Published On : Sat, Aug 5th, 2017

सेमेस्टर पैटर्न बंद करे सरकार, शिक्षा क्षेत्र में राज्य सरकार है उदासीन – एबीवीपी

ABVP
नागपुर: 
शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों के प्रश्न कम होने की बजाए दिन ब दिन बढ़ रहे हैं. विद्यार्थियों को कई सारी समस्याओं को लेकर महाविद्यालय व नागपुर विश्वविद्यालय में परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसमें सबसे बड़ी परेशानी का कारण है स्कॉलरशिप. स्कॉलरशिप न मिलने के कारण कई विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित होना पड़ा रहा है.

महाराष्ट्र सरकार को समय पर यह स्कॉलरशिप मुहैया कराने की मांग को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेशमंत्री विक्रमजीत कलाने ने आयोजित पत्र परिषद के दौरान की. कलाने ने जानकारी देते हुए बताया कि विभिन्न प्रकार की स्कॉलरशिप विभिन्न खिड़कियों से न देते हुए एक ही खिड़की से देने की व्यवस्था सरकार द्वारा की जाए व ग्यारहवीं में प्रवेश लेते समय स्कॉलरशिप से समबंधित कागजात दसवीं कक्षा तक सभी जमा किए जाएं. जिसके बाद दसवीं पास होने के बाद सभी कागजात विद्यार्थियों को लौटा दिए जाएं. जिससे विद्यार्थियों को ग्यारहवीं में स्कॉलरशिप मिलने में परेशानी न हो. ऐसी मांग भी इस दौरान की गई.

इस दौरान यह भी जानकारी दी गई कि विश्वविद्यालय प्रशासन हर साल शिक्षा में विभिन्न पैटर्न शुरू करती है. सेमेस्टर पैटर्न वर्षों से शुरू है. इसमें 180 घंटे प्राध्यापकों से काम लेना अनिवार्य है. लेकिन सेमेस्टर पैटर्न होने के कारण अधिकांश प्राध्यापक इसमें समय नहीं दे पाते और विद्यार्थियों का पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं हो पाता. इस सेमेस्टर पैटर्न के कारण विद्यार्थियों को खामियाजा उठाना पड़ रहा है. साल भर विद्यार्थी, महाविद्यालय प्रशासन व विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षा में व्यस्त रहने के कारण सेमेस्टर पैटर्न को बंद करने की मांग की जा रही है.

महाविद्यालय व विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों के प्रश्न व विकास करने के लिए विश्वविद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों के प्रतिनिधितत्व का कुछ वर्षो से विचार नहीं किया जा रहा है. विद्यार्थी के नेतृत्व के उद्देश्य को लेकर छात्रसंघ के चुनाव कराए जाने की मांग को लेकर विश्वविद्यालय को कई बार निवेदन दिए गए हैं. लेकिन पिछले दो साल से महाराष्ट्र सरकार कोई भी निर्णय चुनाव को लेकर नहीं कर पा रही है. जल्द से जल्द चुनाव को लेकर निर्णय लेने की मांग एबीवीपी की ओर से की गई है. साथ ही ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की मांग भी इस दौरान की गई.