
महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में देवरी–आमगांव स्टेट हाईवे से सटे ग्राम भागी क्षेत्र में सोमवार शाम करीब 4 बजे एक दर्दनाक हादसा पेश आया। यहां एक निर्माणाधीन इमारत का लेंटर (स्लैब) अचानक भरभराकर गिर पड़ा, जिसके मलबे में दबकर एक मजदूर की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि तीन अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इस हादसे ने निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की अनदेखी के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ा मजदूर
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीणों ने राहत कार्य शुरू कर मलबे से दबे मजदूरों को बाहर निकाला।
दिनेश मदन नाईक (38 वर्ष, निवासी ग्राम मुल्ला) ने उपचाराधीन अवस्था में दम तोड़ा। जबकि गंभीर घायल रूपेंद्र राऊत (35 वर्ष, निवासी कटंगी), भूमेंद्र घासले (30 वर्ष, निवासी मुल्ला) और हितेंद्र खोब्रागड़े (निवासी- भडंगा) इन तीनों घायलों को देवरी ग्रामीण अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज हेतु गोंदिया रेफर किया गया है।
आदेश ताक पर , जारी रहा निर्माण
मामले में सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, इस स्थल पर निर्माण कार्य पूरी तरह गैर-कानूनी तरीके से चल रहा था। उपविभागीय अधिकारी (एसडीओ) देवरी, कविता विजय गायकवाड़ के डिजिटल हस्ताक्षर से 2 अप्रैल 2026 को तहसीलदार और भागी ग्राम पंचायत को काम रोकने के लिखित निर्देश जारी किए गए थे।
अधिवक्ता भूषणकुमार मस्करे की शिकायत और 24 दिसंबर 2025 को जारी जिलाधिकारी गोंदिया के आदेश के हवाले से स्पष्ट किया गया था कि गट क्रमांक 114/1 व 114/2 की भूमि शासन जमा (सरकारी जमीन) करने योग्य है, अतः यहां चल रहे अवैध निर्माण को तत्काल रुकवाकर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
क्या रसूखदारों के दबाव से दबा रहा प्रशासनिक फरमान ?
प्रशासनिक आदेश के बावजूद पिछले चार महीनों तक निर्माण कार्य निर्बाध गति से चलता रहा। स्थानीय स्तर पर यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि संबंधित बिल्डर ( ठेकेदार) और कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों के कथित रसूख व मिलीभगत के कारण मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है और निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है।
कार्रवाई और जवाबदेही की मांग
हादसे के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश है। स्थानीय नागरिकों और परिजनों का कहना है कि सिर्फ ठेकेदार या बिल्डर पर मामला दर्ज कर खानापूर्ति न की जाए, बल्कि उन संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो, जिनकी लापरवाही से रोक के बावजूद अवैध निर्माण जारी रहा और एक निर्दोष मजदूर को अपनी जान गंवानी पड़ी।
रवि आर्य




