Published On : Thu, Jun 2nd, 2022
By Nagpur Today Nagpur News

खाद्य आपूर्ति विभाग के निविदा में धांधली !

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– सुविधानुसार नियम व शर्तें बनाई ताकि चुनिंदा ठेकेदार वर्ग ही भाग ले सके

नागपुर – राज्य के खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग ने नियम और शर्तें तैयार की हैं ताकि केवल कुछ लोग ही निविदा प्रक्रिया में भाग ले सकें और पुराने ठेकेदारों को निर्धारित समय के अनुसार माल ढुलाई के ठेके दिए गए हैं।उक्त अनियमितिता को छिपाने के लिए नियमों की आड़ ली जा रही हैं.

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खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग, उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा सरकारी सस्ती दुकानों तक खाद्यान्न पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्टिंग का ठेके दिए जाते हैं।गेहूं, चावल, दाल और चीनी नियमित आधार डिपो के माध्यम से अन्य जिलों से शहरी क्षेत्रों और जिले या तहसील क्षेत्रों में सरकारी सस्ते अनाज की दुकानों तक पहुँचाया जाता है। इसके लिए एक निविदा जारी की जाती है।

विभाग ने 2015 के बाद ठेकेदार को निर्धारित करने के लिए निविदा जारी नहीं की। 2015 में जिन्हें परिवहन का ठेका मिला था, उन्हें 2020 तक अतिरिक्त समय दिया गया था। इसके बाद महाविकास आघाड़ी सरकार ने 19 मई 2021 को निर्णय दिनांक 15 जनवरी 2021 के नियम एवं शर्तों के अनुसार निविदा जारी की।इसमें यह अनिवार्य किया गया था कि पिछले तीन वर्षों का अनुभव रखने वाला व्यक्ति इस निविदा प्रक्रिया में भाग ले सकता है। यानी 2015 में ठेका पाने वाले ही इस टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं। अब आरोप लगाया जा रहा है कि विभाग ने पुराने ठेकेदारों को फिर से ठेका देने के लिए ही इस शर्त को अनिवार्य कर दिया है।

उल्लेखनीय यह है कि विभाग ने खाद्यान्न की आपूर्ति के लिए 2015 में निविदाएं आमंत्रित की थी। वह तीन साल की थी। 2018 में दोबारा टेंडर जारी करना जरूरी था। हालांकि, पुराने अनुबंध को बढ़ा दिया गया था। फिर 2020 में टेंडर बुलाया गया।लेकिन इसे फिर से रद्द कर दिया गया। बाद में जनवरी 2021 में, सरकार के निर्णय से नियम और शर्तों में बदलाव किया गया और मई 2021 में निविदा बुलाई गई। इन शर्तों के चलते सिर्फ ठेकेदारों को 2015 के बाद दोबारा 2021 में ठेका मिला। ऐसा इसलिए है क्योंकि नए ठेकेदार के पास शर्तों के तहत तीन साल का अनुभव नहीं था।

एमओडीआई फाउंडेशन के अध्यक्ष महेश दयावान के अनुसार 2015 में ठेका पाने वालों की सेवा 2020 तक बनी रही। उसके बाद 2021 में जारी टेंडर में तीन साल का कार्य अनुभव रखने वाले ही टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। इसका मतलब है कि 2015 में परिवहन का ठेका दोबारा वर्ष 2021 में मिले इसलिए नियम व शर्तो में बदलाव किया गया था.

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