Published On : Thu, Oct 10th, 2019

सत्ता से पैसा – पैसे से सत्ता का फंडा, इस मर्तबा दिख रहा कमजोर

जनता जिसकी.. जीत उसकी

गोंदिया। बाबू ये पब्लिक है, पब्लिक!! ये जो पब्लिक है, ये सब जानती है.. । जी हाँ दोस्तों इसे भारतीय लोकतंत्र की खूबसुरती ही कहेंगे कि, आज का पढ़ा-लिखा मतदाता बेहद जागरूक हो चला है। यहां जनता का वोट निर्णायक होता है याने जनता जिसकी, जीत उसकी..।
आज का वोटर नेताओं के हर हथकंडे को अच्छी तरह से पहचानता है लिहाजा जिले के बदलते राजनीतिक परिवेश में जहां पैसे से सत्ता पाना ही राजनेताओं का मकसद हो चला हो, चाहे इसके लिए फिर नैतिकता व सिद्धांतों की बली ही क्यों न देनी पड़े? इन सभी पैतरों से आज का मतदाता वाकिफ है और इस बार के चुनाव में गोंदिया का सियासी म़िजाज कुछ बदला-बदला सा दिखायी देता है।
हमने गांव से लेकर शहर तक कई मतदाताओं के मन को टटोलने का प्रयास किया, हमारा आंकलन कहता है इस बार धनशक्ति पर जनशक्ति भारी पड़ती दिखायी दे रही है याने सत्ता से पैसा और पैसे से सत्ता का फंडा इस मर्तबा कमजोर दिख रहा है।

गोंदिया सीट पर परिवर्तन की लहर


जिसकी कोई नीति ना हो, उसी को राजनीति कहते है..? दरअसल कुछ राजनेताओं ने ऐन-केन सत्ता पाना ही अपना अहम बना लिया है।
जिले की गोंदिया , तिरोड़ा सीट पर इस चुनाव में कुछ एैसा ही दृष्य उभरकर सामने आया है जहां अवसरवादी 2 नेताओं ने अपनी जीत सुनिश्‍चित करने के लिए पाटीर्र् बदली है और चुनावी रणभूमि में दुसरे सिम्बाल से भाग्य आजमा रहे है। वहीं आमगांव विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट हाथ से फिसल जाने के बाद पूर्व विधायक रामरतन बापू राऊत ने निर्दलीय दुकान सजा ली है। गत 27 वर्षों से कांग्रेस पार्टी का खुद को निष्ठावान कार्यकर्ता बताने वाले विधायक गोपालदास अग्रवाल ने मंत्रीपद पाने की लालसा तथा अपने बेटों का राजनीतिक भविष्य संवारने के लिए मुख्यमंत्री के हाथों भाजपा प्रवेश कर लिया और बीजेपी आलाकमान ने गोंदिया के समर्पित पार्टी कार्यकर्ताओं की भावनाओं को दरकिनार कर लाख विरोध के बावजूद आयातित नेता को अपना प्रत्याक्षी घोषित किया है लिहाजा टिकट कटने से नाराज विनोद अग्रवाल ने खुद को जनता का उम्मीदवार घोषित करते हुए हजारों की भीड़ के साथ निर्दलीय पर्चा दाखिल कर लिया और वे चाबी चुनाव चिन्ह से रणभूमि में डटे है नतीजतन गोंदिया सीट पर चुनाव असली बीजेपी बनाम- नकली बीजेपी का हो गया है तथा अब जनशक्ति विरूद्ध धनशक्ति की लड़ाई में आगे बढ़ता जा रहा है? इस सीट पर कांग्रेस पार्टी ने अमर वराड़े को पंजा चुनाव चिन्ह से उम्मीदवार बनाया है तथा प्रफुल पटेल व नाना पटोले ने कार्यकर्ताओं की सभा लेकर उनके हाथ मजबूत करने का आव्हान किया है।

