Published On : Thu, Jun 4th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

गोंदिया: बंदूक छूटी- शहनाई बजी! दो खूंखार नक्सलियों ने लिए सात फेरे ,पुलिस बनी घराती-बाराती, सजा अनोखा मंडप

सरेंडर के बाद नया सफर: जंगल की जिंदगी छोड़ बसाया अपना घर
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गोंदिया। कभी हाथों में AK-47 थामकर जंगलों में खौफ का पर्याय बने दो बड़े माओवादी चेहरों ने अब हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में नई जिंदगी की शुरुआत की है। वर्षों तक अनिश्चितता और संघर्ष के साये में जीवन बिताने वाले छत्तीसगढ़ के ‘गोलू’ और मध्य प्रदेश की ‘संगीता’ अब हमेशा-हमेशा के लिए एक-दूसरे के जीवनसाथी बन गए हैं।
31 मई को गोंदिया पुलिस मुख्यालय के ‘प्रेरणा सभागार’ में आयोजित इस अनोखे विवाह समारोह ने हर किसी को भावुक कर दिया।
यहां पुलिस अधिकारी सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था संभालते नहीं दिखे, बल्कि घराती और बाराती की भूमिका निभाते हुए इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने।

हिंसा हारी मोहब्बत जीती… अब गृहस्थी के सिकंदर

शादी के बंधन में बंधे दूल्हा-दुल्हन कोई सामान्य नागरिक नहीं, बल्कि कभी माओवादी संगठन की अहम कड़ियां रहे हैं।
दूल्हा पांडू पुसू वड्डे उर्फ गोलू (37 वर्ष) छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के पाखंजूर क्षेत्र का निवासी है। वह सीपीआई (माओवादी) संगठन में दर्रेकसा क्षेत्र के डिविजनल कमेटी सदस्य (DVCM) जैसे महत्वपूर्ण पद पर सक्रिय था।
वहीं दुल्हन सैवंती रायसिंग पंधरे उर्फ संगीता (36 वर्ष) मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर तहसील अंतर्गत ग्राम राशीमेटा की निवासी है। वह दर्रेकसा एरिया कमेटी में एरिया कमेटी सदस्य (ACM) के रूप में सक्रिय भूमिका निभा रही थी।
जहां कभी जंगलों में गोलियों की आवाज गूंजती थी, वहीं अब इन दोनों ने अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे ने कहा कि यह विवाह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवर्तन, पुनर्मिलन, विश्वास और शांतिपूर्ण भविष्य की आशा का उत्सव है।

खूनी रास्तों से ‘वैवाहिक’ सफर तक ‘महा-परिवर्तन’

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दोनों ने लंबे समय तक हिंसा और भय के माहौल में जीवन बिताने के बाद 28 नवंबर 2025 को गोंदिया पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। जिले में अब तक 15 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जिन्हें पुलिस कॉलोनी में सुरक्षित रखा गया है।
सम्मानजनक जीवन जीने, समाज में पुनर्स्थापित होने और अपना परिवार बसाने की इच्छा ने इन्हें हथियार छोड़ने के लिए प्रेरित किया। पुलिस अधीक्षक गोरख भामरे की अनुमति तथा प्रभारी पुलिस अधीक्षक अभय डोंगरे के मार्गदर्शन में इस भावनात्मक विवाह समारोह का आयोजन किया गया।

मुख्यधारा में वापसी: नए जीवन की नई शुरुआत

सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत अब इस नवदंपती के जीवन को नई दिशा देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन द्वारा इनके आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक खाते और अन्य आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं।
साथ ही इन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगारोन्मुखी एवं स्किल डेवलपमेंट प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे सम्मानपूर्वक समाज में अपनी नई पहचान स्थापित कर सकें।

जंगलों में छिपे नक्सलियों को बड़ा संदेश

गोंदिया पुलिस मुख्यालय में संपन्न हुई यह शादी उन नक्सलियों के लिए एक बड़ा संदेश मानी जा रही है, जो आज भी हिंसा के रास्ते पर भटक रहे हैं। यह घटना साबित करती है कि यदि वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटते हैं, तो सरकार और समाज उन्हें सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का अवसर देने के लिए तैयार हैं।

इस आयोजन को सफल बनाने में पुलिस निरीक्षक प्रमोद भातनाते, राजेश सरोदे, श्रीकांत हत्तीमारे, मल्लिकार्जुन वासुदेव, सी-60 कमांडो पथक तथा नक्सल सेल के अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बहरहाल -कभी जंगलों में दहशत के पर्याय रहे गोलू और संगीता ने साबित कर दिया कि बंदूक से नहीं, भरोसे और प्यार से भी नई जिंदगी जीती जा सकती है।

रवि आर्य

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