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    Published On : Thu, Nov 7th, 2019
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    प्रशासकीय इमारत की ‘स्मार्ट टॉयलेट’ दे रहा दुर्घटनाओं को आमंत्रण

    कागजों पर कई अवार्ड हासिल करने वाली मनपा के नई इमारत की दुर्दशा जब इतनी ख़राब तो ये शहर कैसे बनाएंगे ‘स्मार्ट’

    नागपुर महानगरपालिका सम्पूर्ण शहर को ‘स्मार्ट’ बनाने का दावा करते-करते नहीं थकती लेकिन इनके नई प्रशासकीय इमारत की दुर्दशा अत्यंत दयनीय हैं.इसके शौचालय दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे.कड़वा सत्य हैं जब तक दुर्घटना घटती नहीं तब तक सरकारी विभाग सक्रिय नहीं होती।क्या इसी तर्ज पर मनपा भी किसी दुर्घटना का राह तक रही.फिर नामुमकिन हैं स्वच्छ भारत मिशन की रैंकिंग में पहले १० शहरों में स्थान पाना।

    मनपा प्रशासन इन दिनों कचरा मुक्त शहर,स्वच्छता,थूंकने वालों पर कार्रवाई,खुले में शौच,सार्वजानिक जगहों का दुरूपयोग करने वालों पर कार्रवाई और साफ़-सुथरा सार्वजानिक शौचालय आदि मामलों पर गंभीरता प्रदर्शित कर रही.लेकिन प्रशासन और आला अधिकारियों के मंसूबों पर जोनल स्वास्थ्य विभाग पानी फेर रहा.क्यूंकि जोनल अधिकारी,जमादार,निरीक्षक कचरा फ़ैलाने के उल्लंघनकर्ताओं से ‘सेट ‘ है.इन्हें इसके बदले मासिक मानधन मिलता हैं.इसका जीता-जगता उदहारण देखना हो तो इन सभी का जोनल स्तर पर बदली का आदेश निकाल कर देखो……….इनके लिए मनपा से जुड़े प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष सफेदपोशों ने आदेश रद्द करवाने के लिए ‘नाक में दम’ कर दिया तो कहना !

    कचरा मुक्त शहर – ज़ोन अंतर्गत कचरा संकलन सम्पूर्ण परिसरों की साफ़-सफाई नहीं हो रही.प्रभाग निहाय नगरसेवकों के मकान के आसपास और उनके निर्देशानुसार क्षेत्र में साफ़-सफाई कर रोजाना अपना पल्ला झाड़ लिया जा रहा.शेष परिसर में साफ़-सफाई के मामले पर कर्मचारियों की कमी बतलाई जाती हैं.

    स्वच्छता- मनपा में स्वच्छता के मायने काफी अलग हैं.सिर्फ कचरा उठाना ही मनपा में स्वच्छता कहलाता हैं.अक्सर मनपा संपत्ति कर विभाग के सर्वे अनुसार मनपा हद्द में साढ़े ६ लाख घर/फ्लैट/खुले प्लाट/दुकानें हैं.इनमे से ६० से ७०% नागरिकों को ही मनपा की सेवाएं मिल रही.शेष के कचरे घर के बहार यूँ ही फेंके जा रहे,गीले होने से दुर्गन्ध फैला रहे या फिर सूखे होने से जला दिए जा रहे.

    थूंकने वालों पर कार्रवाई- मनपा प्रशासन की विशेष दल शहर में सार्वजानिक स्थल पर थुंकते पकडे जाने पर जुर्माना वसूला जाता हैं.मनपा प्रशासन के मुख्यालय में कार्यरत कम से कम ५०% कर्मी खर्रा कहते हैं और मुख्यालय अंतर्गत कोई भी इमारत हो,कोई भी फ्लोर हो,उसका कोना-कोना लाल कर दिया गया.क्या इसकी सफाई कभी होती हैं,क्या इन पल-पल के थूंकने वालों पर कार्रवाई होती हैं,ऐसे नुकसानदेह पदार्थ का सेवनकर्ताओं पर कभी रोक लगाई गई…… जवाब न ही मिलेंगा। सिर्फ जो कुछ नहीं कर सकते,उनसे जाने-अनजान में थूंकने पर जुर्माना वसूला जा रहा.

    खुले में शौच- शहर के बाहरी भागों के खुले इलाकों में आज भी बड़ी संख्या में खुले में शौच का चलन हैं.इन पर जोनल कार्रवाई जस्ता पहुँचता नहीं,इनसे चर्चा कर शौचालय के इस्तेमाल पर जोर नहीं दिया जाता।सिर्फ शौचालय के नाम पर सरकारी निधि को स्वाहा की जा रही.ऐसे-ऐसे जगहों पर शौचालय का निर्माण किया गया जो न सरकारी हैं और न ही मनपा की.इतना ही नहीं ‘रेरा’ नियमानुसार प्रत्येक बिल्डर को नियमनुसार गन्दा पानी,मल के लिए बिल्डिंग परिसर में ही उचित व्यवस्था की जाने की शर्त हैं,लेकिन ऐसा हो नहीं रहा.जैसे कि मंगलवारी ज़ोन के तहत वॉक्स कूलर के बाजु एक बिल्डर ने बिल्डिंग का पानी निकासी के लिए समीप के बरसाती नाले में भूमिगत पाइप बिछा दी गई,शिकायत मनपा के आला अधिकारी से की गई लेकिन पिछले २ माह से समस्या जस के तस हैं.

    मनपा या सार्वजानिक शौचालय साफ़ नहीं रहती – मनपा मुख्यालय या जोनल कार्यालयों या फिर शहर की सार्वजानिक शौचालय आदि जैसा साफ़ सुथरा होना चाहिए वैसा होता नहीं,अर्थात घर जैसा ‘फीलिंग’ नहीं आती इसलिए अक्सर खुले में इस्तेमाल कर शहर को प्रदूषित किया जा रहा.और तो और शहर की जनसंख्या के हिसाब से सार्वजानिक शौचालय नहीं होने से भी समस्याएं उत्पन्न हो रही.

    क्या मनपा प्रशासन उक्त हकीकत को सुझाव के अंदाज से स्वीकार करेंगी,या फिर ‘एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल देंगी’


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