दलबदल से तिरोड़ा की जनता में रोष

तिरोड़ा सीट पर पार्टी टिकट कटने के बाद भाजपा के पुराने नेता व पूर्व सांसद खुशाल बोपचे ने पुत्र मोह की चाह में पार्टी छोड़ दी और तड़के 3 बजे एनसीपी नेता प्रफुल पटेल ने उन्हें तथा उनके पुत्र रविकांत (गुड्डू) बोपचे को राष्ट्रवादी कांग्रेस में प्र्रवेश देकर तिरोड़ा सीट से घड़ी चुनाव चिन्ह की उम्मीदवारी सौंप दी, लिहाजा कांग्रेस-राष्ट्रवादी गठबंधन के टिकट की आस लगाए बैठे पूर्व विधायक दिलीप बंसोड़ ने एनसीपी को सलाम नमस्ते कर दिया और बतौर निर्दलीय नामांकन दाखिल कर वे अलमारी (कपाट) चुनाव चिन्ह से मैदान में डटे है। सनद रहे गत विधानसभा चुनाव में भी दिलीप बंसोड़ ने 40 हजार 060 वोट हासिल कर एनसीपी का खेल बिगाड़ दिया था और राजलक्ष्मी तुरकर इसे हार का मुंह देखना पड़ा और एनसीपी तीसरे नंबर पर चली गई। इस मर्तबा ऊंट किस करवट लेगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

हर बड़े नेता को है अपनी साख बचाने की चिंता

विधायक गोपालदास अग्रवाल के पार्टी बदलने तथा बीजेपी से चुनाव लड़ने की घोषणा के साथ गोंदिया जिले के राजनीतिक समीकरण ही बदल चुके है। अगर वे चुनाव जीत जाते है तो उनका मंत्री बनना निश्‍चित है और एैसे में गोंदिया-भंडारा जिले से किसी एक नेता को ही मंत्री मंडल में जगह मिल सकती है? मौजुदा पालकमंत्री डॉ. परिणय फुके की अपनी चिंता यह है कि, उन्हें मंत्रीपद की कुसीर्र् खतरे में पड़ती नजर आ रही है? हालांकि वे अब जनता के बीच से जीतकर जाने की तैयारी में जुटे है और सिलेक्टेड से इलेक्टेड का तमगा हासिल करने हेतु वे साकोली विधानसभा सीट पर नाना पटोले से दो-दो हाथ करने हेतु पहुंच गए है लेकिन विधायक गोपालदास के मुख्यमंत्री से करीबी रिश्ते क्या परिणय फुके को मंत्री बनने देंगे? इस बात की चिंता फुके समर्थकों को भी सता रही है। एैसे में चुनाव के अंतिम दौर में नेता का इशारा मिलने पर वे गोंदिया सीट पर क्या गुल खिलाएंगे, यह देखना होगा?
नाना पटोले को अच्छी तरह से पता है कि, वे अगर चुनाव जीत भी गए तो भी कांग्रेस-राष्ट्रवादी गठबंधन की कहीं से सरकार बनती दूर-दूर तक दिखायी नहीं दे रही है और वे सिर्फ विधायक बनकर ही रहेंगे एैसे में उनकी चिंता भी विधायक गोपालदास अग्रवाल के मंत्री बन जाने को लेकर है। अब नाना पटोले के गोंदिया में सक्रिय छावा संग्राम परिषद व ओबीसी संगठन के सदस्य अपनी क्या भूमिका निभाते है, यह देखना भी दिलचस्प होगा?
उल्लेखनीय है कि, नाना पटोले ने 7 अक्टू. को प्रितम लॉन में कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करते कहा- जब गोपालदास अग्रवाल के हाथ में जिले की कांग्रेस का नेतृत्व था तब उन्होंने पुरी कांग्रेस को भय में रखा हुआ था और कार्यकर्ताओं पर मनमानी पूर्वक निर्णय थोपे जा रहे थे लेकिन अब बाजी पलट गयी है। चुनाव परिणाम बताएंगे एैसी सौदेबाजी करने वाले नेताओं का हश्र क्या होता है?

प्रफुल पटेल ने 7 अक्टू. को प्रितम लॉन की इसी सभा में संबोधित करते कहा- गोपालदास अग्रवाल ने सिर्फ कांग्रेस को ही नहीं बल्कि राष्ट्रवादी कांग्रेस को भी कदम-कदम पर धोखा देने का काम किया? लिहाजा अब गोंदिया सीट पर प्रफुल पटेल का इशारा क्या होता है? इस पर भी काफी कुछ हार-जीत का परिणाम निर्भर करता है। यहां बता दें , कि एनसीपी नेता व पूर्व विधायक राजेंद्र जैन की एमएलसी चुनाव को लेकर गोपालदास अग्रवाल से अदावत चल रही है क्योंकि उन्होंने अपने बेटे को जैन के खिलाफ मैदान में उतारा था जिससे उनको हार का मुंह देखना पड़ा? अब उनके समर्थक क्या गुल खिलाएंगे इस पर भी निगाहें टिकी हुई है? कुल मिलाकर यहीं कहा जा सकता है गोंदिया सीट पर जीत नहीं आसां.. बस इतना समझ लिजीए..?