नागपुर: उपराजधानी में पुलिस आयुक्तालय के 50 वर्ष पूरे हो गये। इन वर्षों में अपराध के बदलते स्वरूप और जांच के हाईटेक बदलाव को नागपुर पुलिस ने यादगार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए शहर पुलिस का एक दल पुरानी यादों को संकलित करने के काम में जुट गया है।
गौरतलब है कि विदर्भ सहित मध्यप्रदेश के कुछ भाग सीपी एंड बेरार प्रांत का था। 1960 में महाराष्ट्र राज्य का निर्माण हुआ। उस समय नागपुर सहित विदर्भ महाराष्ट्र में शामिल हुआ। देश के हृदय स्थल नागपुर की जनसंख्या और अपराध को ध्यान में रखते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री वसंतराव नाईक के मंत्रिमंडल ने नागपुर में पुलिस आयुक्तालय शुरू करने का निर्णय लिया था। प्रशासनिक औपचारिकता पूरी हो जाने के बाद 1 जुलाई 1965 को नागपुर में पुलिस आयुक्तालय शुरू हुआ। मुगवे उस समय नागपुर के पहले पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त हुए थे।
वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी के अनुसार उस समय नागपुर में 10 पुलिस थाने और तीन जोन थे। लगभग 60 से 70 अधिकारी और 600 से 700 पुलिस कर्मचारियों का बल था। गिने-चुने वाहन और अन्य सुविधाओं पर नागपुर पुलिस का कामकाज शुरू हुआ। जनसंख्या के साथ-साथ 1975 से अपराध में भी बढ़ोत्तरी हुई। 1992 के बाद शहर में अपराध का स्वरूप बदला। एक ओर जातीय और दूसरी ओर आपराधिक टोलियों की चुनौती पुलिस के सामने थी।दस वर्ष बाद स्थानीय अपराध को अवैध धंधों का साथ मिला। 2004 से उपराजधानी में अपराध जमीन के धंधे से जुड़ गया। महिलाओं से संबंधित अपराध भी बढे। दूसरे राज्यों से नागपुर से जाने वाले शस्त्र और मादक पदार्थ की तस्करी तथा नागपुर के आसपास के परिसर में नक्सलवादी और सिमी के रूप में आतंकवाद भी पुलिस के लिए एक चुनौती बन गया। यही नहीं हाईटेक अपराध ने भी नागपुर में पैर पसार लिए.
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