
नागपुर टुडे – हत्या के मामले में पिछले पांच साल से फरार चल रहे प्रशांत उर्फ सोनू शंकर चौधरी (34) को क्राइम ब्रांच की यूनिट-6 ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पुलिस से बचने के लिए चार साल पंजाब और एक साल बिहार में रहा। कुछ दिन पहले ही वह अपने परिवार के साथ खापरखेड़ा लौटा था। इसकी भनक लगते ही पुलिस ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया। सोमवार रात पुलिसकर्मियों ने ठंड के बीच पूरी रात निगरानी की और मंगलवार सुबह आरोपी को दबोच लिया।
इस कार्रवाई में पुलिसकर्मी सुनील यादव और दिनेश महल्ले की सतर्कता अहम रही। दोनों ने आरोपी की तलाश में रातभर इंतजार किया। सुबह जैसे ही प्रशांत अपने दोपहिया वाहन के पास पहुंचा, पुलिस टीम ने उसे हिरासत में ले लिया।
दोपहिया वाहन बना आरोपी तक पहुंचने का सुराग
पुलिस को जानकारी मिली थी कि फरार प्रशांत के पास डुएट दोपहिया वाहन है। हालांकि, उसका सटीक ठिकाना पता नहीं चल पाया था। इसी सुराग के आधार पर सुनील यादव और दिनेश महल्ले ने सोमवार रात खापरखेड़ा की चनकापुर कॉलोनी में तलाश शुरू की।
कुछ समय बाद पुलिसकर्मियों को संदिग्ध दोपहिया वाहन दिखाई दिया। लेकिन आरोपी के घर की सही पहचान नहीं हो सकी। आरोपी के हाथ से निकल जाने की आशंका को देखते हुए दोनों पुलिसकर्मियों ने मौके पर ही रुककर निगरानी जारी रखी। रातभर इंतजार करने के बाद सुबह आरोपी जैसे ही वाहन के पास पहुंचा, पुलिस ने उसे पकड़ लिया।
चार साल पंजाब, एक साल बिहार में रहा
पुलिस के अनुसार, प्रशांत चौधरी का नाम खापरखेड़ा में राजबाबा बार के सामने हुई हत्या के मामले में सामने आया था। इस प्रकरण के बाद से ही वह फरार था। पुलिस से बचने के लिए उसने करीब चार साल पंजाब और एक साल बिहार में बिताए। इस दौरान उसने शादी भी कर ली।
कुछ दिन पहले उसके परिवार सहित खापरखेड़ा लौटने की जानकारी पुलिस को मिली थी। इसके बाद से ही उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। आखिरकार पुलिस ने घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
हत्या और लूट के मामलों में भी थी तलाश
प्रशांत चौधरी के खिलाफ खापरखेड़ा पुलिस थाने में वर्ष 2021 के हत्या के मामले के अलावा वर्ष 2019 के लूट प्रकरण में भी गैर-जमानती वारंट लंबित था। इसके साथ ही वर्धा जिले के देवली पुलिस थाने में दर्ज हत्या के मामले में भी पुलिस उसकी तलाश कर रही थी।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी की मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई के लिए उसे खापरखेड़ा पुलिस के हवाले कर दिया गया।
यह कार्रवाई पुलिस निरीक्षक भरत कन्हाडे के मार्गदर्शन में की गई। पांच साल से फरार आरोपी को पकड़ने में पुलिसकर्मियों की सतर्कता और लगातार निगरानी निर्णायक साबित हुई।



