Published On : Mon, Apr 27th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

गोंदिया से उठी हुंकार: गौ माता ‘ को ‘ राष्ट्र माता’ घोषित करने की मांग

केंद्रीय ' गौ सेवा ' मंत्रालय की हो तत्काल स्थापना , पूर्ण ' गौ हत्या ' बंदी लागू करें , प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति के नाम सौपा ज्ञापन
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गोंदिया । गोंदिया की सड़कों पर आस्था का जो समंदर उतरा, उसने न केवल शहर की रफ्तार थाम दी, बल्कि इसकी गूँज सत्ता के गलियारों तक पहुँचा दी है , अवसर था’गौ सम्मान रैली’ का। सोमवार, 27 अप्रैल को अग्रसेन भवन से शुरू हुई यह रैली जब प्रशासकीय इमारत की ओर बढ़ी, तो हाथों में डफली मंजीरे , ध्वज और जुबां पर ‘गौ माता ” के भक्ति गीत और नारों ने माहौल को पूरी तरह ‘गौ-मय’ कर दिया।

संविधान के अनुच्छेद 48 का हवाला: अब आर-पार की जंग

गायत्री परिवार और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के नेतृत्व में निकली इस रैली का उद्देश्य सीधा और स्पष्ट था ,गौ माता को ‘राष्ट्र माता’ (राष्ट्र आराध्य) का संवैधानिक दर्जा दिया जाए। गौ सेवकों ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48 और 51-A की मूल भावना का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से मांग की है कि , केंद्रीय गौ सेवा मंत्रालय की तत्काल स्थापना हो।

एकीकृत केंद्रीय कानून बनाकर देशभर में पूर्ण गौ-हत्या बंदी लागू की जाए , गौ-हत्यारों के लिए उम्रकैद जैसी कठोर सजा का प्रावधान हो।

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हर तहसील स्तर पर नंदी शाला (गौशाला) का निर्माण हो ताकि सड़कों पर घूमते गोवंश को संरक्षण मिले।

जब ‘डबल इंजन’ की सरकार, तो सड़कों पर ‘ज्ञापन’ क्यों ?

रैली के दौरान जनता के बीच एक तीखा सवाल भी तैरता रहा। जब केंद्र में मोदी सरकार, महाराष्ट्र में फडणवीस की भागीदारी वाली सरकार और स्थानीय विधायक भी सत्ता पक्ष के हैं, तो फिर गौ-भक्तों को सड़कों पर उतरकर ‘ज्ञापन-ज्ञापन’ का खेल क्यों खेलना पड़ रहा है ? ‘ गौ-समर्थकों ‘ का कहना है कि क्या सरकार एक अध्यादेश (Ordinance) लाकर इस मांग को सदन में पूरा नहीं कर सकती ? आखिर कब तक आस्था को रैलियों के भरोसे छोड़ा जाएगा ?

आखिर कब तक आस्था को रैलीयों के भरोसे छोड़ा जाएगा , दिया अल्टीमेटम

यह केवल गोंदिया जिले की आवाज नहीं है , देशभर की लगभग 5400 तहसीलों में एक साथ राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे गए हैं। संतों और गौ-भक्तों ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है ,27 जून को अगला बड़ा ज्ञापन सौंपा जाएगा , उसके बाद हस्ताक्षर अभियान से पूरे देश में व्यापक जन-समर्थन जुटाया जाएगा।

15 अगस्त 2028 यह अंतिम समय सीमा (डेडलाइन) है , यदि तब तक ‘ गौ माता ‘ को ‘ राष्ट्र माता ‘ घोषित नहीं किया गया, तो देश एक ऐसे जनांदोलन का गवाह बनेगा जो इतिहास बदल देगा।

करोड़ों सनातनियों की शांतिप्रिय अपील को कमजोरी ना समझें ?

गायत्री परिवार व हिंदू संगठन पदाधिकारी ने कहा- हमारी शांतिपूर्ण अपील को कमजोरी न समझा जाए , गौ माता हमारी अर्थव्यवस्था और संस्कृति की आधारशिला हैं, उन्हें उनका खोया हुआ सम्मान दिलाकर ही हम दम लेंगे।”
प्रशासकीय इमारत (जय स्तंभ चौक) पर जब गोंदिया तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया, तो वहां मौजूद जनसैलाब ने संकल्प लिया कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है , अब देखना यह है कि दिल्ली की सत्ता इस ‘सात्विक विद्रोह’ पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

रवि आर्य

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