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    Published On : Thu, Nov 23rd, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    परिवहन विभाग पर अतिक्रमण, जारी वर्चस्व की लड़ाई

    NMC Nagpur
    नागपुर: नागपुर महानगरपालिका अपने मूल विभागों का संचलन करने में नाकामयाब रही तो शहर के उच्च कोटि के सफेदपोशों के साथ व्यवसायियों ने इससे उबरने के लिए मनपा के विभागों का निजीकरण करने में महती भूमिका निभाई. लोककर्म के साथ प्रकल्प विभाग के अंतर्गत होने वाले कार्यों को ठेकेदारों से ही करवाया जाता रहा है. इसके अलावा करीबन आधा दर्जन विभाग का निजीकरण हो गया.फिर ४ वर्ष पूर्व नागपुर के व्यापारी नेता के अथक प्रयासों से मनपा पर शहर परिवहन का जिम्मा लादा गया, जिसके संचालन के लिए उसी नेता के करीबी को शहर बस संचालन का ठेका दिया गया.

    केंद्र सरकार की निधि से सैकड़ों बसें संचालन के लिए ठेकेदार को सौंपी गई. ठेकेदार ने फूटी-कौड़ी मनपा को नहीं दी और बसों को बदहाल के साथ कबाड़ में तब्दील जरूर कर दिए. नेता के सामने प्रशासन-पदाधिकारी बौना महसूस करने के कारण उक्त ठेकेदार का बाल भी बांका नहीं कर पाई. आज उक्त ठेकेदार का कार्यकाल समाप्त हुए लगभग डेढ़-दो वर्ष बीत चुके हैं. उक्त ठेकेदार और मनपा के मध्य ‘आर्बिट्रेशन’ का दौर जारी है. ठेकेदार ने मनपा से ही ४७० करोड़ लेने का दवा पत्र पेश किए जाने की जानकारी मिली है. इसके बाद मनपा प्रशासन आज ७-७ ठेकेदारों के मार्फ़त परिवहन विभाग का संचालन कर रही है, जिसकी सफलता पर तत्काल प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है.

    गुटों में विभक्त है विभाग
    पहला गुट – इस गुट में सत्तापक्ष पदाधिकारी, उनके लगभग हां में हां मिलाने वाले मनपा के दिग्गज अधिकारी, परिवहन प्रबंधक, डिम्ट्स व पूर्व परिवहन सभापति
    दूसरा गुट – परिवहन प्रबंधक व डिम्ट्स से त्रस्त लाल बसों के तीनों ऑपरेटर, परिवहन सभापति और बर्खास्त कर्मी व उनके समर्थक
    तीसरा गुट- कंडक्टर, चालकों की यूनियन व उनके मनपा में सहयोगी
    चौथा गुट- विभाग के त्रस्त ठेकेदारी प्रथा पर नियुक्त किये गए कर्मी

    डिम्ट्स : उंगली पकड़ाई, सर चढ़ गए
    डिम्ट्स को सत्तापक्ष और परिवहन प्रबंधक का पूर्ण समर्थन हासिल है, इसलिए वे न सभापति की और न उनके कार्यालय आदि की लिखित मांग पूरी करते हैं और न उनके निर्देशों का पालन करते हैं. इतना ही नहीं सभापति ने कई बार जिक्र किया कि डिम्ट्स के साथ हुए करार का पालन नहीं हो रहा. सिर्फ कन्डक्टरों के आईडी लॉक करने के लिए मनपा भुगतान कर रही है. वहीं प्रबंधक जगताप डिम्ट्स को नियमित क्लीनचिट देते रहते हैं. इससे एक बात तो साफ हैं कि या तो सभापति या फिर प्रबंधक जगताप में से कोई झूठ बोल रहा हैं.इस मामले में प्रशासन बसों से आवाजाही करने वालों के पक्ष में डिम्ट्स के साथ हुए करार के अनुसार जिम्मेदारी पूर्ण हो रही है या नहीं, इसकी अतिशीघ्र जांच करें. इतना ही नहीं डिम्ट्स ने तीनों बस ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी,पिछले कुछ दिनों से रोजाना मनपा मुख्यालय में दर-दर की ठोकरें खाते तीनों ऑपरेटरों के प्रतिनिधि दिख जाएंगे, क्योंकि इनको न सिर्फ जुर्माना ठोंका गया बल्कि कुछ माह से मासिक भुगतान भी नहीं किया गया.

