नागपुर : देश में आयातित दालें जहरीली होने की खबर पिछले चार महीनों से लोगों को आतंकित कर रही है. सरकार को इसकी जानकारी होने और जांच के आदेश देने के बावजूद अभी तक सरकार ने अपनी जांच का खुलासा नहीं किया है. अभी तक हवा में यही बात तैर रही है कि भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसआई) ने अपने अधिकारियों से देश में आयातित दालों की जांच पड़ताल करने का निदेश दिया है. लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि अभी तक यह बात सामने नहीं आई है कि जांच-पड़ताल में सामने क्या आया और अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई एडवाइजरी क्यों नहीं जारी की जा रही है.
आयातित दालों का आयात और बिक्री रोकने की मांग
इसी खबर के हवाले से दी होलसेल ग्रेन एन्ड सीड्स मर्चेंट्स असोसिएशन के महासचिव प्रताप मोटवानी ने सरकार से आयातित दालों का आयात तुरंत रोकने और देश में पहुंच चुकी आयातित दालों की बिक्री पर भी रोक लगाने की मांग की है. उन्होंने ट्वीट कर प्रधानमंत्री, केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान, वित्त मंत्री अरुण जेटली और विदेश व्यापार मंत्री सुरेश प्रभु ध्यान इस गंभीर मामले की ओर दिलाया है. साथ ही उन्होंने दलहन की पैदावार बढ़ाकर देश को आत्मनिर्भर बनाने की भी मांग की है.
उन्होंने अमेरिका की एक खबर के हवाले से बताया है कि अमेरिकी दालों की फसलों पर जहरीले रसायन के छिड़काव के कारण इसके सेवन से लोगों को कैंसर जैसी भयंकर बीमारी हो रही है. खबर में बताया गया है कि एक अमेरिकी स्कूल के कर्मचारी की यह शिकायत कि रसायन युक्त दाल खाने से कैंसर हो गया है, अमेरिकी अदालत ने उसकी यह शिकायत सुनवाई के लिए मंजूर कर लिया है.
30 जुलाई को ही लोकसभा में उठाया गया था यह मामला
उल्लेखनीय है कि पिछले 30 जुलाई को ही केंद्रीय खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने कहा था कि वह ऐसी आयातित दालों के विषय को देखेंगे जिन पर ग्लाइफोसेट नामक केमिकल का उपयोग हुआ हो. लोकसभा में शून्यकाल के दौरान बीजेडी के भतृहरि महताब ने इस विषय को उठाया था. उन्होंने कहा था कि देश में ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, म्यांमार समेत कुछ अफ्रीकी देशों से दालों का आयात हो रहा है. इनमें से कुछ दाल ऐसी है, जिसे उगाते समय ग्लाइफोसेट नाम के खरपतवारनाशक का इस्तेमाल किया गया है.
आयात नीति सख्त बनाने की उठी थी मांग
ग्लाइफोसेट को मनुष्यों के लिए हानिकारक माना जाता है. बीजेडी नेता ने मांग की थी कि देश की आयात नीति को सख्त बनाया जाना चाहिए ताकि जनता के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. इस पर केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने आश्वासन दिया था, कि हम इस विषय को देखेंगे, किसी भी स्थिति में लोगों का स्वास्थ्य खतरे में नहीं आना चाहिए.
ग्लाइफोसेट की वजह से मॉन्सेंटो पर चल रहा है मुकदमा
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लाइफोसेट को कैंसर के संभावित कारणों में शामिल किया है. इस समय अमेरिका की मशहूर एग्रो केमिकल कंपनी मॉन्सेंटो पर ग्लाइफोसेट आधारित खरपतवारनाशक बनाने को लेकर सैकड़ों मुकदमे चल रहे हैं. मॉन्सेंटो ने 1970 के दशक में राउंडअप नामका खरपतवारनाशक बनाया था जिसमें मुख्य तत्व ग्लाइफोसेट था. हालांकि मॉन्सेंटो इस बात से इनकार करता रहा है कि ग्लाइफोसेट और कैंसर में कोई संबंध है.
अमेरिकी अदालत कर रही सुनवाई
पिछले जुलाई महीने की ही खबर है कि अमेरिकी शहर सैन फ्रांसिस्को की अदालत इस समय ड्वेन जॉनसन नाम के एक शख्स की अपील पर सुनवाई कर रही है, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि ग्लाइफोसेट वाले राउंडअप का इस्तेमाल करने की वजह से उन्हें घातक कैंसर हो गया है. जॉनसन को लसिका ग्रंथियों से जुड़ा कैंसर है, जिससे जल्द ही उनकी मौत हो सकती है.
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