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    Published On : Tue, Jan 15th, 2019

    पूर्व नागपुर उम्मीदवारी: खोपड़े नहीं गिरीश की मांग जोरों पर

    पार्टी के निष्पक्ष कार्यकर्ताओं की मांग : हिंदी भाषी महिला उम्मीदवार उतारें

    नागपुर: लोकसभा चुनाव का बिगुल अभी बजा नहीं लेकिन विधानसभा चुनाव की हलचलें हर पार्टी में शुरू हो गई है. सभी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों में से इन दिनों पूर्व नागपुर की चर्चा मतदाताओं और कार्यकर्ताओं में जोरों पर है. अगली बार उम्मीदवार बदलने और महिलाओं को विस चुनाव में तवज्जों देने पर जोर दिया जा रहा.

    खोपड़े नहीं गिरीश चलेगा

    भाजपाई समर्थक खोपड़े की जगह हिंदी भाषी व व्यापारियों के हितैषी एमएलसी गिरीश व्यास को पूर्व नागपुर से विधानसभा चुनाव में भाजपा की उम्मीदवारी देने की मांग कर चुके हैं. खोपड़े की कार्यशैली से अवगत पूर्व नागपुर के भाजपा समर्थक अब मधुरभाषी व्यास को सभी समाज का समर्थन मिल रहा. वहीं खोपड़े को उनके निकट रहने वाले रिश्तेदारों से ही चुनौतियां मिल रही हैं. खोपड़े की इन चुनौतियों का फायदा कांग्रेस के इच्छुक सक्रिय संभावित उम्मीदवारों को मिल रहा है.

    याद रहे कि एक दशक पूर्व कांग्रेस उम्मीदवार सतीश चतुर्वेदी की जीत आसान करने के उद्देश्य से भाजपा नेताओं की मंडली ने भाजपा की उम्मीदवारी कृष्णा खोपड़े को दी थी. चतुर्वेदी के नीति से नाराज पूर्व नागपुर के मतदाताओं ने खोपड़े को अवसर प्रदान किया था. खोपड़े को अवसर मिलते ही उन्होंने धीरे-धीरे अपनी जड़े ज़माने के साथ क्षेत्र के व्यापारिक वर्ग और हिंदी वासियों को दूर करना शुरू कर दिया. दूसरे विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व नागपुर के लोकल उम्मीदवार के बजाय बाहरी उम्मीदवार को तरजीह दी. इसलिए कांग्रेस के अंदरूनी गुटबाजी के कारण पुनः खोपड़े की लॉटरी लग गई और वह दूसरी मर्तबा विधायक बन गए. पिछले ४ वर्षों में खोपड़े ने भाजपा के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों, नगरसेवकों को दरकिनार करने के साथ उसे व्यक्तिगत नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया. कल तक खोपड़े के खासमखास रही चेतना टांक और बाल्या बोरकर अब उन्हें फूटी आंख नहीं सुहा रहे हैं. अब आलम यह है कि भाजपा नेतृत्व को पूर्व नागपुर के व्यापारियों, हिंदी भाषियों के साथ दिग्गज कार्यकर्ताओं ने खुल्लम-खुल्ला चुनौती दे दी है कि अगले चुनाव में या तो उम्मीदवार बदलो नहीं तो हम सभी कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में मतदान करेंगे.

    हिंदी भाषी महिला उम्मीदवार उतारे की मांग नागपुर शहर में ६ विधानसभा क्षेत्र है. भाजपा ने इन सभी क्षेत्रों में कभी महिला उम्मीदवारों को उतारने की हिमाकत कभी नहीं की. वहीं दूसरी ओर पूर्व नागपुर में भाजपा की अंदरूनी उथल-पुथल से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए पूर्व नागपुर के जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं ने गडकरी-फडणवीस से अगले विस चुनाव में महिला उम्मीदवार वरिष्ठ नगरसेविका चेतना टांक को उम्मीदवारी देने की मांग की. टांक मृदुभाषी होने के साथ ही साथ तगड़ी जनसम्पर्क रखने वाली महिला भी हैं. हिंदी भाषी होने के साथ ही साथ व्यापारिक घराने से ताल्लुक रखती हैं. चुनावी रहन-सहन रखने में माहिर खिलाड़ी मानी जाती हैं. चाहे कांग्रेस हो या फिर भाजपा के विधायक, उनकी जीत में इनके योगदान से सभी वाकिफ हैं. टांक जैसी महिला उम्मीदवार को भाजपा ने उम्मीदवार बनाया तो पूर्व नागपुर में भाजपा की गुटबाजी सिरे से समाप्त हो सकती है. व्यास के बजाय टांक भाजपा के लिए लाभप्रद होने की जानकारी पूर्व नागपुर के कार्यकर्ताओं ने दी है.

    कांग्रेस के आधा दर्जन ‘फ्राई पेन’ में

    आगामी विस चुनाव के मद्देनज़र सम्पूर्ण शहर में कांग्रेस के संभावित इच्छुकों की सक्रियता चर्चा में है. कांग्रेस की ओर से अधिवक्ता अभिजीत वंजारी, अतुल लोंडे, उमाकांत अग्निहोत्री आदि अन्य पूर्व नागपुर में सक्रिय होकर आपस में एक दूसरे को टक्कर दे रहे हैं. चूँकि पूर्व नागपुर में तेली समाज, छत्तीसगढ़ी समाज, व्यापारिक समुदाय सह हिन्दीभाषीयों का प्रभुत्व है. विरोधी भाजपाई कांग्रेस में अपना प्रतिद्वंदी वंजारी को मान रहे हैं. वंजारी तेली समाज से हैं. अब समय ही बताएगा कि कांग्रेस किसे अपना उम्मीदवार बनाती है.

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