Published On : Thu, Nov 22nd, 2018

सरकार हलबा, माना,गोवारी समाज के लोगों का अंत न देखे : नंदा पराते

Advertisement

चिंतन बैठक में भाजपा पर साधा निशाना

nanda parate

नागपुर: विदर्भ के आदिम प्रमुखों की चिंतन बैठक संपन्न हुई. नागपुर के धरमपेठ के संविधान सभागृह में इस बैठक के अध्यक्ष आदिम नेता एडवोकेट नंदा पराते ने किया. इस दौरान पराते ने कहा कि संविधान में हलबा, माना, गोवारी समाज को अनुसूचित जनजाति कहकर न्याय मिला है. बाबासाहेब ने विदर्भ के हलबा, माना, गोवारी, इस समाज के ब्रिटिशकालीन इतिहास को पढ़ आदिवासी होने को मान्य किया है और संविधान की कलम 342 में आरक्षण लागू किया. लेकिन सरकार हिन्दू धर्म के नाम पर आदिवासी की सहूलियत नकार रही है अब सरकार ने इनका अंत नहीं देखना चाहिए.

Gold Rate
28 Jan 2026
Gold 24 KT ₹ 1,64,400/-
Gold 22 KT ₹ 1,52,900 /-
Silver/Kg ₹ 3,72,000 /-
Platinum ₹ 60,000/-
Recommended rate for Nagpur sarafa Making charges minimum 13% and above

पराते ने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता पर आने के तीन महीने में जाति प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र देने का वचन देने के वादे को देखकर लोगों ने भाजपा को मतदान दिया था. लेकिन केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने साढ़े चार साल से प्रमाणपत्र नहीं दिया है. भाजपा के इस विश्वासघात के कारण लोगों में खासी नाराजगी फैली हुई है. हलबा, माना, गोवारी समाज के लोगों को फ़साने के कारण लोग सड़क पर आकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

हलबा, माना, गोवारी इन आदिवासी समाज को पहले जैसे ही सहूलियतें शुरू है. ऐसे निर्णय न्यायलय ने अनेक बार दिए हैं. लेकिन भाजपा सरकार इन लोगों के खिलाफ आरक्षण विरोधी भूमिका लेकर सुप्रीम कोर्ट में गई. इस धोकेबाज सरकार को जनता कभी माफ़ नहीं करेगी.

बैठक में प्रमुख मेहमानों में गीता जलगावकर,लोकेश वट्टीघरे, अनीता हेड़ाऊ, अशोक खाडिलकर, राजू नंदनवार, मोरेश्वर निनावे, मँजेरी पौनीकर, शालू नंदनवार, बबलू निनावे, सविता बुर्डे, अलका दलाल मौजूद थे.

GET YOUR OWN WEBSITE
FOR ₹9,999
Domain & Hosting FREE for 1 Year
No Hidden Charges
Advertisement
Advertisement