Published On : Mon, Jan 22nd, 2018

षड्यंत्रों से मात खाती फडणवीस सरकार

कांग्रेस नेता नारायण राणे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अल्टिमेटम दिया है कि उनकी सहनशीलता की सीमा खत्म होने से पहले उन्हें मंत्री बना दें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा है कि आज शिवसेना से भले ही अलग हैं, लेकिन संस्कार अब भी वही है। इस तरह के अल्टीमेटम इस बात की तरफ इशारा कर रही है कि महाराष्ट्र सरकार संकट की स्थिति में है। सकरार अपने षड्यंत्रों से मात खाती जा रही है।

आपको बता दें कि शिवसेना पिछले तीन साल से सरकार को अल्टिमेटम दे रही है और जनता उन अल्टिमेटम का हश्र देख रही है, ऐसे में एक और नया अल्टिमेटम महाराष्ट्र सरकार के लिए मुसीबत न खड़ी कर सकता है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के तमाम समर्थकों को लगता है कि महाराष्ट्र में उनके खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र रचा जा रहा है। फडणवीस समर्थकों का तर्क यह भी है कि मुख्यमंत्री को षड्यंत्र का शिकार बनाने की कोशिश इसलिए की जा रही है, क्योंकि वे जाति से ब्राह्मण हैं। कोपर्डी कांड के बाद जब राज्य में मराठा समाज के संगठित मोर्चे निकले, तब भी यह तर्क दिया गया था।

हाल ही में कोरेगांव-भीमा की घटना के बाद जब राज्य में जातीय हिंसा फैली, तब भी यही तर्क दिया जा रहा है। पता नहीं खुद फडणवीस अपने समर्थकों के ‘ब्राह्मण मुख्यमंत्री’ वाले तर्क से कितने सहमत हैं, किंतु वे यह तो मानने लगे हैं कि उनकी सरकार की छवि खराब करने के लिए षड्यंत्र रचे जा रहे हैं।

पिछले दिनों बीजेपी प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में कोरेगांव-भीमा की घटना को लेकर उन्होंने स्वयं कहा कि कोई है, जो जातीय हिंसा भड़का कर सरकार के खिलाफ षड्यंत्र रच रहा है। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि विपक्ष के नेताओं की पूरी ‘कुंडली’ अपने पास होने का दावा करने वाले मुख्यमंत्री राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे षड्यंत्रकारियों की ‘कुंडली’ से क्यों अनजान हैं। खासकर तब, जब गृह मंत्रालय खुद मुख्यमंत्री के अधिकार में हैं।

पूरे राज्य की पुलिस, पूरा का पूरा खुफिया तंत्र उनके अधीन है। फिर, फडणवीस सरकार षड्यंत्रों से मात क्यों खा रही है? क्या यह समझा जाए कि गृह विभाग पर मुख्यमंत्री की पकड़ कमजोर हो रही है! या फिर इस षड्यंत्र में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन पर कार्रवाई करना तो दूर, मुख्यमंत्री उनका नाम लेने का भी जोखिम नहीं लेना चाहते! या फिर मुख्यमंत्री अपनी सरकार को विफलताओं के आरोपों से बचाने के लिए अभी से बहाने गढ़ने में लग गए हैं।

फडणवीस इस चुनौती को समझ रहे हैं, इसलिए उन्होंने प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं को सचेत रहने को कहा, लेकिन इतने साल राजनीति में रहने के बाद फडणवीस इस बात को बेहतर तरीके से जानते हैं कि कार्यकर्ता खुद को कहता भले ही पार्टी का है, लेकिन कार्यकर्ताओं का बड़ा वर्ग कहीं न कहीं स्थानीय नेतृत्व के प्रति ही आस्थावान होता है।

अभिमन्यु शितोले
नवभारत टाइम्स  मे प्रकाशित