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    Published On : Thu, Jan 25th, 2018
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    मनपा की हर स्कूल हो लालबहादुर शास्त्री हिंदी माध्यमिक और प्राथमिक शाला जैसी


    नागपुर: नागपुर महानगर पालिका की स्कूल को लेकर सभी के मन में आम तौर पर एक अव्यस्थित स्कूल की तस्वीर जहन में आती है. लेकिन शहर में मनपा की ऐसी कई स्कूले हैं. जो निजी स्कूल से भी बेहतर और अच्छी हैं. ऐसी ही एक स्कूल है हनुमान नगर की लालबहादुर शास्त्री हिंदी माध्यमिक शाला और प्राथमिक शाला. माध्यमिक स्कूल की स्थापना 1987 को हुई थी तो वहीं प्राथमिक स्कूल की स्थापना 1968 में हुई थी. स्कूल की इमारत को देखने से कहीं से भी नहीं लगेगा कि स्कूल महानगर पालिका की है साथ ही इसके स्कूल के भीतर की भी व्यवस्था निजी स्कूल के जैसी ही दिखाई दी. प्राथमिक स्कूल की प्रिंसिपल सुषमा अग्रवाल है और माध्यमिक के प्रिंसिपल संजय पुंड है. प्राथमिक स्कूल में यानी नर्सरी से लेकर चौथी तक 98 विद्यार्थी पढ़ते हैं और इन्हे पढ़ाने के लिए 4 शिक्षक हैं. माध्यमिक स्कूल 5वीं से लेकर 10वीं तक है. इसमें 438 विद्यार्थी पढ़ते हैं. इन्हें पढ़ाने के लिए 20 शिक्षक हैं प्रिंसिपल को मिलाकर. स्कूल 5वीं से लेकर 10वी तक सेमी इंग्लिश है. प्राथमिक में एक चपरासी है और माध्यमिक में 3 चपरासी हैं. स्कूल में 23 कमरे हैं और एक हॉल है. कुल मिलाकर पूरी स्कूल में पीने के पानी से लेकर साफसफाई तक की व्यस्था काफी अच्छी है. शिक्षकों की ओर से भी विद्यार्थियों की पढ़ाई को लेकर काफी सकारत्मक प्रयास दिखाई दिया. स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या भी दूसरी मनपा की स्कूलों से काफी बेहतर है.

    स्कूल और विद्यार्थियों के लिए मूलभूत व्यवस्था और सुविधा
    स्कूल काफी बड़ी होने की वजह से कई कमरे हैं. सभी कमरों में व्यवस्थित पढ़ाई होते हुए दिखाई दी. विद्यार्थियों के लिए शौचालय काफी स्वच्छ दिखाई दिया. पीने के पानी की व्यवस्था वाटर कूलर और फ़िल्टर के माध्यम से की गई है. विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटर लैब भी है. जिसमें विद्यार्थी कंप्यूटर भी सीख रहे हैं और इसमें कंप्यूटर शिक्षक इन्हे कंप्यूटर की पढ़ाई कराते हैं. स्कूल में कुल मिलाकर 10 कंप्यूटर हैं. जिसमें 5 कंप्यूटर शिक्षक आमदार नागो गाणार ने दिए हैं और अनिल सोले ने 2 कंप्यूटर दिए हैं. विद्यार्थियों के लिए एक बड़ी वैन लगाई गई है. जिसमें करीब 50 विद्यार्थियों को घर से स्कूल और स्कूल से घर लाना ले जाना किया जाता है. जिसका 35 हजार रुपए महीना दिया जाता है. स्कूल का प्रत्येक शिक्षक 2 हजार रुपए महीने के हिसाब से पैसा जमा कर वाहनचालक को देते हैं.


    विद्यार्थियों के लिए किए जाते हैं विभिन्न उपक्रम
    स्कूल की ओर से विद्यार्थियों को हुनरमंद बनाने के लिए हर साल विभिन्न उपक्रम भी किए जाते हैं. प्रशिक्षक के माध्यम से विद्यार्थियों को राखियां बनाना सिखाया गया था. यह राखियां विद्यार्थियों के परिजनों को भी दी गई थी. साथ ही इसे बिक्री के लिए भी रखा गया था. इनमें से कई राखियां सैनिकों को भी भेजी गई थीं. गणपति प्रतिमाएं बनाने का प्रशिक्षण भी विद्यार्थियों को दिया गया था. जिसमें विद्यार्थियों ने गणपति की सुन्दर सुन्दर मुर्तिया बनाईं. गांधीसागर तालाब में निर्माल्य संकलन का उपक्रम भी किया गया था. पेपर क्राफ्ट भी विद्यार्थियों को सिखाया गया था. जिसमें दीपावली के उपयोग में आनेवाले आकाशदीप भी विद्यार्थियों को बनाना सिखाया गया था. पेपर के फूल और हार भी बनाना सिखाया था. केयर हॉस्पिटल की नर्सों को भी बुलाया गया था. उन्होंने स्वास्थ और स्वच्छता के बारे में विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया था. हर साल 8वीं और 9वीं की छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए 3 महीने का कराटे का प्रशिक्षण दिया जाता है. उसका खर्च राज्य सरकार देती है. कल होनेवाले गणतंत्र दिवस के अवसर पर 9 विद्यार्थी दिल्ली के राजपथ पर बरेदी नृत्य की प्रस्तुति देनेवाले हैं. एक महीने से यह विद्यार्थी और इनके साथ एक शिक्षिका दिल्ली गई है. स्कूल को काफी पुरस्कार भी मिले हैं, जो स्कूल की प्रतिभा साबित करते हैं.


    क्या कहते हैं स्कूल के शिक्षक
    स्कूल के पर्यवेक्षक विलास बल्लमवार ने स्कूल के बारे में काफी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि स्कूल में विद्यार्थियों के लिए काफी उपक्रम किए जाते हैं. जिसका उद्देश्य होता है कि विद्यार्थियों में पढ़ाई के साथ साथ आनेवाले दिनों में वे रोजगार का साधन भी हासिल कर सकें. उन्होंने बताया कि 8वीं और 9वीं के विद्यार्थी दिल्ली गए हुए हैं अपनी प्रस्तुति देने के लिए. बल्लमवार ने एक चित्रकला रूम भी दिखाया जिसमें विद्यार्थियों ने बेहतरीन ड्रॉइंग बनाई थीं. विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई मूर्तियों से भी उन्होंने रूबरू कराया. चित्रकला के शिक्षक प्रफुल चरडे का भी विद्यार्थियों की चित्रकला निखारने में अहम योगदान है. प्रिंसिपल पुंड़ की मीटिंग में होने की वजह से शिक्षक बल्लमवार ने मदद की.










    —शमानंद तायडे

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