Published On : Wed, Apr 29th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

गोंदिया का जल मॉडल: मशीन नहीं, ‘मटके’ बुझा रहे लाखों कंठों की प्यास

गोंदिया स्टेशन पर 58 साल से जारी है 'मानवता का महाकुंभ' , जहां बिकता नहीं , बरसता है पानी ​
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​गोंदिया। आज के दौर में जहां पांच सितारा होटलों से लेकर प्लेटफॉर्म तक पानी की बूंद-बूंद बिकती है, वहीं महाराष्ट्र का गोंदिया रेलवे स्टेशन मानवता का ‘जल तीर्थ’ बन गया है। भीषण गर्मी और तपती दोपहर में जब रेल यात्री प्यास से बेहाल होते हैं, तब उनके पास कोई बोतल बेचने वाला नहीं, बल्कि मुफ्त शीतल जल का सेवादार पहुंचता है यह सिलसिला कोई दो-चार दिन का नहीं, बल्कि पिछले 58 वर्षों से अनवरत जारी है।

​प्यासे के पास खुद चलकर आता है ‘ कुआं ‘

​मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग पर स्थित गोंदिया इकलौता ऐसा स्टेशन है, जहां यात्रियों को पानी के लिए ट्रेन से उतरने की जरूरत नहीं पड़ती।
यहां ​डोर-स्टेप सेवा के साथ 25 ट्रॉलियों और ड्रमों के जरिए सेवादार सीधे ट्रेन की बोगियों तक पहुंचते हैं वह भी ​जीरो कॉस्ट।
चाहे आप एक गिलास पिएं , 1 लीटर की बोतल भरें या 5 से 20 लीटर का जार भरें, यहां ‘नो बिल, ओनली ब्लेसिंग्स’ ( दुवाओं) का नियम चलता है।
​ यह पूरा मिशन किसी सरकारी फंड से नहीं, बल्कि गोंदिया के श्री किराना तेल व्यापारी एसोसिएशन के जज्बे से चलता है।

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​देसी ‘फ्रिज’ का कमाल ‘ मानवता का महाकुंभ ‘
​संस्था के संरक्षक लख्मीचंद रोचवानी ने बताया कि 58 वर्षों से निरंतर चल रही इस सेवा की सबसे बड़ी खासियत इसकी शुद्धता और ठंडक है।​”हम मशीनी वाटर कूलर का नहीं, बल्कि मिट्टी की ‘नांद’ (बड़े मटकों ) का इस्तेमाल करते हैं। कामठी से विशेष रूप से मंगाए गए 220 मिट्टी के मटकों में पानी ठंडा होता है, जिसकी कुल क्षमता 22,000 लीटर है।
स्टेशन के सभी 5 प्लेटफार्म पर पियाऊं शेड है , ट्रेन के प्लेटफार्म पर आते ही एक साथ 50 सेवादार , जल वितरण सेवा में जुट जाते हैं , रोजाना 15000 से 20000 यात्रियों को मुफ्त शीतल जल सुबह 7:00 से रात 12:00 तक सेवादारों द्वारा पिलाया जाता है।

व्यापारी नहीं, ‘पुण्य के पहरेदार’

इस मिशन की सबसे खूबसूरत तस्वीर तब दिखती है जब शहर के बड़े-बड़े करोड़पति व्यापारी अपना कारोबार छोड़कर, हाथ में जग और चाड़ियां लेकर साधारण सेवादार की तरह ट्रेन के जनरल कोचों में पानी पिलाते नजर आते हैं।
संस्था के पदाधिकारी सतीश रोचवानी कहते हैं, “यह प्यास बुझाने का माध्यम नहीं, मानवता की सच्ची पूजा है। हमारा संदेश साफ है-सबसे बड़ा धर्म इंसान की सेवा है।बहरहाल जब बाजारवाद के दौर में संवेदनाएं सूख रही हैं, गोंदिया का यह ‘जल मॉडल’ पूरे देश के लिए एक नजीर है। यह साबित करता है कि अगर समाज ठान ले, तो सरकार की ओर देखे बिना भी बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

रवि आर्य

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