Published On : Mon, Jul 9th, 2018

शिक्षामंत्री विनोद तावड़े ने स्टेट बोर्ड और सीबीएसई पर सदन में कहा

Vinod Tawde

नागपुर: 11वीं और 12वीं कक्षा का पाठ्यक्रम देशस्तर पर समान हो इस धारणा के अनुसार महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल (एचएससी) साथ ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई) का पाठय्रकम तैयार किया गया है. इन दोनों माध्यमों के स्कूलों में महाराष्ट्र के विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं. जिसके कारण प्रक्रिया के लिए दोनों माध्यमों के मंडलों में स्वतंत्र रूप से भेदभाव नहीं किया जाएगा. लेकिन दोनों माध्यमों के पाठ्यकम की कठिनता जांचने के उद्देश्य से शिक्षा विशेषज्ञों की समिति स्थापित की जाएगी. दीपावली से पहले यह समिति इस सन्दर्भ में विचार करेगी कि वह अपनी रिपोर्ट पेश कर सकती है. रिपोर्ट की सिफारिश के आधार पर योग्य पर्याय की शिक्षाविशेषज्ञ के साथ चर्चा होगी.

यह कहना है शिक्षा मंत्री विनोद तावडे का. वे विधानसभा में जानकारी दे रहे थे. राज्य में सीबीएसई के रिजल्ट में एचएससी बोर्ड की तुलना में पास होनेवाले विद्यार्थियों का प्रमाण 5 प्रतिशत बढ़ा है. जिसके कारण सेल्फ फाइनेंस पाठ्यक्रम के लिए प्रवेश लेते हुए एचएचसी मंडल के विद्यार्थियों को सीबीएसई विद्यार्थियों के साथ स्पर्धा करनी पड़ती है. जिससे राज्य के विद्यार्थियों पर अन्याय होने का प्रश्न विधायक सुधीर प्रभु, अबू आजमी इन सदस्यों ने विधानसभा में उठायी थी.

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इसकी जानकारी देते हुए तावड़े ने बताया कि महाराष्ट्र में एचएचसी बोर्ड के साथ ही सीबीएसई, आइसीएसई, आईबी पाठ्यक्रमों का भी मंडल है. इन मंडलों में महाराष्ट्र के विद्यार्थी शिक्षा ले रहे हैं. इन दोनों मंडलों में कुछ ज्यादा फर्क नहीं है.

सीबीएसई मंडल के विद्यार्थियों को 500 मार्क्स तो एचएचसी बोर्ड के विद्यार्थियों को 650 मार्क्स होते हैं. जिसके बाद भी दोनों मंडलों की समानता पर जांच करने की दृष्टि से समिति की स्थापना की जाएगी. समिति के रिपोर्ट पर लेने वाले निर्णय गुणवत्ता के आधार पर लिया जाएगा. किसी भी परिस्थिति में विद्यार्थियों का नुकसान नहीं होगा. यह भी जानकारी तावड़े ने दी.

ग्यारहवीं ऑनलाइन प्रवेश के समय विद्यार्थियों को उनके घर के पास एडमिशन न मिलते हुए दूर एडमिशन दिए जाते हैं. जिसके कारण विद्यार्थियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ग्यारहवीं के विद्यार्थी को उसके घर के आस पास ही एडमिशन देने की मांग राज पुरोहित ने की थी. जिस पर तावड़े ने जानकारी देते हुए बताया कि नेबरहुड स्कूलिंग की संकल्पना राज्य शासन में विचाराधीन है.

उस उद्देश्य से इस सन्दर्भ में पाठय्रकम के दृष्टि से एक समिति स्थापन की जाएगी. शालेय शिक्षा विभाग के अप्पर सचिव, शालेय शिक्षा, प्रधान सचिव, विधि व न्याय विभाग के शिक्षा आयुक्त उसी के अनुसार सदन के सदस्य की एक समिति की स्थापन करने पर विचार करने की जानकरी भी तावडे ने दी.

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