Published On : Wed, Apr 8th, 2020

गोंदिया: संकटमोचक कृपा करो , कष्ट हरो..

हनुमान जन्मोत्सव पर्व पर मंदिर सूने , भक्त नदारद

गोंदिया: चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि को देशभर में हनुमान जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाता है। वैश्विक कोरोना महामारी के चलते , देशव्यापी लाक डाउन होने के कारण गोंदिया जिला प्रशासन ने भी धार्मिक स्थलों पर भीड़ इकट्ठी ना हो तदहेतु जमाबंदी कानून की धारा 144 का पालन करने की अपील जिले के समस्त नागरिकों से की है लिहाज़ा मंदिरों मैं ट्रस्ट कमेटी द्वारा नियुक्त पुजारी द्वारा ही प्रतिदिन मुर्तिश्रंगार और विधिवत पूजा-अर्चना की जा रही है।

यूं तो प्रतिवर्ष हनुमान जन्मोत्सव पर्व पर मंदिरों में हनुमान चालीसा के पाठ की गूंज और लाउड स्पीकर पर बजते भक्ति संगीत की धुनें सुनाई पड़ती थी लेकिन इस बार नज़ारा कुछ और है ? ना तो मंदिरों के बाहर दर्शनों हेतु भक्तों की कतारें लगीं है और ना ही आम लंगर (महाप्रसाद ) जैसे आयोजन ही हो रहे है ।

भक्त घरों में कर रहे हैं हनुमानाष्टक की पूजा और हनुमान चालीसा का पाठ
हनुमानजी अपने भक्तों के समस्त संकट हरने वाले भगवान माने जाते हैं यही वजह है कि उन्हें संकटमोचक नाम से भी पुकारा जाता है।
रामचरित्र मानस की तरह हनुमान गुणगाथा भी फलदायी मानी जाती है। तेजस्वी ,शक्तिशाली, गुणवान और सेवाभावी पवनपुत्र का पूरी श्रद्धा से वंदन करने के साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ , उच्चारण या ध्यान मात्र से वे प्रसन्न होकर सहायक बन जाते हैं और हनुमानाष्टक की पूजा करने से व्यक्ति को अपनी हर बाधा और पीड़ा से मुक्ति मिलने के साथ उसके सभी संकट दूर हो जाते हैं लिहाजा सभी भक्तजनों को घर में ही बैठकर पाठ एवं पूजन करने को कहा गया है और मंदिर आम दिनों की तरह दर्शनों हेतु बंद है, ऐसी जानकारी सिविल लाइन के हनुमान चौक स्थित मंदिर के पुजारी पंडित सुरेंद्र शर्मा ने देते बताया- मंदिर कमेटी जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए सभी आदेशों का पालन कर रही है इसलिए आज बुधवार 8 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव अवसर पर कोई भी बड़े आयोजन नहीं रखे गए।.


सुबह 4:30 बजे प्रात कालीन आरती -पूजन हुआ तत्पश्चात 5:45 बजे रूद्र पाठ और अभिषेक किया गया । हवन- पूजन पश्चात भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया इस दौरान सिर्फ मंदिर के पुजारी ही उपस्थित थे ।

मंदिर का बाहरी मुख्य द्वार बंद है और मूर्ति ग्रह के भीतरी कपाट खुले हुए हैं ‌, सड़क से इक्का – दुक्का जो राहगीर श्रद्धालु गुजरते हैं वे दूर से मूर्ति दर्शन कर पा रहे हैं ।

रवि आर्य