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    Published On : Mon, Jun 3rd, 2019

    डॉ. उदय बोधनकर की किताब ‘तिमिर से उदय की ओर’ का विमोचन कल

    नागपुर: शहर के जाने माने डॉ. उदय बोधनकर ने खुद की बायोग्राफी ‘ तिमिर से उदय की ओर ‘ प्रकाशित की है. पहले भी मराठी में उनकी बायोग्राफी आ चुकी है. उनकी किताब का लोकार्पण समारोह मंगलवार 4 जून को राष्ट्रभाषा संकुल, महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा के श्रीमंत बाबूराव धनवटे सभागृह में आयोजित किया गया है. इस पुस्तक का विमोचन कृष्णा इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज कराड के कुलपति डॉ. वेदप्रकाश मिश्रा के हाथों एवं वरिष्ठ पत्रकार एस.एन.विनोद की प्रमुख मौजूदगी में संपन्न होगा. इस अवसर पर हिंदी की वरिष्ठ साहित्यिक हेमलता मिश्र ‘ मानवी एवं मराठी भाषा की प्रसिद्द साहित्यिक सुप्रिया अय्यर विशेष अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगी. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष डॉ. गिरीश गांधी करेंगे.

    पुस्तक के विमोचन से पहले ‘ नागपुर टुडे ‘ की ओर से डॉ. बोधनकर से ख़ास बातचीत की गई. उन्होंने बताया कि उनके साथ 10 साल पहले हादसा हुआ था. हादसे के कारण उन्होंने ऑटोबायोग्राफी लिखने की शुरुआत की. उस हादसे से वे डॉक्टर से लेखक बने. 10 साल पहले हुए हादसे में वे कोमा में भी गए थे. जब लोगों ने और उनके शुभचिंतकों ने उनके लिए प्रार्थनाएं भी की थी. उन्होंने कहा कि मैं कैसे बचा, लोग पूछते थे. इसके बाद मैंने किताब लिखने की ठानी. मैंने पहले मराठी में किताब लिखी. हादसे के बारे में, किसने इलाज किया सभी लिखा हुआ है किताब में. वे फिल्मस्टार अमिताभ बच्चन के घर भी गए थे उनके घर में भी किताब है. डॉ. विकास बिसने, उदय मोहरकर, डॉ.चंद्रशेखर मेश्राम ने उनकी जान बचायी है. इन डॉक्टरों ने हार्ट और ब्रेन का इलाज किया. बचने की उम्मीद नहीं थी. फैसिओथेरपी के लिए ऑरेंज सीटी हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने काफी सहयोग किया. कुदरत का करिशमा है कि उस गंभीर हादसे के बाद भी वह बचे. उस हादसे से बचने के बाद आज वह 16 से 18 घंटे काम करते हैं. समाज के लिए और लोगों के लिए काम किया है और उनकी दुवाओं के उसके कारण वे बचे हैं ऐसा विश्वास डॉ. बोधनकर ने जताया है. अन्धकार से उजाले आने तक जो भी परिणाम हुए इस बारे में पुस्तक में लिखा गया है.

    इस किताब में यह भी दिया है कि डॉ. बोधनकर सामान्य परिस्थिति से कैसे किसी उच्च शिखर पर पहुंचे. उन्होंने बताया कि कितनी भी कठिनाई आईं लेकिन हार नहीं मानना. हादसे के बाद वे वेंटीलेटर पर 15 दिन थे. लेकिन उनकी पत्नी ने डॉक्टरों को बताया कि वे जरूर स्वस्थ होंगे. लोगों के विश्वास और भरोसे से ही वे अच्छे हुए हैं. किस तरह से उन्होंने विभिन्न थेरपी की और उसके क्या क्या फायदे हुए हैं. इस बारे में किताब में जानकारी दी गई है. उन्होंने बताया कि भगवान् पर भरोसा करें. डॉक्टरों के एड्रेस भी किताब में दिए गए हैं. इस किताब के माध्यम से हेल्थ का संदेश दिया है. 4 जून से यह किताब मार्केट में आ जाएगी. स्वर्गीय बहन की प्रेरणा से ही वे डॉक्टर बने. डॉ.बोधनकर योगा और प्राणायाम भी करते हैं. एनजीओ को भी वे मदद करते हैं. किताब, पढ़ना, मूवी देखना उन्हें पढ़ना पसंद है. श्याम बेनेगल की फिल्मे उन्हें काफी पसंद है. स्कूल के जमाने और कॉलेज में ड्रामा में भी उन्होंने काम किया है. सामजिक कार्य करना उन्हें काफी अच्छा लगता है. वे इंसानियत को धर्म मानते हैं.

    बदलते मौसम को लेकर उन्होंने बच्चों के स्वास्थ को लेकर जानकारी दी है कि दो से तीन साल तक बच्चो को माँ का दूध देना चाहिए. इसके अलावा 6 महीने के बाद बच्चों को भोजन में गाढ़ा पदार्थ देना जरूरी है. सभी टीकारण करें. सभी टीका सरकारी हॉस्पिटलों में फ्री में मिलते हैं. उन्होंने टीकाकरण को जरूरी बताया है. बच्चों को बाहर की चीजें खाने की आदते न डालने की भी सलाह उन्होंने दी है. बच्चों को कोल्डड्रिंक, चॉकलेट नहीं देना चाहिए. मोबाइल और टीवी से बच्चों को दूर रखिए. साइंटिफिक चैनल, कार्टून चैनल बच्चों को ज्यादा से ज्यादा आधे घंटे देखने दीजिए.

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