Published On : Fri, Jun 2nd, 2017

शिक्षा अध्ययन, आचार्य एवं आनंद केंद्रित होना चाहिए : मुकुल कानिटकर

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Mukul Kanitkar, IGNOU
नागपुर: 
भारतीय मंडल के आयोजन सचिव मुकुल कानिटकर ने इग्नू के उच्च शिक्षा में स्नातकोत्तर डिप्लोमा (पी.जी.डी.एच.ई ) छात्रों के लिए 10 दिनों के विस्तारित संपर्क कार्यक्रम में ‘आधुनिक भारत के लिए प्राचीन भारतीय शिक्षा प्रणाली की प्रासंगिकता’ पर व्याख्यान प्रस्तुत किया.

इस दौरान उन्होंने कहा कि प्राचीन गुरुकुल प्रणाली में छात्रों को उनकी मानसिक क्षमता और इच्छा के अनुसार विषयों को जानने के लिए प्रेरित किया जाता था. तब शिक्षा अध्ययन केंद्रित, आचार्य केंद्रित एवं आनंद केंद्रित थी. लेकिन अब शिक्षा पद्धति इन तीनों पहलुओ से भटक गई है और केवल पाठ्यक्रम केंद्रित ही रह गई है.

उन्होंने मार्गदर्शन करते हुए कहा किनप्राचीन दिनों में सीखने पर जोर दिया गया था. शिक्षा और शिक्षकों का मुख्य कार्य था विद्यार्थी के व्यक्तिगत सीखने की क्षमता की पहचान कराना और ऐसे विषयों की ओर प्रेरित करना ताकि उन्हें किसी एक विषय में पारंगत बनाया जा सके. इस दौरान उन्होंने कैदियों, ग्रामीणों के साथ जनजातीय लोगों के लिए इग्नू द्वारा उपलब्ध कराई जा रही शिक्षा व्यवस्था की भी सराहना की.

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इस दौरान इग्नू के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. पी. शिवस्वरूप ने स्वागत भाषण में कहा कि इग्नू पाठ्यक्रम में शिक्षार्थियों के लिए विभिन्न शिक्षा के अनुभव प्रदान किए जाते हैं. ईसीपी कार्यक्रम पाठ्यचर्या की रचना, उच्च शिक्षा संस्थान , समूह में काम करना और व्याख्यान प्रस्तुति एवं वरिष्ठ शिक्षाविदों द्वारा व्याख्यान आदि विभिन्न शिक्षा अनुभवों का एक संयोजन है. यह विद्यार्थियों में उच्च शिक्षा प्रणाली के प्रति एक व्यापक दृष्टि विकसित करेगा.

10 दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व विश्व बैंक सलाहकार डॉ रमेश. बी. ठाकरे द्वारा किया गया. कार्यक्रम में लॉ फैकल्टी की डॉ. अपर्णा पंचभाई, यवतमाल के यशवंत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. आर.ए. मिश्रा, राजश्री वैष्णव, डॉ रेखा शर्मा, डॉ एस.आई. कोरेटी, डॉ. प्रतीक बनर्जी, सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ नुरुल हसन व अन्य मौजूद थे.

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