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    Published On : Tue, Jul 21st, 2020

    वेकोलि की सहायता से विद्युत ताप – गृहों की बिजली-दर में कमी

    नागपुर– कोल इंडिया लिमिटेड की अनुषंगी कम्पनी वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) पिछले पांच वर्षों में कोयला-उत्पादन में वृद्धि करते हुए, मध्य, पश्चिम तथा दक्षिण भारत के सरकारी एवं निजी ताप विद्युत गृहों को सस्ता कोयला उपलब्ध करवाने में सफल रही है. इस प्रयास से बिजली-घरों की ऊर्जा-लागत में कमी आने से उपभोक्ताओं को सस्ती दर पर बिजली-आपूर्ति में ताप विद्युत-गृहों को मदद मिल रही है.

    महाराष्ट्र (महाजेनको), मध्यप्रदेश (एमपीपीजीसीएल), गुजरात (जीएसइसीएल) तथा कर्नाटक (केपीसीएल) तथा अन्य निजी विद्युत- उत्पादक कम्पनियां उनकी कोयला-जरूरतों के लिए मुख्यतः वेकोलि पर ही निर्भर हैं. वेकोलि के कोयला-प्रेषण का 50% से अधिक कोयला महाजेनको और 12% एमपीपीजीसीएल को जाता है.

    2013-14 में वेकोलि का उत्पादन-स्तर घट कर 39 मिलियन टन पर पहुंच गया था. ऊर्जा-उपभोक्ताओं के पास कोल इंडिया की अन्य सहायक कम्पनियों; एसईसीएल,एमसीएल तथा एससीसीएल से कोयला लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं था. लम्बी दूरी के चलते उपभोक्ताओं द्वारा अधिक रेल-भाड़ा चुकाने के कारण, उसके गंतव्य तक पहुंचने में लागत बढ़ जाती थी.

    वेकोलि ने नयी खदानें खोलने और वर्तमान परियोजनाओं के विस्तार की योजना बनायी. पिछले पांच वर्षों के दौरान, कम्पनी ने 45.64 मिलियन टन क्षमता की 20 खदानें खोलीं. 2019-20 में इन खदानों से 35.8 मिलियन टन कोयला – उत्पादन हुआ. परिणामस्वरूप, 2019-20 के दौरान कम्पनी का उत्पादन बढ़ कर 57.6 मिलियन टन हुआ. उत्पादन में यह वृद्धि उल्लेखनीय रही ,क्योंकि गत पांच वर्षों में वेकोलि के उत्पादन में 22 मिलियन टन का ह्रास हुआ.

    वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान, महाजेनको को वेकोलि ने 17.60 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की थी, जबकि 2019-20 में यह मात्रा 27 मिलियन टन रही. वेकोलि से अतिरिक्त कोयला खरीदने के कारण, भाड़ा / किराये में महाजेनको को औसत 1200 रूपये प्रति टन की बचत होती है.

    ऊर्जा-उपभोक्ताओं को और अधिक कोयला उपलब्ध करवाने के लिए, वेकोलि ने पावर सेक्टर के लिए विशेष रूप से ” माइन स्पेसिफिक सोर्स ” के रूप में 11 खदानों को चिन्हित किया. किराया-लागत में उपभोक्ताओं को होने वाली इस बचत में से वेकोलि को आंशिक राशि नियमित मूल्य पर हल्के प्रीमियम के रूप में मिलती है. इससे आगामी वर्षों में नयी खदानें खोल कर, कोयला-प्रेषण बढ़ाना कम्पनी के लिए आसान हुआ है. इसका जिक्र प्रासंगिक है कि वेकोलि के माइन स्पेसिफिक कोयले की लैंडेड प्राइस, अन्य कोयला- कम्पनियों की के कोयले की लैंडेड प्राइस से कम है.

    वेकोलि ने वर्तमान 57.6 मिलियन टन उत्पादन को बढ़ा कर 2023-24 में 75 मिलियन टन तथा 2027-28 में 100 मिलियन टन तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना बनायी है. उत्पादन और प्रेषण में वृद्धि के आलोक में, वेकोलि 2020-21 से ही इन उपभोक्ताओं की सम्पूर्ण कोयला-ज़रूरत की पूर्ति के लिए तैयार है. आकलन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में महाजेनको को करीब 35 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता होगी. कम्पनी ने कोयले की सम्पूर्ण मात्रा की आपूर्ति का प्रस्ताव दिया है, जिससे किराया-लागत में महाजेनको को भारी बचत होगी. वेकोलि ने आयात-विकल्प के रूप में निजी बिजली-उत्पादकों को भी कोयला प्रेषित करना प्रारम्भ कर दिया है.

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