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    Published On : Fri, May 10th, 2019

    खरीफ की फसल की किसानों ने शुरू की तैयारियां, काटोल में नियोजन कार्य पूरा

    काटोल: बारिश का सीजन शुरू होने से पहले किसानों ने ख़रीफ़ के सीजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं. इस वर्ष खरीफ फसल की बुआई के नियोजन के अनुसार काटोल तहसील में 61350 हेक्टर क्षेत्र में बुआई का अनुमान है. मौसम विभाग की जानकारी सही साबीत हुई तो इस वर्ष उम्मीद से अधिक बारीश होने का अनुमान लगाया जा रहा है.

    बीते वर्ष में खरिफ फसल 49418 हेक्टर क्षेत्र में बुआई की गई थी. जिसमे कपास,तुअर,सोयाबीन, उड़द, मूंग, ज्वार ,धान, गन्ना, सब्ज बागान, फुल खेती, फलखेती ,दलहन, तथा तिलहन आदी खरिफ फसलों की बुआई की थी. कपास की फसल पर विगत वर्ष भी गुलाबी रंग की बोंड इल्ली के प्रकोप के चतले किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है. सरकार के ओर से मुआवजे का भुगतान भी नही हुआ.

    इस वर्ष फिर किसान अपने खेती में खरिफ फसल के नियोजन में जूट गया है. यह जानकारी काटोल तहसील कृषी अधिकारी अशोक कन्नाके द्वारा दी गयी है. इसी प्रकार कोंढाली कृषी मंडल क्षेत्र में खरीफ के लिये फसलों के उत्पादन में उपयुक्त सही विधियां अपनाकर उत्पादन – लागत में कमी एवं प्रति इकाई उपज में वृद्धि की जा सकती है.

    अनुसंधान परिणामों से ज्ञात हुआ है कि अधिक उपज देने वाली किस्मों की उत्तम गुणवत्ता का स्वस्थ बीज, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, दक्ष खरपतवार प्रबंधन, समुचित जल, कीट एवं रोग प्रबंधन, उपयुक्त समय पर फसल की कटाई एवं मड़ाई तथा उपयुक्त भंडारण इत्यादि अपनाकर किसान भाई लागत कम करके उत्पादन में बढ़ोतरी कर सकते है. अतः फसलों के उत्पादन की आधुनिक वैज्ञानिक विधियों के विभिन्न पहलुओं को उद्धरित किया गया है. भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का हमेशा से ध्येय रहा है कि फसल उत्पादन की नवीनतम तकनीकों का विकास कर किसानों तक प्रभावी रूप से जल्द से जल्द पहुँचाए. यह मांग की गयी है. जिसपर कृषी उत्पादन के लिये सही जानकारी गांव के किसानों तक पहुंचाने का कार्य संबधित गांव के कृषी सहायकों कृषि मंडल अधिकारों के माध्यम से पहूंचकर किसानों की अधिक सहयोग की भुमिका कृषी विभाग की रहेगी यह जानकारी भी जिला कृषी अधिकक्षक मिलिंद शेंडे द्वारा दी गयी है ।

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