नागपुर: नागपुर मनपा द्वारा संचालित शहर बस सेवा के बस चालकों सह कर्मियों को न्यूनतम वेतन देने की मांग को लेकर कल से शिवसेना प्रणित कामगार यूनियन शहर बस सेवा ठप्प कर दिया। मनपा प्रशासन की पहल पर राज्य सरकार के सम्बंधित विभाग ने आंदोलनकारियों पर ‘एस्मा’ लगा दिया। लेकिन पुलिस विभाग की लापरवाही से आज भी बस सेवा ठप्प सा हैं,और आंदोलन के नेतृत्वकर्ता गिरफ्त से बाहर हैं.परिवहन सेवा ठप्प होने से आज से शुरू हुई १२ वीं की परीक्षा पर गहरा परिणाम देखने को मिला रहा हैं.
प्राप्त जानकारी के अनुसार आज से नागपुर जिले में १२ वीं के विद्यार्थियों की परीक्षा शुरू हुई,इनकी संख्या २८००० के आसपास हैं.लगभग ८०० बस चालक उक्त आंदोलनकारियों के नेतृत्वकर्ताओं के धमकाने पर ड्यूटी पर नहीं चढ़े,जिसके कारण शहर बस सेवा ठप्प हो गई.इन आंदोलनकारियों पर मनपा प्रशासन ने राज्य सरकार के सम्बंधित विभाग से ‘एस्मा’ लगाने की गुजारिश की थी,जिसकी गंभीरता को देखते हुए ‘एस्मा’ लगा दी गई.बावजूद इसके पुलिस विभाग ‘एस्मा’ कानून के तहत कार्रवाई नहीं करने से लगातार दूसरे दिन बस सेवा ठप्प हो गई हैं.शहर में लगभग ७५-८० हज़ार पुलिस पर उंगलियों पर गिनने लायक आंदोलनकारियों के नेतृत्वकर्ता भारी पड़ते जा रहे हैं.
इस मामले में मनपा प्रशासन और सत्तापक्ष का गंभीर न होना समझ से परे हैं.
आज सुबह डिम्ट्स के निर्देश पर १२वीं के विद्यार्थियों के परीक्षा स्थल तक आवाजाही के लिए आपली बस की हिंगणा बस डिपो से ८ बस निकाली गई.संभवतः २० बसें और मार्गो पर दौड़ाई जाएँगी।इन बसों को बुधवार को एमआईडीसी में कार्यरत बस चालकों एवं गणेशपेठ बस स्थानक के समीप निजी बस के चालकों की मदद से दौड़ाई जा रही हैं.

‘एस्मा’ लागु होते ही शहर पुलिस आयुक्त व अतिरिक्त आयुक्त ने पुलिस स्पेशल ब्रांच को आंदोलनकारियों पर नकेल कसने की निर्देश दिए थे.लेकिन पुलिस विभाग की सुस्ती से उक्त ५ आंदोलन के नेतृत्वकर्ता घर बैठे बस चालकों को धमका कर ड्यूटी पर न चढ़ने के निर्देश दे रहे हैं.जबकि ‘एस्मा’ एक्ट के सेक्शन ८ अंतर्गत बिना वारंट के आंदोलन को प्रभावित करने वाले को गिरफ्तार किया जा सकता हैं.








