
गोंदिया। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार द्वारा किसानों की कर्जमाफी के लिए शुरू किए गए ‘भोजन त्याग आंदोलन’ पर भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर विधान परिषद सदस्य (MLC) डॉ. परिणय फुके ने बेहद तीखा और बड़ा हमला बोला है , फुके ने रोहित पवार के इस आंदोलन को सीधे तौर पर ‘मनोज जरांगे पाटिल’ की शैली की नकल करने का एक सोचा-समझा हथकंडा करार दिया है।
मोदी के 12 वर्षों के विज़न के बाद सियासी ‘फायरिंग’
गोंदिया में आयोजित ‘मीडिया संवाद’ कार्यक्रम में सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ऐतिहासिक 12 वर्षों में ‘विकसित भारत’ के संकल्प, नक्सलवाद के खात्मे, आदिवासी अंचलों के विकास और धरातल पर उतरी कल्याणकारी योजनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई लेकिन इस चर्चा के ठीक बाद डॉ. परिणय फुके ने मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए राज्य की विपक्षी पार्टियों पर जमकर सियासी तीर चलाए।
रोहित पवार ‘फूड बॉयकॉट’ छोड़ें, ‘मीडिया बॉयकॉट’ शुरू करें
बता दें कि एनसीपी (SP) विधायक रोहित पवार ने किसान कर्जमाफी की दमनकारी शर्तों को खत्म करने की मांग को लेकर खाद्य बहिष्कार (अन्न त्याग) आंदोलन शुरू किया है। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए बीजेपी विधायक डॉ. परिणय फुके ने कहा कि रोहित पवार की भूख हड़ताल किसानों की वास्तविक समस्याओं के लिए बिल्कुल नहीं है।
उन्होंने कहा, रोहित पवार ने जो ‘अन्न त्याग आंदोलन’ शुरू किया है, उसके बजाय उन्हें अब ‘मीडिया बहिष्कार आंदोलन’ शुरू करना चाहिए। यह आंदोलन किसानों के कल्याण के लिए नहीं, बल्कि केवल मनोज जरांगे को मात देने और पब्लिसिटी पाने का एक हथकंडा मात्र है।”फुके ने रोहित पवार को नसीहत देते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं पर राजनीति करने के बजाय उन्हें सरकार से सीधे बातचीत कर समाधान निकालना चाहिए।
उद्धव सांसदों की वफादारी परख रहे हैं
बात सिर्फ रोहित पवार तक ही नहीं रुकी। विधायक परिणय फुके ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में मचे कथित घमासान और सांसदों के विद्रोह की खबरों पर भी बड़ा बयान दिया। उद्धव ठाकरे द्वारा बुलाई गई सांसदों की आपातकालीन बैठक पर तंज कसते हुए फुके ने कहा, “ऐसी प्रबल चर्चा है कि उद्धव ठाकरे के सांसद मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के लगातार संपर्क में हैं और जल्द ही शिवसेना में शामिल होने वाले हैं , उद्धव ठाकरे को डर है कि उनके सांसद विद्रोह कर सकते हैं, इसीलिए वह अपने सांसदों की वफादारी परख रहे हैं। यह आपात बैठक और कुछ नहीं, बल्कि सिर्फ सांसदों का वफादारी टेस्ट है।”
सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक फुके ने रोहित पवार के आंदोलन को सीधे “नौटंकी” और “हथकंडा” करार दे दिया। दूसरी ओर, फुके के इस सनसनीखेज बयान ने उद्धव ठाकरे की ‘उबाठा’ पार्टी के भीतर चल रहे असंतोष और सांसदों के पाला बदलने की चर्चाओं को भी नई हवा दे दी है।
रवि आर्य
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