
गोंदिया। ईंधन की आसमान छूती कीमतों और चौतरफा महंगाई के खिलाफ आज बुधवार 27 मई को गोंदिया जिला कांग्रेस कमेटी ने आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। स्थानीय जयस्तंभ चौक पर कांग्रेसियों ने केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ जमकर ‘गर्जना’ की और पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को आम जनता के साथ खुली ‘लूट’ करार दिया। कांग्रेस ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि बढ़ी हुई कीमतें तुरंत वापस नहीं ली गईं, तो आंदोलन और उग्र होगा।
11 दिन में 8 रुपए की मार, आम आदमी का बिगड़ा बजट
प्रदर्शनकारी कांग्रेसियों ने आंकड़ों के साथ सरकार को घेरते हुए कहा कि पिछले महज 11 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल के दामों में प्रति लीटर 8 रुपये की भारी वृद्धि झोंक दी गई है। सोमवार को ही पेट्रोल में *2.61 रूपए और डीजल में 2.71 रूपए प्रति लीटर का करंट लगा है, जो पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में चौथी बड़ी बढ़ोतरी है।

प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाते कहा-ईरान-अमेरिका-
इजरायल संघर्ष की आड़ लेकर सरकार अपनी नाकामी छुपा रही है। इस अंतरराष्ट्रीय तनाव का बहाना बनाकर पहले से आर्थिक तंगी झेल रही जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ लाद दिया गया है , इस मूल्यवृद्धि का असर सिर्फ गाड़ियों तक सीमित नहीं है
महंगी माल ढुलाई पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो गया है, जिससे रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुएं , किराना-सब्जियां आम आदमी की पहुंच से दूर हो रही हैं।
खेती किसानी ठप्प, संकट में अन्नदाता
खेती के सीजन में ट्रैक्टर और मशीनों के लिए डीजल सबसे जरूरी है। कई इलाकों में डीजल की आपूर्ति बाधित होने से खेती का काम ठप पड़ रहा है, जिससे भविष्य में कृषि उत्पादन घटने और भुखमरी-महंगाई बढ़ने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
यूपीए शासनकाल से तुलना करते हुए कांग्रेस ने मोदी सरकार के दावों की धज्जियां उड़ाते सीधे आंकड़े सामने रखे ,
मनमोहन सिंह (यूपीए राज) में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बावजूद जनता को राहत देते हुए ईंधन के दाम 72 रूपए प्रति लीटर से नीचे रखे गए थे।
जबकि मोदी सरकार (NDA राज) के अधिकांश कार्यकाल में कच्चा तेल महज 65 से 70 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहा, लेकिन इसके बावजूद जनता की जेब काटते हुए पेट्रोल 95 से 100 रुपए प्रति लीटर बेचा जाता रहा ।
43 लाख करोड़ तेल कंपनियों की जेब में !
कांग्रेस का सीधा आरोप है कि पिछले 12 वर्षों में मोदी सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में 38 प्रतिशत और डीजल की कीमतों में 62 प्रतिशत का बेतहाशा इजाफा किया है।
पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी-भरकम टैक्स और एक्साइज ड्यूटी (उत्पाद शुल्क) लगाकर जनता से 43 लाख करोड़ रुपये की मोटी रकम तेल कंपनियों ने वसूली है। यही नहीं, सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने इस ताजा मूल्य वृद्धि के खेल से अकेले ही 12,400 करोड़ रुपये का मुनाफा कूट लिया है।
कांग्रेसियों ने भाजपा के शीर्ष नेताओं को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब यूपीए सरकार के समय चंद रुपयों की भी बढ़ोतरी होती थी, तो यही भाजपा नेता सड़कों पर छाती पीटते थे। आज जब जनता त्राहि-त्राहि कर रही है, तो ये सब ‘मौन व्रत’ धारण कर चुके हैं।
इस दौरान पेट्रोल पंपों पर लग रही लंबी कतारों को लेकर भाजपा नेताओं के बयानों की कड़ी निंदा की गई।
कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार अपनी नाकामियों और जिम्मेदारी से भागने के लिए ऐसे कोरे बहाने बना रही है।
SDO के जरिए अल्टीमेटम: तुरंत वापस लो बढ़ी कीमतें
प्रदर्शन के अंत में गोंदिया कांग्रेस पदाधिकारीयों ने उपविभागीय अधिकारी (SDO) के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति और सरकार को एक कड़ा ज्ञापन सौंपा। दिए प्रतिवेदन में मांग की गई है कि सरकार तत्काल संवेदनशीलता दिखाए, पेट्रोल-डीजल की बढ़ी हुई दरें तुरंत वापस ली जाएं और पूरे देश में ईंधन की सुचारू व निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
रवि आर्य