    जगताप सबको भिड़ाकर लौट जाएगा मूल विभाग ?
    कड़वा सत्य है कि परिवहन प्रबंधक खुले तौर पर डिम्ट्स और उनके तौर-तरीके का समर्थन कर रहा है. डिम्ट्स की कार्यप्रणाली और प्रबंधक से सभापति, विभाग के कर्मी, अन्य बस ऑपरेटर, ठेकेदारी में तैनात कर्मी त्रस्त हो चुके हैं. अब जबकि सभी ओर घिरते जा रहे हैं तो खुद अस्वस्थ्य हो चुके है. प्रबंधक के करीबी के अनुसार शीतकालीन सत्र के आसपास या ख़त्म होते ही अपने मूल विभाग लौटने के फ़िराक में है. यहां जिम्मेदारी के मामले में पदोन्नत होकर जरूर आए लेकिन सौंपी गई जिम्मेदारी के साथ न्याय करने में असफल रहे हैं.

    मिनी बसों की खरीदी पर विवाद
    विभाग अंतर्गत कार्यरत तीनों बस ऑपरेटरों से हुए करारनुसार १५-१५ मिनी बसें खुद खरीदकर ‘आपली बस’ के बेडे में शामिल करना था. लेकिन प्रबंधक और अन्य के मध्य मॉडल को लेकर चल रहे विवाद के कारण खरीदी लटका दी गई. प्रबंधक के अनुसार मनपा ‘आपली बस’ के विस्तारीकरण की स्थिति में नहीं हैं. सूत्रों की माने तो विभाग बिना चेचिस वाला मॉडल खरीदने हेतु दबाव बना रहा है तो बस ऑपरेटर का तर्क हैं कि सार्वजानिक बस सेवा में यात्रियों को बस में प्रवेश करने से रोका नहीं जा सकता है, ऐसे में बिना चेचिस के बस साथ नहीं दे पाएंगी. इस विवाद के कारण विभाग ऑपरेटरों के मनमाफिक बसों की खरीदी के लिए मंजूरी नहीं प्रदान कर रहा है.

    ‘तेजस्विनी’ को लेकर कोई चिंतित नहीं
    प्रशासन और सत्तापक्ष की निष्क्रियता से ‘तेजस्विनी’ शहर के मार्गों पर नहीं दौड़ पा रही है. जबकि सरकार ने कई महीनों पूर्व निधि जिला प्रशासन के खाते में जमा करवा चुकी है. राज्य सरकार में शहरों में महिला स्पेशल बसें चलाने के लिए न सिर्फ आदेश जारी किया बल्कि सभी जिला प्रशासन के मार्फ़त निधि भी मुहैया करवाई. मनपा परिवहन विभाग के अनुसार सरकार से ९.६० करोड़ रुपए जिला प्रशासन को प्राप्त हुए है. इनसे राज्य सरकार की ‘तेजस्विनी’ योजना अंतर्गत बसें खरीदने के लिए उक्त राशि प्राप्ति के लिए मनपा प्रशासन ने जिलाधिकारी कार्यालय को पत्र लिखा है. इस राशि में से जितनी बसें खरीदी जाएंगी, मनपा खरीद सकती है. महिला स्पेशल बसों के लिए मनपा परिवहन विभाग ने ११ मार्ग तय किए हैं.जब कभी महिला स्पेशल बस शुरू होंगी, ये बसें बर्डी से काटोल रोड,डिफ़ेंस, बुटीबोरी, बेसा, पिपला ,कोराडी-खापड़खेड़ा,पारडी-दिघोरी, बहादूरा आदि तक चलाई जाएंगी.

    वेतन को मोहताज कर्मियों के वेतन कटौती में भिड़े प्रबंधक
    विभाग में ७-८ कर्मी व अधिकारी ठेकेदारी पद्धति पर मनपा प्रशासन द्वारा नियम व शर्तों के अधीन रहकर भर्ती किए गए. इनमें से अधिकांश का वेतन ही तय नहीं हुआ है, कुछ तो ऐसे हैं, जिन्हें नियुक्ति के बाद आजतक फूटी-कौड़ी नसीब नहीं हुई है. लगभग सभी की नियुक्ति ११-११ माह के लिए हुई हैं,फिर जरूरत के अनुसार सेवावृद्धि की जाएंगी. दूसरी ओर इनके सहयोग से विभाग संचलन करने वाले प्रबंधक इन्हें नियमित माहवारी वेतन दिलवाने के बजाय इन सभी की वेतन कम करवाने के लिए अपने स्तर से प्रयत्नशील है, इसकी भनक सभी त्रस्तों को है, इससे उनकी ऊर्जा धीमी होती जा रही है.


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