Published On : Sat, Apr 13th, 2019

ई-टिकटों और बुकिंग खिड़कियों के टिकटों की कालाबाजारी

रेल्वे क्राइम इन्टेलिजेंस ब्रांच ने कम्प्यूटर सेंटर के मालक को पकड़ा

गोंदिया: गर्मियों की स्कूली छुट्टियां और शादी-त्यौहार का मौसम आते ही तमाम ट्रेनों में भीड़ बढ़ जाती है। हर मुसाफिर की यह चाहत होती है कि, उसका सफर सुहाना हो। इसी अपेक्षा में वह कन्फर्म टिकट की जुगत में जुट जाता है। जब रेल्वे आरक्षण खिड़की से उसे निराशा हाथ लगती है तो वह टिकट दलालों के संपर्क में आ जाता है।

लंबी दूरी के लिए चलने वाली ट्रेनों के आरक्षित टिकटों में अधिक गड़बड़ी पाए जाने की जानकारी मिलने के बाद रेल्वे क्राइम इन्टेलिजेंस ब्रांच अधिकारियों के एक दल ने 11 अप्रैल के दोपहर 12 बजे गोंदिया के पुराना आरटीओ ऑफिस निकट एक कम्प्यूटर सेंटर पर नकली ग्राहक भेजा और ई-टिकट तथा बुकिंग खिड़कियों की टिकटों की अवैध गतविधियों के खिलाफ जांच करते हुए रैकेट का खुलासा किया तथा कम्प्यूटर सेंटर के मालक आरोपी प्रजीत (27 रा. नेहरू वार्ड गोंदिया) द्वारा उपयोग में लाये जा रहे कम्प्यूटर की जांच करते हुए 16 ई-टिकट सी़ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।

इस कार्रवाई में रेल्वे क्र्राइम इन्टेलिजेंस ब्रांच के पुलिस निरीक्षक दत्ता साहब, सब इंस्पेक्टर एस.एस. बघेल, हे.कॉ. आर.सी. कटरे, कॉ. एस.बी. मेश्राम आदि ने हिस्सा लिया तथा मौके से 16 टिकट (कीमत 12 हजार 625 रू), सी.पी.यु, मॉनिटर, प्रिंटर, की-बोर्ड, माउस, आदि साहित्य इस तरह कुल 61,625 रू. की संपत्ति जब्त करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए आरोपी को गोंदिया आरपीएफ पुलिस थाने के सुपुर्द किया जहां आरोपी के खिलाफ अंडर सेक्शन 143 (रेल्वे एक्ट) के तहत जुर्म दर्ज किया गया है।

11 अप्रैल को गोंदिया रेल्वे स्टेशन पर कैम्प कोर्ट लगा था लिहाजा आरोपी को रेल्वे मजिस्ट्रेड के सामने पेश किया गया जहां से बताया जाता है कि, 10 हजार के निजी मुचलके पर उसकी जमानत हो गई। बहरहाल आरोपी से बरामद कम्प्यूटर को अब इस बात हेतु खंगाला जा रहा है कि, अब तक उसने कितने टिकटों की खरीद-फरोख्त की है ? तथा टिकटों की कालाबाजारी के लिए किन कोड-वर्ड शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था?
छापामार कार्रवाई करने वाले अधिकारियों की मानें तो इस प्रकरण में ओर भी कुछ गिरफ्तारियां हो सकती है।

उल्लेखनीय है कि, तमाम सख्ती और कारगर उपायों के बावजूद गोंदिया में रेल्वे टिकटों की कालाबाजारी थमने का नाम नहीं ले रही। अब रेल्वे ने इसके लिए स्पेशल ड्राइव चलाया है जिसके जाल में एक दलाल फंस चुका है। अब यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा।

बात अगर कायदे-कानूनों की, कि जाए तो अपराध सिद्ध होने पर अधिकतम सजा 3 साल या 10 हजार रू. जुर्माना अथवा दोनों हो सकती है?