाने वाले व्यापारियों पर जीएसटी विभाग की नज़र


नागपुर:
 कहावत है की कानून कितना भी सख्त हो जाए इसका पालन न करने वाले इससे बचने का रास्ता ख़ोज लेता है। कुछ ऐसा ही हो रहा है जीएसटी के साथ, देशीकृत कर प्रणाली को एक साथ लाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक कर व्यवस्था को लागू किया। लेकिन इसी की आड़ में ख़ुद पर बढ़ने वाले बोझ को जनता पर थोपने का काम कुछ व्यापारियों द्वारा किया जा रहा है। ख़ुद जीएसटी विभाग के पास इस बात की शिकायतें प्राप्त हो रही है जिस पर निगरानी की जा रही है।

जीएसटी लागू होने से कई वस्तुओं पर इसका असर पड़ा है। पुरानी कर व्यवस्था से जीएसटी में लगे ज़्यादा कर से मुनाफा कम होता देख कुछ व्यापारियों ने एमआरपी रेट को बढाकर वस्तु बेचना शुरू किया है। ऐसे व्यापारियों का जीएसटी विभाग कड़ाई से निगरानी कर रहा है और शिकायत या संशय होने पर जाँच भी की जा रही है। नागपुर ज़ोन के जॉइंट कमिश्नर, जीएसटी प्रदीप गुरुमूर्ति की माने तो उन्हें इस संबंध में कुछ शिकायतें मिली है जिन पर जाँच जारी है। गुरुमूर्ति के मुताबिक अगर कोई व्यापारी ऐसा कर रहा है तो वह गलत है जनता से मुनाफ़े के रूप में सिर्फ़ निर्धारित रक़म ही ली जा सकती है। यह काम सबसे ज़्यादा रेस्टोरेंट के व्यवसाय में देखा जा रहा है जहाँ सीधे तौर पर एमआरपी से खाद्य पदार्थ की बिक्री का संबंध नहीं है फिर भी अगर कोई ऐसा काम करता पकड़ा जाता है तो उस पर कार्रवाई करने की तैयारी में जीएसटी विभाग है।

Pradeep Gurumurthi – Joint Commissioner

 

रिवर्स चार्ज से बचने के लिए भी निकल गया तरीका
इसके अलावा एक और शिकायत जो जीएसटी विभाग के पास आयी है वह रिवर्स चार्ज से जुडी हुई है। रिवर्स चार्ज रिसीवर पार्टी द्वारा भरने का प्रावधान है लेकिन कुछ व्यापारी सर्विस प्रोवाइडर पार्टी को जीएसटी में रजिस्टर होने का दबाव बना रहे है। रिवर्स चार्ज के लिए जिन व्यापारिक और प्रोफेशनल सेक्टर को चुना गया है उसमे ट्रांसपोर्ट,लीगल सर्विसेज़,इन्सुरेंस एजेंट,रिकवरी एजेंट,कॉपीराइट,स्पांशरशिप,कंपनी डायरेक्टर जैसे अन्य शामिल है ऐसे लोग जो इस क्षेत्र से जुड़े है उसमे सर्विस हासिल करने वाली पार्टी को जीएसटी भरने का नियम है लेकिन जो सर्विस दे रहा है उस पर जीएसटी के पंजीयन के लिए दबाव बनाया जा रहा है जिससे की जीएसटी उसे भी भरना पड़े। लेकिन जीएसटी विभाग ऐसे मामलों के सर्वे में जुटा हुआ है।

Dr. L K Dhandem

 

जीएसटी से जुड़े मिथ से बचे व्यापारी – जीएसटी कमिश्नर,नागपुर ज़ोन
नागपुर जोन के जीएसटी कमिश्नर डॉ एल के धंदेम की माने तो जीएसटी को लेकर आ रही छोटी मोटी शिकायतों के अलावा व्यापारिक क्षेत्र इसे खुले दिल से अपना रहा है। उनके मुताबिक यह देश के इतिहास में अपनायी गई सबसे प्रभावी कर व्यवस्था है। इस व्यवस्था भ्रस्टाचार मुक्त व्यवस्था को तैयार करने में सहायक होगी। व्यापारी बिना डर से अपना व्यापार कर सकता है वह खुद अपनी जिम्मेदारी तय कर सकता है। हमें किसी भी व्यापारी से किसी भी तरह की पूछताछ करने या कार्रवाई करने की मनाई है। आगामी 6 महीने के दौरान व्यापारियों द्वारा गलती होने पर भी ना पैनेलिटी लगेगी और न ही कोई एक्शन लिया जायेगा। हम सिर्फ निगरानी कर रहे है और व्यवस्था को बेहतर बनाने का प्रयास कर रहे है। धंदेम का कहना है जीएसटी को लेकर मिथ फैलाया जा रहा है। कोई भी व्यापारी से उसके रिटर्न की जानकारी नहीं मांग रहा और व्यापारी को आसान जरिये से वर्ष में सिर्फ 13 रिटर्न भरने है। जीएसटी के तहत ऑफ़लाइन यूटिलिटी मॉड्यूल सिस्टम उपलब्ध है जिसके इस्तेमाल के लिए न कंप्यूटर की आवश्यकता होती न और न ही इंटरनेट की। कोई व्यापारी अगर मैन्युअल बिल बनाता है तो वह उसे इस सिस्टम में अपलोड कर सकता है। जीएसटी आसान प्रक्रिया है। नागपुर जॉन में 14036 व्यापारी सेंट्रल जीएसटी में हस्तांतरित हो चुके है सारे देश में पुरानी कर व्यवस्था से जीएसटी में हस्तांतरित होने वालो का अकड़ा 85 फ़ीसदी के लगभग है जिससे यह साबित होता है की जीएसटी को व्यापारी अपना रहे है। नागपुर जोन के तहत नागपुर,अमरावती,नाशिक और औरंगाबाद विभाग के 24 जिले आते है।