
गोंदिया-भंडारा जिले के प्रसिद्ध नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्प से एक बेहद दुखद और रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आई है। जंगल की सुरक्षा में मुस्तैद एक वनकर्मी पर भालू ने अचानक ऐसा जानलेवा हमला बोला कि मौके पर ही उनकी दर्दनाक मौत हो गई। इस रूह कँपा देने वाली घटना का एक वीडियो फुटेज सामने आया है जिसने एक बार फिर वनकर्मियों की जमीनी सुरक्षा व्यवस्था, आपातकालीन संसाधनों और वन विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बंदरझरा बीट में शाम को मंडराया ‘काल’
यह दर्दनाक हादसा न्यू नागझिरा वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी के उमरझरी वनपरिक्षेत्र अंतर्गत आने वाली बंदरझरा बीट में 5 अगस्त (बुधवार) की शाम करीब साढ़े पांच बजे पेश आया। 45 वर्षीय वनरक्षक श्यामू महागू शरणागत अपने रूटीन के मुताबिक जंगल में नियमित गश्त (पेट्रोलिंग) पर निकले थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि घने जंगल के बीच मौत उनका इंतजार कर रही है। इसी दौरान अचानक झाड़ियों से निकले एक आक्रामक भालू ने उन पर सीधा और भयानक हमला कर दिया। हमला इतना खौफनाक और त्वरित था कि श्यामू शरणागत को संभलने तक का मौका नहीं मिला और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले हमले का एक वीडियो फुटेज भी अब सामने आ रहा है।
दर्दनाक मौत, सुरक्षा तंत्र पर उठे गंभीर सवाल
घटना की भनक लगते ही वरिष्ठ वन अधिकारियों और कर्मचारियों का अमला तुरंत मौके पर पहुंचा। पुलिस और वन विभाग की टीम ने घटनास्थल का पंचनामा कर आगे की तमाम कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इस हृदयविदारक घटना से पूरे वन विभाग में शोक की लहर दौड़ गई है। विभाग ने वनरक्षक शरणागत की मौत पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को हर संभव मदद और राहत देने का आश्वासन दिया है।बहरहाल, इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर संवेदनशील और खतरनाक जंगल क्षेत्रों में अपनी जान जोखिम में डालकर तैनात रहने वाले वनकर्मियों की सुरक्षा पर बड़े सवाल दाग दिए हैं।
वन्यजीव विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि जंगलों में जान हथेली पर लेकर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों के लिए पर्याप्त और आधुनिक सुरक्षा उपकरण अनिवार्य होने चाहिए।आधुनिक संचार प्रणाली और बचाव दल की तैनाती तुरंत की जानी चाहिए।वनकर्मियों के लिए जोखिम प्रबंधन और नियमित प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाओं को धरातल पर और ज्यादा मजबूत करने की सख्त आवश्यकता है।
ग्रामीण और किसानों में फैला खौफ
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है , इससे पहले भी वन विभाग के जांबाज कर्मचारियों पर वन्यजीवों के हमले की कई दुखद घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में अब केवल जंगलों की सुरक्षा में दिन-रात जुटे वनकर्मियों की ही नहीं, बल्कि व्याघ्र प्रकल्प से सटे गांवों में रहने वाले आम नागरिकों, किसानों, विद्यार्थियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी भारी चिंता और डर का माहौल बन गया है।
वनरक्षक श्यामू शरणागत की असमय मौत ने पूरे महकमे को आईना दिखा दिया है ।अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि वन विभाग इस त्रासदी से सबक लेकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस और कड़े कदम उठाता है।
रवि आर्य
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