Published On : Mon, Dec 4th, 2017

दीक्षांत समारोह के प्रमुख अतिथि डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे ने सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों को किया मार्गदर्शन

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नागपुर: नागपुर यूनिवर्सिटी का 104वां दीक्षांत समारोह 3 दिसंबर को रेशमबाग स्थित सुरेट्ट भट सभागृह में सम्पन्न हुआ. इस समारोह में अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. अनिल सहस्त्रबुद्धे के हाथों सभी विद्यार्थियों को मेडल, पुरस्कार और डिग्रियां प्रदान की गईं. समारोह में नागपुर यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. सिध्दार्थविनायक काणे, प्र-कुलगुरु प्रमोद येवले, कुलसचिव पूरनचंद्र मेश्राम, विज्ञान विद्याशाखा के अधिष्ठाता डॉ. हरजीतसिंह जुनेजा, विधि विद्याशाखा के डॉ. श्रीकांत कोमावार, शिक्षा विद्याशाखा की अधिष्ठाता डॉ. राजश्री वैष्णव मौजूद थीं. इस दौरान डॉ.अनिल सहस्त्रबुद्धे ने विद्यार्थियों और उपस्थित लोगों को संबोधत करते हुए कहा कि उन्हें इस समारोह में शामिल होने की काफी ख़ुशी महसूस हो रही है. नागपुर विश्वविद्यालय ने पिछले 94 साल से शिक्षा के क्षेत्र में काफी अच्छा कार्य किया है. यूनिवर्सिटी ने 1923 में केवल 6 संलग्नित कॉलेजों और 923 विद्यार्थियों के साथ यह सफर शुरू किया था. जबकि आज इस यूनिवर्सिटी के अंतर्गत करीब 600 कॉलेज और 39 स्नास्तकोत्तर विभाग व 3 संचालित कॉलेज कार्यरत हैं. नागपुर यूनिवर्सिटी से अनेक शिक्षाविद्, शास्त्रज्ञ, न्यायधीश व राजनेता निकले हैं. जिसमें मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री व यहां तक प्रधानमंत्री शामिल रहे थे.

सहस्त्रबुद्धे ने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि देश में 50 प्रतिशत लोकसंख्या में 25 वर्ष से नीचे के आयु के युवाओं का देश को लाभ मिल सकता है. उन्होंने बताया कि पाठ्यक्रम में नियमित सुधार किया जाना चाहिए, प्रत्येक विद्यार्थी को छोटे अथवा बड़े उद्योगों में काम करने का मौके मिलना चाहिए. साथ ही इसके यूनिवर्सिटी की सभी सुविधाएं 24 घंटो तक विद्यार्थियों को मिलनी चाहिए. यूनिवर्सिटी ने 24 सजीव रूप से कार्यरत रहना चाहिए. देश में मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटीज, उन्नत भारत अभियान, स्किल इंडिया और स्टार्टअप इंडिया के रूप में युवाओं के पास अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने सभी पीएचडी प्राप्त करनेवाले विद्यार्थयों को बधाईयां दीं.

इस कार्यक्रम में कुलगुरु काणे ने सभी को मार्गदर्शन करते हुए कहा कि हमेशा सच बोलें, कर्तव्य से कभी भी विचलित न हों, राष्ट्र और सम्पूर्ण मानव जाति के हितों का सदा विचार करें. स्फूर्तिदायक ग्रंथों का अध्ययन करें. माता पिता, गुरुजनों का हमेशा सम्मान करें.