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    Published On : Wed, May 29th, 2019

    आग उगल रहा सूरज और भीषण उमस भरी गर्मी से लोग हो रहें परेशान

    नागपुर: जून 2018 से संपूर्ण बारिश के मौसम पिछले साल निसर्ग ने अपना मुंह मोड़ लेने कम बारिश के कारण काटोल तहसील सहित विदर्भ तथा संपूर्ण राज्य में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है जिस से पिछले वर्ष कम बारिश के पानी की लेवल कम होने से सभी इस वर्ष भीषण अकाल पड़ा हुआ है जिस वजह अभी चल रही भीषण गर्मी रोज सुबह आसमान से आग उगल रहे सूरज के साथ उमस भरी गर्मी ने लोगों का जनजीवन अस्वस्थ कर दिया है. वहीं इस वर्ष जनवरी महीने से गर्मी अपना रूख दिखाई दे रही है वहीं सुबह छह-सात बजे से शाम तक इस बात का ध्यान रखना पड़ता है कि इतनी भीषण गर्मी तथा उमस भरी मौसम रहात कैसे मिल सकता है जिससे के लिए घरों में लगायें गये कूलर तथा ऐसी भी कोई काम करते हुए नहीं दिखाई दे रहे हैं. वहीं जनवरी महीने से ही चिलचिलाती धूप सताने के बाद धूप छाव के मौसम के गर्मी अपना रूख दिखाई दे रही थी मंगर कुछ दिनों बाद से मौसम परिवर्तन करते हुए अपना उग्र रूप धारण कर रोज सुबह उठने के पहले घर से बाहर निकलने से पहले आसमान आग उगल हुए दिखाई देते रहा वही इस वर्ष कम बारिश के कारण पानी का भी हाहाकार मचा हुआ है जिस से पानी के लिए भी मारामारी चल रही वहीं अभी गर्मी के मौसम का आखिरी महिना चल रहा वहीं 25 मई से नवतपा प्रारंभ हुआ जिसके चलते अभी नवतपा के मौसम पारा 46.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है जिससे लोगों के में बडते टेंपरेचर दहशत निर्माण कर दिया है वहीं अभी नवतपा मौसम आग लगने लगीं हैं जिससे बीमारी के बडते रथयात्रा सामना लोगों करना पड सकता है।.

    अभी फिलहाल गत एक दो माह से सभी और रोजाना टेंपरेचर 45 के पार ही चल रहा है वहीं अभी 47 डिग्री तक कि रफ्तार से चल रहा है. रोज सुबह उठकर ऐसा लगता है कि जलती आग के हवाले है शरीर जिससे दोनों दिन आसमान से मानों आग के गोले ही टपक रहे हैं. अभी रोहीन नक्षत्र भी प्रारंभ हो गया है. नवतपा के पहले दिन से आग उगलती गर्मी ने न केवल लोगों का जीना मुहाल कर दिया बल्कि कई तरह की बीमारियों का प्रकोप बढा दिया है. रिकार्ड तोड़ गर्मी के कारण डायरिया, पीलिया शरीर में लूसतपना ( कमजोरी ), जलजनित बीमारीयों एलर्जी, सनबरन, पेट दर्द, डिहायड्रेशन और दिल के दौरे जैसी समस्याओं को लेकर अस्पतालों में पहुंचने वाले मरीजों की संख्या पिछले कुछ दिनों के दौरान कई गुना बढ़ गई है. शरीर को झुलसाती गर्मी दिल को भी घायल कर सकती है.
    चरम पर पहुंच गगर्मी हीट स्ट्रोक का कारण बन सकती है तो वही तेज धूप से परेशानी बढ़ सकती है. शरीर में पानी की कमी होने पर इसकी संभावना ज्यादा होती है. इसलिए पानी अधिक पीना चाहिए यदि उसके बाद भी कोई समस्या आए तो तत्काल चिकित्सक से करना चाहिए ऐसी जानकारी काटाेल के MD डॉ सचिन चिचे इन्होंने दी. बहुत अधिक समय तक तेज धूप या गर्मी में रहने पर रक्तचाप में गिरावट आ सकती है. उसी प्रकार वायु प्रदूषण बढऩे के कारण गर्मी के दिनों में दिल के मरीजों के लिए खतरे और बढ गए हैं. तपती गर्मी से दिल के दौरे अधिक पडऩे का मुख्य कारण डिहाइड्रेशन है जिसे लोग आम तौर पर नजरअंदाज करते हैं लेकिन यह जानलेवा बन सकता है. डिहाइड्रेशन में करीबन 6 से 8 घंटे तक यूरिन न लगने, मुंह सूखने, कमजोरी लगने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं डिहाइड्रेशन के कारण रक्त गाढ़ा हो जाता है जिससे अनियंत्रित रक्तचाप तथा मधुमेह रोगियों को दिल का दौरा पड़ने का खतरा होता है. डिहाइड्रेशन को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए कई बार डिहाइड्रेशन बहुत मामूली होता है जिसे लोग नजरअंदाज करते हुए दिखाई देते हैं लेकिन बाद में यह घातक बन सकता है. मामूली डिहाइड्रेशन होने पर अधिक मात्रा में लस्सी, शर्बत, दाल का पानी आम का पन्ना ग्लूकोज़ जैसी विभिन्न तरह तथा चीनी – नमक अथवा ओरल रिहाइडेशन साल्ट के घोल का सेवन करना चाहिए तीव्र निर्जलीकरण होने पर मरीजों को तत्काल अस्पताल में भर्ती करा कर इंजेक्शन तथा सलाईन ग्लूकोज़ तथा दवाई चढाने की जरूरत पड सकती है. ऐसी जानकारी काटाेल ग्रामीण अस्पताल के रूरल डॉ पंकज कराडे तथा डाॅ अमोल कंरागडे,, डॉ राकेश वानखेडे इन्होंने बताया कि चिकित्सकों का सुझाव है कि गर्मी के दिनों में अधिक से अधिक पानी पीना चाहिये।

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