Published On : Mon, Apr 3rd, 2023
By Nagpur Today Nagpur News

आवश्यकता आधारित, भविष्योन्मुख दृष्टिकोण अपनाते हुए करें अनुसंधान

गडकरी ने वैज्ञानिकों से किया ग्रामीण एवं कृषि उन्मुख अनुसंधान करने का आवाहन
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नागपुर: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रविवार को नागपुर में अपील की कि वैज्ञानिकों द्वारा ग्रामीण और कृषि केंद्रित अनुसंधान किया जाना चाहिए ताकि आवश्यकता आधारित, क्षेत्रवार और साथ ही प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, उद्यमिता, भविष्य के दृष्टिकोण को अपनाकर देश और समाज को समृद्ध बनाया जा सके।

वे राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, नागपुर के निरी सभागार में भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ की नागपुर शाखा द्वारा आयोजित ‘वीमेन इन साइंस एंड एंटरप्रेन्योरशिप’- वाइस-2023′ कार्यक्रम के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस अवसर पर निरी के निदेशक डॉ. अतुल वैद्य, नागपुर मेडिकल कॉलेज के सेवानिवृत्त डीन डॉ. विभावरी दानी उपस्थित थे।

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अनुसंधान चार चीजों के बिना अर्थहीन है: सिद्ध प्रौद्योगिकी, कच्चे माल की उपलब्धता, आर्थिक व्यवहार्यता और विपणन क्षमता। नितिन गडकरी ने सुझाव दिया कि नागपुर में फ्लाई ऐश, नाग नदी के पानी, कचरा, ठोस कचरे पर शोध होना चाहिए। उत्तर भारत, पंजाब, हरियाणा में गेहूं और चावल के साथ-साथ बायो बिटुमेन का उत्पादन किया जा रहा है और कृषि को अब ऊर्जा में विविध किया जा रहा है। बिजली क्षेत्र की यदि बात करें तो नागपुर में वेकोली और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के पास बंजर भूमि में बांस लगाकर बायो एथेनॉल, बायो बिटुमेन का उत्पादन संभव है।

उन्होंने कहा कि कोयले की तुलना में बांस जलाने से पर्यावरण सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि उमरेड के पचगांव स्थित बुटीबोरी के एमआईडीसी से तैयार कपड़ों के कचरे से टिकाऊ और सुंदर गलीचा बनाने के लिए 1200 महिलाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस तरह के कच्चे माल का मूल्य जोड़कर, इसकी डिजाइनिंग और पैकेजिंग करके इसे वैश्विक बाजार में उतारा जा सकता है। बताया कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से बड़ी परियोजनाओं के निर्माण की लागत को कम किया गया है, इंडोरा से दिघोरी में मलेशियाई तकनीक का उपयोग किया गया है। हाल ही में उद्घाटित एक फ्लाई ओवर के दो पियरों के बीच की दूरी को कम करके पुल बनाया गया है।

गडकरी ने इस अवसर पर जोर दिया कि बीम को स्टील फाइबर में ढालकर अब लगभग 1600 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण किया जा सकता है। 1 हज़ार करोड़ रुपए में, जिससे 600 करोड़ रुपए की बचत हुई।

उन्होंने भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ के सभी पदाधिकारियों से शोध में नए अवसरों की तलाश करने और विज्ञान और उद्यमिता उपाध्यक्ष-2023 कार्यक्रम में महिलाओं के अवसर पर सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन में योगदान देने की अपील की। इस अवसर पर भारतीय महिला वैज्ञानिक संघ के पदाधिकारी, वैज्ञानिक, निरी के विद्यार्थी गण उपस्थित थे।

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