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    Published On : Thu, Nov 22nd, 2018

    सरकार हलबा, माना,गोवारी समाज के लोगों का अंत न देखे : नंदा पराते

    चिंतन बैठक में भाजपा पर साधा निशाना

    nanda parate

    नागपुर: विदर्भ के आदिम प्रमुखों की चिंतन बैठक संपन्न हुई. नागपुर के धरमपेठ के संविधान सभागृह में इस बैठक के अध्यक्ष आदिम नेता एडवोकेट नंदा पराते ने किया. इस दौरान पराते ने कहा कि संविधान में हलबा, माना, गोवारी समाज को अनुसूचित जनजाति कहकर न्याय मिला है. बाबासाहेब ने विदर्भ के हलबा, माना, गोवारी, इस समाज के ब्रिटिशकालीन इतिहास को पढ़ आदिवासी होने को मान्य किया है और संविधान की कलम 342 में आरक्षण लागू किया. लेकिन सरकार हिन्दू धर्म के नाम पर आदिवासी की सहूलियत नकार रही है अब सरकार ने इनका अंत नहीं देखना चाहिए.

    पराते ने आगे कहा कि भाजपा सरकार ने सत्ता पर आने के तीन महीने में जाति प्रमाणपत्र और वैधता प्रमाणपत्र देने का वचन देने के वादे को देखकर लोगों ने भाजपा को मतदान दिया था. लेकिन केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने साढ़े चार साल से प्रमाणपत्र नहीं दिया है. भाजपा के इस विश्वासघात के कारण लोगों में खासी नाराजगी फैली हुई है. हलबा, माना, गोवारी समाज के लोगों को फ़साने के कारण लोग सड़क पर आकर प्रदर्शन कर रहे हैं.

    हलबा, माना, गोवारी इन आदिवासी समाज को पहले जैसे ही सहूलियतें शुरू है. ऐसे निर्णय न्यायलय ने अनेक बार दिए हैं. लेकिन भाजपा सरकार इन लोगों के खिलाफ आरक्षण विरोधी भूमिका लेकर सुप्रीम कोर्ट में गई. इस धोकेबाज सरकार को जनता कभी माफ़ नहीं करेगी.

    बैठक में प्रमुख मेहमानों में गीता जलगावकर,लोकेश वट्टीघरे, अनीता हेड़ाऊ, अशोक खाडिलकर, राजू नंदनवार, मोरेश्वर निनावे, मँजेरी पौनीकर, शालू नंदनवार, बबलू निनावे, सविता बुर्डे, अलका दलाल मौजूद थे.


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