Published On : Sat, Sep 3rd, 2016

गोसीखुर्द सिंचन प्रकल्प पर एसीबी ने अदालत में दाखिल की 6434 पन्नो की चार्जशीट

Gosikhurd

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नागपुर: विदर्भ के प्रमुख सिंचन प्रकल्प गोसीखुर्द में हुए भ्रष्टाचार पर शनिवार 3 सितंबर 2016 को चार्जशीट दाखिल की। राज्य भर में सिंचन प्रकल्पो में हुई धांधली और भ्रष्टाचार की जांच की जिम्मेदारी राज्य सरकार ने ऐंटी करप्शन ब्यूरो को सौंपी थी। एसीबी के पास ही विदर्भ सिंचन महामंडल के अंतर्गत आनेवाले गोसीखुर्द सिंचन प्रकल्प की जांच का जिम्मा भी था। सरकार के आदेश के बाद नागपुर के सदर थाने में पुलिस निरीक्षक युवराज पतकी ने प्रकल्प से जुड़े अधिकारियो और एम ए कन्स्ट्रक्शन कंपनी के निसार खान मोहम्मद खान और अन्य चार पार्टनरों के खिलाफ 23 फरवरी 2016 को शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के आधार पर यह जांच शुरू थी और आज एसीबी ने विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन ब्यूरो, विशेष न्यायालय में 6 हजार 434 पन्नो की चार्जशीट दाखिल कराई है।

इस चार्जशीट में गोसीखुर्द में हुए भ्रष्टाचार का सारा काला चिट्ठा है। चार्जशीट की माने तो प्रकल्प में नियम कायदे को ताक पर रखकर काम किया गया जिसमे कॉन्ट्रेक्टर के साथ सरकारी अधिकारियो की भी मिली भगत थी। जांच टीम के मुताबिक प्रकल्प के घोडाझरि शाखा की केनाल में 4.260 किलोमीटर से लेकर 8.800 किलोमीटर तक किये गए मिट्टी को छाटने और उसे कव्हर करने के काम में भारी कोताही बरती गई।

अपनी इस चार्जशीट में एसीबी ने बताया कि एम ए कन्स्ट्रक्शन कंपनी को 101 करोड़ 18 लाख 80 हजार 395 रूपए का काम दिया गया। जिसमे से कंपनी को 7 करोड़, 38 लाख, 66 हजार रूपए का अवैध फायदा मिला। यह फायदा सरकार को आर्थिक नुकसान है। सरकार को हुए नुकसान के लिए सिर्फ कंपनी ही नहीं बल्कि सरकारी अधिकारियो की भी मिली भगत है। विदर्भ सिंचन विकास महामंडल के तत्कालीन कार्यकारी संचालक ने नियम के विरुद्ध जाकर टेंडर को रिव्यू कर उसमे बढ़त को मंजूरी दी। इतना ही नहीं निविदा को तकनिकी मजूरी मिलने से पहले ही उसे मंजूरी दी गई।

कार्यकारी अभियंता और विभागीय लेखाअधिकारी ने कंपनी द्वारा पेश किये गए अनुभव प्रमाणपत्र की जांच नहीं की और निविदा की जांच करने वाली समिति ने आँख मूंद कर कंपनी पर भरोसा जताते हुए उसे कई तरह की सहूलतें प्रदान की। जिससे यह साफ होता है कि इस मामले में मुख्य कार्यकारी अभियंता, अधीक्षक अभियंता, कार्यकारी अभियंता भी भ्रष्टाचार में लिप्त है।

एसीबी की चार्जशीट में कई चौकाने वाली जानकारी सामने आई है। चार्जशीट के अनुसार ठेकेदार निसार एफ खत्री ने निविदा जमा करते समय अनुभव का झूठा प्रमाण पत्र जमा कराया। जाली सर्टिफिकेट पर जाली दस्तावेज तक किये गए। ठेकेदार कंपनी ने सरकारी टेंडर प्रक्रिया को धता बताते हुए टेंडर की कृतिम प्रक्रिया तक बना डाली और इसके लिए बाकायदा अपनी ही दूसरी कंपनियों के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया की फीस भी जमा कराई। इतना ही नहीं तो खुद के नाम से मिले कामो को महामंडल और कार्यकारी अभियंता के लिए जरुरी इज़ाज़त को न लेते हुए अन्य कंपनियों को हस्तांतरित कर दिया। गोसीखुर्द प्रकल्प में भ्रष्टाचार की जांच के बाद एसीबी द्वारा अदालत में जमा कराई गई चार्जशीट में कुल 6 लोगो को आरोपी बनाया गया है।

आरोपियों की सूचि

  • सोपान रामाराव सूर्यवंशी, तत्कालीन मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अभियंता
  • रमेश डी वर्धने, तत्कालीन मूल्यांकन समिति के सदस्य सचिव और कार्यकारी अभियंता
  • गुरुदास सहादेव मांडवकर, तत्कालीन वरिष्ठ विभागीय लेखाधिकारी
  • संजय लक्ष्मण खोलापुरकर, तत्कालीन अधीक्षक अभियंता
  • रोहिदास मारुती लांडगे, कार्यकारी संचालक, विदर्भ सिंचन विकास महामंडल
  • निसार फ़तेह मोहम्मद अब्दुल्ला खत्री, एम ए कन्स्ट्रक्शन