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    Published On : Mon, Nov 26th, 2018

    विकास या विनाश ?फुटाला तालाब मार्ग निर्माण के लिए 500 वृक्षो की बलि लेना कितना जायज,पर्यावरणवादियों का सवाल

    नागपुर – क्या विकास,विनाश के रास्ते पर चलकर ही संभव है। यह सवाल इन दिनों हर नागपुरवासी के मन में उठ रहा है। सड़क निर्माण के लिए 500 वृक्षों की बलि लेने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। शहर के कुछ पर्यावरणवादी फुटाला तालाब के लिए बनाये जाने वाले इस पर्यायी मार्ग के विरोध में अदालत जाने की तैयारी में है। चेंज डॉट ओआरजी नाम की वेबसाईट पर कैम्पेन चलाया जा रहा है। लोगो से समर्थन जुटाया जा रहा है। सवाल मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा जा रहा है। पर्यावरणविद जयदीप दास इस मुहीम के अगुवा है मार्ग के निर्माण के लिए पेड़ों की बलि दिए जाने से बचाने के लिए उन्होंने मुहीम की शुरुवात की है। उनका कहना है कि न तो इस नए मार्ग की आवश्यकता है और न ही पेड़ों को काँटे जाने की। अगर फुटाला तालाब के मार्ग को बंद भी किया रहा है तब भी कई पर्यायी मार्ग मौजूद है जिसने आवागमन किया जा सकता है।

    दरअसल भरत नगर से तेलनखेड़ी हनुमान मंदिर के बीच पर्यायी मार्ग बनाने की तैयारी में प्रसाशन जुटा है। दलील दी जा रही है कि फुटाला तालाब से बगल से निकलने वाले इस मार्ग के बंद होने की वजह से यातायात व्यवस्था प्रभावित न हो इसलिए नए मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 500 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा यह मार्ग पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ की हरीभरी ज़मीन के बीच से जाएगा। इसी प्रस्तावित मार्ग पर पीकेवी का सिट्रम रिसर्च सेंटर भी है। पर्यवारणवादियों के मुताबिक इस मार्ग के लिए लगभग 500 वृक्ष तोड़े जायेगे। अनुमान है कि वृक्षों की संख्या बढ़ भी सकती है

    इस मार्ग के निर्माण के लिए शहर में प्रमुख तौर से घूमने की जगह के रूप में मौजूद फुटाला तालाब के मौजूदा मार्ग को एक साल के लिए पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण के नाम पर एक वर्ष के लिए बंद किया जायेगा। तालाब के किनारे टनल रोड और दर्शक दीर्घा बनाने का प्लान है। यह काम एक महीने में शुरू हो जायेगा और इसकी जिम्मेदारी महा मेट्रो को सौंपी गई है। गौरतलब हो की शहर में सीमेंट रोड,पुल और खुद मेट्रो का काम जोरों शोरो से शुरू है। जिससे शहर में प्रदुषण का स्तर बढ़ा हुआ है। प्रदुषण को कम करने का काम हरियाली से होता है। ऐसे में अनावश्यक मार्ग के निर्माण के लिए सैकड़ों वृक्षों की बलि देना कहाँ तक जायज है यह सवाल नागपुर के नागरिक कर रहे है।

    जयदीप दास सवाल उठा रहे है कि आखिर इस मार्ग की आवश्यकता ही क्या है ? मौजूदा मार्ग का इस्तेमाल वायुसेना नगर,सेमिनरी हिल्स या इसके आसपास रहने वाले लोग करते है। उनके पास विकल्प के रूप से वेस्टर्न कोलफील्ड रोड मौजूद है। इसके साथ ही हजारी पहाड़,काटोल रोड और दाभा मार्ग का भी विकल्प है। जिन वृक्षों को काँटने का प्रस्ताव है वह लगभग 50 वर्ष पुराने है। हरियाली भरे ईलाके में पशु पक्षी भी रहते है। ऐसे में इन पेड़ो को काँटा जाना। पंक्षियों से उनका घरौंदा छीनने जैसा है। जाहिर है ये पेड़ शहर के कुछ ध्वनि और वायु प्रदूषण को भी नियंत्रित करते होंगे। दास के मुताबिक इन पेड़ों के कटने का खामियाजा वर्षो-वर्ष चुकाना पड़ेगा।

    जिन पेड़ो को यहाँ से काँटे जाने का प्रस्ताव है उनमे से प्रत्येक पेड़ लगभग 10 से 12 व्यक्तियों के लिए ऑक्सीजन का निर्माण करते है। अर्थशास्त्री प्रो निशि मुखर्जी के मुताबिक जो कारण पेड़ों को काँटने को लेकर सामने प्रस्तुत हो रहा है। वह तथ्यात्मक नहीं है। अपना आकलन प्रस्तुत करते हुए वो बताती है कि वित्तीय अर्थव्यवस्था की सोच सिर्फ विकास को देखती है हमारा मानना है की अच्छी सड़के ही विकास का पैमाना है लेकिन पेड़ों से जुड़े नुकसान को किसी भी रूप में आंका नहीं जा सकता। हमें इस मसले को सामाजिक और मानवीय दृश्टिकोण से देखने की आवश्यकता है।

    इस मार्ग को बनाने की जिम्मेदारी महा मेट्रो को सौंपी गई है। सार्वजनिक निर्माण विभाग और एनआयटी के आकलन के मुताबिक फुटाला तालाब मार्ग पर भारी यातायात की समस्या से छुटकारा पाने के लिए नए सिरे से मार्ग का निर्माण किया जाये। इसी अनुसार यहाँ टनल रोड बनाने का प्लान बनाया गया है। इस काम की जिम्मेदारी महा मेट्रो को सौंपी गई है। इस बारे में महा मेट्रो के प्रबंध निदेशक बृजेश दीक्षित से पूछने पर उन्होंने बताया कि इस काम की प्लानिंग में हमारा कोई रोल नहीं है। हमें जो जिम्मेदारी मिली है उसे पूरा किया जायेगा। वृक्षों के कंटने का दुःख है। कोशिश रहेगी की पेड़ों को काँटने की बजाय उन्हें अन्य जगह रीप्लांट किया जाये। पुने में यह प्रयास किया जा चुका है। जहाँ अच्छा अनुभव रहा है। रीप्लांट किये गए 95 फ़ीसदी वृक्ष जीवित है।

    बहरहाल जयदीप दास ने नागपुर की महापौर नंदा जिचकार,महा मेट्रो के प्रबंध निदेशक बृजेश दीक्षित,और पीकेवी के कुलगुरु को 7 नवंबर को एक पत्र लिखा है। जिसमे उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया है। जयदीप ने इसी मसाले पर हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की है।


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