Published On : Sat, Mar 24th, 2018

नशे में धुत होकर सोसाइटी पदाधिकारी की महिला रहवासी से की बदसुलूकी

Crime
नागपुर: शहर के बाहरी इलाकों में अनगिनत दम्पति रहकर आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में स्थापित कंपनियों में नौकरी करते हैं. इनमें से अधिकांश दम्पति या तो दोनों या फिर अकेले शिफ्ट में नौकरी करते हैं. ऐसी ही पद्धति से जीवन यापन करने वाली एक दम्पति मनीष नगर के नवनाथ सोसाइटी स्थित सिल्वर हाइट्स में किराए पर रहती है. इस सोसाइटी के पदाधिकारी ने आदतन नशे में धुत होकर पड़ोस में रहने वाली एक महिला और उसकी २ वर्षीय बच्ची के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की. हिम्मत जुटा कर उक्त आरोपी के खिलाफ बेलतरोड़ी थाने में काफी मशक्कत से शिकायत दर्ज कार्रवाई लेकिन पुलिस प्रशासन कानूनन उचित कार्रवाई करने के बजाय मामला को शांत करने में लीन है. थाना प्रशासन के उक्त कृत से छुब्ध पीड़िता जल्द ही पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाएंगी।

पीड़िता द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वह मिहान की एक नामचीन कंपनी में अधिकारी है. उनकी शिफ्ट ड्यूटी रहती हैं, रात को घर लौटते देर हो जाती है. घटना १९ मार्च की है, वह ऑफिस न जाकर घर से काम करने की छुट्टी ली थी. उसके पति कंसल्टेंट होने से वे काम के सिलसिले दौरे पर थे. १९ मार्च की ही दोपहर पूर्व उसकी २ वर्ष की बच्ची फ्लैट के गेट के सामने खेल रही थी. वह पीड़िता बच्ची के लिए पानी लेने के लिए भीतर घर के किचन में गई थी कि बच्ची का चिल्लाने का आवाज आया और रोने की आवाज आई, उसकी आवाज सुनकर पीड़िता बच्चे के पास पहुंची तो पड़ोसी जो सोसाइटी का पदाधिकारी हैं, जिसका नाम राजेश मिंगल है, लगभग ४५ वर्षीय मिंगल फ्लैट क्रमांक ३०२ में रहते हैं. वह बच्ची को घसीट अपने फ्लैट में ले जा रहा था, पीड़िता ने यह देख बच्चे को छुड़ाने उससे भिड़ी तो उसके मुख से शराब की बदबू आ रही थी और वह काफी नशे में था. बच्ची को छुड़ाता देख आरोपी ने पीड़िता के हाथ पकड़ कर उसे भी खींच अपने फ्लैट के अंदर ले जाने की कोशिश करने लगा. इस हरकत को देख उसने हाथ छुड़ाने का प्रयास करने के साथ ही साथ मामला सार्वजानिक करने की धमकी दी, क्यूंकि वह पूर्णतः नशे में था तो मौके की नजाकत को देख पीड़िता ने उसे धकेल दिया और अपनी बच्ची को छुड़ाकर अपने फ्लैट में बंद हो गई.लेकिन बाहर से मिंगल अपशब्द कहते हुए धमकाता रहा, कुछ देर तक दरवाजा पीटता रहा.

पीड़िता के साथ उक्त घटना पहली मर्तबा घटी और उस वक़्त फ्लैट स्कीम में सन्नाटा था तो उसे कुछ समझ नहीं आया. जब दिमाग शांत हुआ तो तुरंत पति को संपर्क कर उक्त घटना से अवगत करवाई. शाम को जब पीड़िता के पति घर लौटे तो आपसी सलाह मशविरा के बाद करीबी, रिश्तेदारों और फ्लैट के मूल मालिक को जानकारी देकर पुलिस में मामला दर्ज करवाने का निर्णय लेने में २० मार्च निकल गया. अन्तः २१ मार्च की सुबह बेलतरोड़ी थाना पहुँच उपस्थित अधिकारियों को उक्त घटना से अवगत करवाकर मिंगल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाने की मांग की. पीड़िता की यह मांग सुन उपस्थित पुलिस वालों ने समझौता करवाने पर जोर दिया।काफी दबाव बनाने के बाद पुलिस ने मिंगल को तत्काल थाना पहुँचने का निर्देश दिया. कुछ देर में मिंगल सोसाइटी के कुछ बुजुर्ग व पुराने रहवासियों को लेकर थाना पहुंचा और पीड़िता द्वारा लगाए गए आरोप से थाना प्रभारी के सामने मुकर कर चलता बना. पीड़िता द्वारा लगातार ८ घंटे रहकर मशाकट करती रही तब जाकर शाम ६ बजे मिंगल के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया गया. लेकिन पुलिस मिंगल का पक्ष लेती रही. फिर २१ मार्च को एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुँच पंचनामा किया. २२ मार्च की शाम पीड़िता जो कि ऑफिस में थी, उसे पुलिस ने सूचना देकर बयान देने के लिए घर पर पहुंचने का निर्देश दिया. पीड़िता के घर पहुँचते ही पुलिस उसके घर पहुँच बयान ली. उसके बाद आजतक मिंगल के खिलाफ कोई ठोस कानूनन कार्रवाई नहीं करना समझ से परे है.

बेलतरोड़ी थाना प्रशासन की उक्त मामला को लेकर एकतरफा रवैया से छुब्ध होकर पीड़िता जल्द ही समय लेकर पुलिस आयुक्त से मुलाकात कर न्याय की गुहार करेगी. उल्लेखनीय यह है कि बच्ची और खुद को मिंगल के पंजे से छुड़ाते वक़्त पीड़िता द्वारा कोई अनहोनी घट गई होती तो पुलिस पीड़िता को अविलंब जेल की हवा खिलवा चुका होता है, जब पीड़िता ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बिना की नई अनहोनी घटना के पुलिस और कानून व्यवस्था से मदद की मांग कर रही तो वे आँख में पट्टी बांध गवाहदार की मांग कर मामले को शांत करने में जुटे हैं.

पुलिस प्रशासन का यही आलम रहा तो एक तरफ मुख्यमंत्री जिले में उद्योग स्थापित करने के लिए मशक्कत कर रहे तो दूसरी तरफ उन उद्योग में काम करने वाले व शहर सीमा में रहने वाले दम्पतियों को सुरक्षा देने में आनाकानी किया जाना चिंतनीय है.